Monday, 20 July 2026

ईबीसी_पॉलिटिक्स : सीमित नहीं अंतिम व्यक्ति को सशक्त करना लक्ष्य - प्रमोद सिंह चंद्रवंशी




देश से लेकर प्रदेश तक ईबीसी पॉलिटिक्स बीते कई दशकों के इतिहास को देखें तो अभी चरम पर है। ऐसे में लालू प्रसाद यादव और नीतीश कुमार के संदर्भ में देखें तो कई प्रश्न खड़े होते हैं। क्या भाजपा अति पिछड़े राजनीति को लेकर आगे बढ़ रही है या वास्तव में उसका उद्देश्य व प्रयास वंचित कमजोर वर्ग को सशक्त बनाना है। बिहार से लेकर देश की ईबीसी पॉलिटिक्स पर भाजपा ओबीसी मोर्चा के बिहार प्रदेश अध्यक्ष प्रमोद सिंह चंद्रवंशी से वरिष्ठ पत्रकार डॉ. उपेंद्र कश्यप ने बातचीत की।


प्रश्न- भारतीय जनता पार्टी के ओबीसी मोर्चा का प्रदेश अध्यक्ष आप हैं। प्रश्न है कि भाजपा अति पिछड़ी जातियों (EBC) को अपने राजनीतिक लाभ के लिए साधने की कवायद कर रही है या वास्तव में ईबीसी जातियों को सशक्त बनाने के साथ उसे विकसित होने का अवसर भी प्रदान करना चाहती है?


उत्तर-भारतीय जनता पार्टी पूरे देश में पिछड़ा वर्ग के भीतर आर्थिक एवं सामाजिक रूप से सबसे वंचित वर्ग, जिसे बिहार में अति पिछड़ा वर्ग (EBC) के रूप में जाना जाता है, को अलग पहचान और उचित प्रतिनिधित्व दिलाने के लिए निरंतर कार्य कर रही है। इसी उद्देश्य से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जस्टिस रोहिणी आयोग का गठन किया, ताकि पिछड़ा वर्ग के भीतर सबसे वंचित समुदायों की पहचान कर उनके समुचित विकास के लिए केंद्र एवं राज्य स्तर पर प्रभावी नीतियां बनाई जा सकें।


प्रश्न-भाजपा के पास ईबीसी को लेकर क्या योजनाएं हैं? राजनीतिक तौर पर उनकी भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए अब तक क्या-क्या किया गया है और आगे क्या-क्या किया जाना है। भाजपा सरकार ईबीसी जातियों के कल्याण के लिए क्या कर रही है? विशेष तौर पर बिहार में।

उत्तर-भारतीय जनता पार्टी का प्रारंभ से ही यह स्पष्ट मत रहा है कि अति पिछड़ा समाज को राजनीति और शासन की मुख्यधारा में सम्मानजनक भागीदारी मिलनी चाहिए। वर्ष 1978 में जननायक कर्पूरी ठाकुर ने पिछड़ा एवं अति पिछड़ा वर्ग का वर्गीकरण कर सामाजिक न्याय की मजबूत नींव रखी थी। किंतु वर्ष 1993 में तत्कालीन राज्य सरकार द्वारा पंचायती राज व्यवस्था में इस वर्गीकरण को समाप्त कर केवल पिछड़ा वर्ग के नाम पर आरक्षण का प्रावधान किया गया, जिसका भारतीय जनता पार्टी ने विधानसभा के भीतर और बाहर पुरजोर विरोध किया। उस समय सरकार के बहुमत के कारण विधेयक पारित हो गया। इसके बाद सामाजिक संगठनों और जनप्रतिनिधियों द्वारा उच्च न्यायालय में याचिका दायर की गई। न्यायालय ने कहा कि पंचायतों में आरक्षण का लाभ उन जातियों को नहीं मिलना चाहिए जो पहले से पर्याप्त प्रतिनिधित्व प्राप्त कर चुकी हैं। न्यायालय ने सरकार को अति पिछड़ा वर्ग के लिए पृथक व्यवस्था करने का निर्देश दिया। बाद में मामला सर्वोच्च न्यायालय तक गया और वर्ष 2001 में बिहार में बिना आरक्षण के पंचायत चुनाव संपन्न हुए।


जब भारतीय जनता पार्टी के सहयोग से नीतीश कुमार के नेतृत्व में बिहार में सरकार बनी, तब सर्वोच्च न्यायालय से लंबित याचिका वापस लेकर वर्ष 2006 में नया बिहार पंचायती राज अधिनियम बनाया गया। इस अधिनियम के तहत अति पिछड़ा वर्ग को 20 प्रतिशत आरक्षण प्रदान किया गया, जिससे हजारों अति पिछड़े परिवारों को पहली बार पंचायतों में नेतृत्व का अवसर मिला और वे राजनीतिक मुख्यधारा से जुड़े।


इसी प्रकार जननायक कर्पूरी ठाकुर को भारत रत्न देने की मांग वर्षों से उठती रही, लेकिन नरेंद्र मोदी सरकार ने उनको भारत रत्न देकर अति पिछड़ा समाज का सम्मान बढ़ाने का कार्य किया।


प्रश्न- बिहार में विधान परिषद के लिए 10 सदस्य निर्वाचित हुए हैं। उनमें 6 ईबीसी जातियों के हैं। क्या लालू प्रसाद यादव के सामाजिक न्याय का यह विस्तार है? राजद की राजनीति को कमजोर करने के लिए ईबीसी पॉलिटिक्स करने को भाजपा या एनडीए की चाल के रूप में देखा जाए या फिर या कुछ और है?

उत्तर-जहां तक बिहार विधान परिषद में अति पिछड़ा समाज के प्रतिनिधित्व का प्रश्न है, भारतीय जनता पार्टी ने सदैव उन जातियों को अवसर देने का प्रयास किया है जो अति पिछड़ा वर्ग के भीतर भी सबसे अधिक वंचित रही हैं। भाजपा की राजनीति केवल वोट प्राप्त करने की नहीं, बल्कि समाज के अंतिम व्यक्ति को आगे बढ़ाने की है। पार्टी का विश्वास है कि “सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास और सबका प्रयास” के बिना विकसित भारत और समृद्ध बिहार का निर्माण संभव नहीं है।

इसके विपरीत राष्ट्रीय जनता दल ने सामाजिक न्याय की बातें तो बहुत कीं, लेकिन व्यवहार में उसका लाभ सीमित लोगों तक ही सिमट कर रह गया। सामाजिक न्याय के नाम पर परिवारवाद को बढ़ावा मिला, जबकि समाज के सबसे वंचित वर्गों को अपेक्षित अवसर नहीं मिल सके।


प्रश्न-प्रमोद सिंह चंद्रवंशी ओबरा में लगातार असफल रहे। गया जिले से जिला परिषद के सदस्य रहे हैं। क्या अब गया में किसी सीट की तलाश अपने लिए कर रहे हैं? अगर हां तो वह कौन सी सीट होगी और क्यों होगी?


उत्तर-व्यक्तिगत रूप से मेरा उद्देश्य केवल चुनाव जीतना नहीं रहा है। समाज सेवा मेरा मूल लक्ष्य रहा है। चुनाव जीतना या हारना लोकतंत्र की स्वाभाविक प्रक्रिया है, लेकिन ओबरा विधानसभा की जनता का जो स्नेह, विश्वास और अपनापन मुझे आज भी प्राप्त है, वही मेरी सबसे बड़ी पूंजी है। मैं आज भी ओबरा की जनता के दिलों में स्थान रखता हूं और उनके सुख-दुख में सहभागी हूं।


प्रश्न- गया जिले की राजनीति को आप कैसे देखते हैं? खास कर ईबीसी पॉलिटिक्स के लिए जब डॉक्टर प्रेम कुमार जैसे बड़े अति पिछड़े चेहरे लगातार पांच दशक से भाजपा के लिए महत्वपूर्ण रूप से सक्रिय भूमिका में हों?

श्री चंद्रवंशी-मेरे लिए केवल गया जिला ही महत्वपूर्ण नहीं है। मेरा संकल्प पूरे बिहार के अति पिछड़ा समाज को भारतीय जनता पार्टी की विचारधारा, नीतियों, कार्यक्रमों और केंद्र तथा राज्य सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं से जोड़कर उन्हें सामाजिक, राजनीतिक और आर्थिक रूप से सशक्त बनाना है। चुनाव लड़ना मेरा लक्ष्य नहीं है। मेरा लक्ष्य और संकल्प है कि अति पिछड़ा समाज हर क्षेत्र में आगे बढ़े, सम्मानपूर्वक नेतृत्व करे और राष्ट्र निर्माण में अपनी प्रभावी भूमिका निभाए।


(बीरेंद्र यादव न्यूज के अतिपिछडा केंद्रित अंक में प्रकाशित)


#OBC #obcmahasabha #OBCMorcha #OBC_SC_ST #obc_politics #EBC_POLITICS #EBC #CASTE_POLITICS #BiharPolitics #BiharNews #bihar #IndianPolitics

No comments:

Post a Comment