Sunday, 16 April 2023

भूमि विवाद में एक युवक की पीट पीट कर हत्या

 



शव को लेकर किया करीब तीन किलोमीटर तक प्रदर्शन 

मृतक के दो पुत्र समेत तीन घायल, एक की स्थिति गंभीर

हमला के लिए इस्तेमाल आटो और स्कार्पियो बरामद

संवाद सहयोगी, दाउदनगर (औरंगाबाद) : शहर के वार्ड संख्या 18 पटवाटोली बम रोड निवासी राजेंद्र साव की पीट-पीटकर हत्या कर दी गई। शनिवार की सुबह भूमि विवाद को लेकर दो पक्षों में मारपीट हुई जिसमें राजेंद्र साव घायल हो गए। पीएचसी में लोग इलाज ले लिए ले गए जहां उनकी मौत होने की बात कही गयी। इसके बाद पीएचसी में भीड़ इकट्ठा होते चली गयी। उनकी उम्र 45 वर्ष बताई जाती है। जबकि इस घटना में उनके 22 वर्षीय पुत्र पिंटू कुमार और 24 वर्षीय पुत्र रवि कुमार के साथ पड़ोसी शिव कुमार गुप्ता घायल हुए हैं। पिंटू कुमार की हालत गंभीर बताई जा रही है। मृतक के शव को प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के ओटी से निकालकर स्ट्रेचर पर लिए हुए भखरुआं तक करीब तीन किलोमीटर तक प्रदर्शन किया गया। भखरुआं में सड़क जाम कर दी गई। प्रशासन के समझाने बुझाने के बाद मामला शांत हुआ और फिर शव को लेकर अंत्य परीक्षण के लिए जिला मुख्यालय भेजा गया। संवाद प्रेषण तक शव का अन्त्य परीक्षण नहीं हुआ है। इस मामले में घायल का इलाज अरविंद हास्पिटल में किया जा रहा है। पीड़ित पक्ष का कहना है कि एक लाज और एक निजी विद्यालय में बजाप्ता बैठक कर योजनाबद्ध तरीके से हमला की गई है। हमलावर स्कार्पियो और आटो से आए थे। पुलिस ने एक स्कार्पियो और एक आटो को बरामद किया है। बताया गया कि इन्हीं वाहनों से लाठी और खंती लेकर हमलावर घटना स्थल पर आए थे। इस संबंध में पीड़ित पक्षों द्वारा संवाद प्रेषण तक प्राथमिकी के लिए आवेदन नहीं दिया गया है। काफी लोगों ने प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में ही नारेबाजी शुरू कर दी। यहां से निकल कर फिर दाउदनगर बारुण रोड पर नारेबाजी शुरू किया। नगर परिषद, पुलिस और अंचल अधिकारी के खिलाफ नारेबाजी की गई। प्रदर्शन करने वालों ने यह नारा भी लगाया कि- राजनीति मत करो। इसके बाद उत्तेजित भीड़ प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के ओटी में रखे गए शव को निकालकर स्ट्रेचर सहित भखरुआं ले गई। यहां तोड़फोड़ भी की गई। प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के सूत्रों के अनुसार यह स्ट्रेचर संवाद प्रेषण तक अस्पताल को वापस नहीं मिल सका है। पीएचसी में काफी देर तक भीड़ इकट्ठा रही और पुलिस प्रशासन अपना कार्य करता रहा।  मामला भूमि विवाद से जुड़ा बताया जा रहा है। बताया जा रहा है कि पुरानी शहर वार्ड संख्या तीन निवासी राजेंद्र प्रसाद द्वारा जिस जमीन पर निर्माण का काम करने का प्रयास किया जा रहा है वह जमीन नगर परिषद की है और इनके निर्माण के बाद लगभग 10 घरों का नाली का निकास बंद हो जाएगा। इसलिए ही विवाद हुआ है। दूसरी तरफ राजेंद्र प्रसाद का पक्ष यह है कि उन्होंने जमीन केवाला से खरीदा है और जमीन पर उनका मालिकाना हक बनता है।





एसपी, एसडीपीओ व एसएचओ से मांगा था संरक्षण

संवाद सहयोगी, दाउदनगर (औरंगाबाद) : हत्या कांड के दूसरे पक्ष की तरफ से

पुरानी शहर वार्ड नंबर तीन निवासी राजेंद्र प्रसाद ने डाक के माध्यम से 11 अप्रैल को ही एसपी, दाउदनगर के एसडीपीओ और थाना अध्यक्ष को आवेदन भेज कर संरक्षण की मांग किया था। जिसमें कहा है कि वार्ड नंबर 18 में खाता नंबर 164 प्लाट नंबर 2354 एराजी 1.065 डिसमिल जमीन केवाला से 10 अप्रैल 2008 को उसकी पत्नी सविता देवी ने  बंधिया देवी से खरीदा था। खरीदी के समय विक्रेता ने कब्जा दिया। लेकिन अब शिव प्रसाद, राजेंद्र प्रसाद, पिंटू कुमार, विकास कुमार एवं सिकेश कुमार द्वारा जमीन को बा जबरदस्ती हड़पने का प्रयास किया जा रहा है। जब भी जमीन पर जाते हैं गाली गलौज करते हुए मारपीट पर उतारू हो जाते हैं और कहते हैं कि हम लोग तुम्हें यहां घर नहीं बनाने देंगे। जमीन पर काम लगाओगे तो तुम्हें जान से हाथ धोना पड़ेगा। कहा है कि जमीन पर चहारदीवारी देना चाहते हैं। इसमें उन्होंने 14 अप्रैल के बाद कभी भी जमीन में चारदीवारी देने जाने की बात कही है। आवेदन के माध्यम से उसने पुलिस से संरक्षण की मांग की थी।


घटना:- 15.4.23

औरंगाबाद में अरवल के पूर्व विधायक के पुत्र की गोली मारकर हत्या

 



अरवल के दो बार विधायक रहे हैं रविंद्र सिंह 

पत्नी उषा शरण ने लगाया पुत्र की हत्या करवाने का आरोप 

बनाये गए हैं विधायक समेत छह नामजद आरोपित 

मौका ए वारदात से सिर्फ दो खोखा बरामद

दाउदनगर (औरंगाबाद) : अरवल के दो बार विधायक रहे रविंद्र सिंह के पुत्र कुमार गौरव उर्फ दिवाकर की गोली मारकर हत्या कर दी गई। उनकी उम्र 35 वर्ष बताई जाती है। अपराधियों ने शुक्रवार की रात लगभग 9:30 बजे औरंगाबाद के दाउदनगर थाना क्षेत्र के हिच्छन बिगहा गांव में उनके घर से कुछ दूरी पर उन पर हमला किया और घटनास्थल पर ही उनकी मृत्यु हो गई। एसडीपीओ कुमार ऋषि राज के अनुसार इस मामले में दो खोखा बरामद किया गया है। यह 1.35 बोर का बताया जा रहा है। बताया गया कि देशी बंदूक से गोली मार जाने की अधिक संभावना है। सूत्रों के अनुसार वह खाना खाकर घर से अपने खेत की तरफ गए थे। जहां आरोपित उनसे भिड़ गए और हत्या करने के बाद खलिहान में पुआल के गांज में शव को छुपा दिया। इस बीच दिवाकर ने अपनी मां उषा शरण को फोन किया। लेकिन बात नहीं हो सकी। मां ने काल बैक किया। लेकिन बात नहीं हो सकी। इस बीच फायरिंग की आवाज सुनकर खेत की तरफ मां दौड़ी। बेटे को बेसुध पड़ी देखी। सूत्रों के अनुसार दो गोली सीने में, एक पीठ में और एक पैर पर लगी है। इस मामले में मृतक की मां उषा शरण ने प्राथमिकी कराई है। प्राथमिकी आवेदन में उन्होंने कहा है कि पूर्व विधायक रविंद्र सिंह ने सुनियोजित तरीके से योजना बनाकर अपने गुर्गों से हत्या करवाया है। पूर्व विधायक के अलावा विनय कुमार सिंह, सुधांशु, रोशन उर्फ बमड, रवि और सत्येंद्र महतो को नामजद आरोपित बनाया गया है। सभी आरोपित हिच्छन बिगहा के निवासी बताए जाते हैं। प्राथमिकी आवेदन में कहा गया है कि वर्ष 1995 में पहली बार जब रविंद्र सिंह विधायक बने तो 1996 में उन्होंने अपनी पत्नी को तलाक देने की धमकी दी। पूर्व विधायक के चरित्र पर आरोप लगाया गया है। घटना के तत्काल बाद से गांव में पुलिस कैंप कर रही है। एसडीपीओ कुमार ऋषि राज ने बताया कि तकनीकी साक्ष्य उपलब्ध करने पर काम किया जा रहा है। कोई प्रत्यक्ष गवाह उपलब्ध नहीं है इसलिए मोबाइल डंप और सीडीआर निकाला जा रहा है ताकि वास्तविक हत्यारे का पता लगाया जा सके। मामले के उद्भेदन के लिए एसआईटी का गठन भी किया गया है। बताया कि गांव में मौका ए वारदात पर पुलिस को यह जानकारी दी गई की दो अपराधी आए थे जिन्होंने हत्या की। शव को अंत्य परीक्षण कराकर स्वजनों को सौंप दिया गया। गांव में मातम और दहशत का माहौल है। काफी संख्या में भीड़ इकट्ठा हुई और तरह-तरह की बात की जा रही है।





जिनके सहारे गांव की सुरक्षा, उनकी सुरक्षा में कैसे लगा सेंध


चोरी, हत्या व लूट की घटना पर सबसे पहले पहुंचे थे पूर्व विधायक 

सतर्कता इतनी कि कोइरीटोला से गुजरने पर लोग टोक देते थे 

पहले से ही था सब कुछ ओपन सीक्रेट मामला

गांव आये पिता रवींद्र सिंह को विरोध के कारण भागना पड़ा


 उपेंद्र कश्यप, दाउदनगर (औरंगाबाद) : दाउदनगर और अरवल की सीमा पर स्थित गांव है हिच्छन बिगहा। यहां जाने का रास्ता अरवल जिला के कलेर प्रखंड के अग्नूर से गुजरता है। इसी गांव में लालू प्रसाद यादव की पुत्री रोहिणी आचार्य का विवाह हुआ है। इस गांव की सुरक्षा की जिम्मेदारी कुमार गौरव उर्फ दिवाकर की हत्या में आरोपित बनाए गए इनके पिता पूर्व विधायक रविंद्र सिंह की रही है। ग्रामीणों में इसे लेकर कई सवाल हैं, जो उनकी संलिप्तता को लेकर आशंका को पुष्ट करती है। उनका सुरक्षा तंत्र काफी मजबूत माना जाता है। ग्रामीणों की मानें तो इलाके में चोरी, हत्या और लूट की घटना इनकी सुरक्षा प्रबंधों के कारण ही नहीं होती है। फिर भी यदि कभी भी इस तरह की कोई घटना घटी तो सबसे पहले पूर्व विधायक पहुंचे थे। अब जब उनके पुत्र की हत्या उनके ही घर के समीप हो गई है तो गांव में सबसे बड़ा सवाल यही पूछा जा रहा है कि उनकी सुरक्षा में गांव रहता था, फिर उनकी ही सुरक्षा में ही सेंध कैसे लग गया। उनके पुत्र की हत्या कैसे कोई कर गया। ग्रामीणों की मानें तो गांव में जो कोइरी टोला कहा जाता है यानी जहां रविंद्र सिंह का घर है उस मोहल्ले से कोई दिन में भी गुजर जाए तो उधर बैठे लोग पूछ बैठते थे कि इधर कहां जा रहे हैं। ऐसी सजगता सुरक्षा को लेकर यहां रही है। एक ग्रामीण ने सवाल किया कि पूरे क्षेत्र की सुरक्षा जिन पर थी, जिनके घर में हथियार है, जिनके साथ अंगरक्षक है, फिर उन्हीं के घर में हत्या कैसे हो गई। मालूम हो दिवाकर की हत्या के तुरंत बाद पूर्व विधायक रविंद्र सिंह गांव पहुंचे थे। बताया गया कि वे सीमावर्ती प्रखंड कलेर में बाबा साहब भीमराव अंबेडकर जयंती से जुड़े एक कार्यक्रम में शामिल थे। हत्या की सूचना के बाद गांव पहुंचे और उन्होंने यह जानने का प्रयास किया कि कैसे और किसके द्वारा हत्या की गई है। तभी गांव में इनका विरोध शुरू हुआ और चुपके से उनको निकल जाना पड़ा। गांव में यह बात खुलेआम कहीं जा रही है कि किस-किस ने गोली चलाई होगी और सभी को इनका आदमी बताया जा रहा है। ग्रामीण साफ कह रहे हैं कि हर ग्रामीण यह जानता था कि इस तरह की घटना को अंजाम दिया जा सकता है और कौन दे सकता है। यह सब कुछ पहले से ही ग्रामीणों को पता था और ग्रामीण खुलकर चर्चा इस बात की कर रहे हैं। इस संबन्ध में रवींद्र सिंह का पक्ष जानने के लिए इस संवाददाता ने दो बार काल किया तो रिसीव नहीं किया। फिर बाद में उनका मोबाइल स्वीच आफ बताने लगा।




विधायक बनना चाहते थे कुमार गौरव 

फोटो-दिवाकर और रवींद्र सिंह (दोनों फाइल फोटो)

 अरवल से लड़े थे चुनाव, आरोपित पिता रहे हैं दो बार विधायक 

पत्नी का दावा- अपनी टिकट दिया था पति को 

संवाद सहयोगी, दाउदनगर (औरंगाबाद) : रविंद्र सिंह औरंगाबाद जिला के सीमावर्ती जिला अरवल विधानसभा क्षेत्र से दो बार विधायक बने थे। उसी क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करने की आकांक्षा उनके दूसरे पुत्र कुमार गौरव उर्फ दिवाकर ने पाल रखा था। अविवाहित और लगभग 32 वर्ष की उम्र में कुमार गौरव ने आई एन डी यानी निर्दलीय अरवल विधानसभा क्षेत्र से 2020 में चुनाव लड़ा था। तब उन्हें मात्र 260 मत प्राप्त हुए थे। मालूम हो कि रविंद्र सिंह अतिवादी नक्सली संगठन के सदस्य के रूप में सक्रिय थे और फरारी जीवन जी रहे थे। वर्ष 1995 में लालू प्रसाद यादव से करीबी होने के कारण इनको चुनाव लड़ने का मौका मिला था। इनकी पत्नी उषा शरण का दावा है कि तब जनता दल का टिकट उन्हें मिला था। क्योंकि वह फरार चल रहे थे। लेकिन उन्होंने रविंद्र सिंह को विधायक बनवाने का काम किया और इनके खिलाफ जो दर्जनभर मामले थे उसे खत्म करवाया। दावा किया कि विधायक बनते ही सबसे पहले उन्होंने पत्नी को तलाक देने की धमकी दी और तब से ही संबंध खराब होता चला गया। बताया जाता है कि स्थिति इतनी बिगड़ती चली गयी कि उन्होंने सिंदूर लगाना भी छोड़ दिया। बाद में रविंद्र सिंह विधायक नहीं बन सके। लेकिन 2015 में राजद से टिकट मिला और पुनः विधायक बन गए। इसके बाद 2020 के चुनाव में उन्हें टिकट नहीं मिला। निर्दलीय उनके पुत्र दिवाकर ने चुनाव लड़ा जिसकी हत्या के आरोपित अब वे स्वयं बन गए हैं।




घर से 400 कदम दूर की गई हत्या परिचित ही हत्यारे, शक पर उठा लिया था कुदाल 

संवाद सहयोगी, दाउदनगर (औरंगाबाद) : दिवाकर के हत्यारे पूर्व से ही दिवाकर के परिचित थे। ग्रामीणों के अनुसार हिच्छन बिगहा के जिस घर में उषा शरण रहती हैं वहां से लगभग 400 कदम दूर खेत में खाना खाने के बाद दिवाकर टहलते हुए गए थे। आमतौर पर वे प्राय: खाना खाने के बाद टहलने जाते रहे हैं। इसी बीच सड़क से लगभग 60 कदम दूर बोरिंग के पास उनको लोगों ने पकड़ा। बातचीत करते हुए जा रहे थे। उनको शक हुआ और तब उन्होंने अपनी मां को काल किया। बात नहीं हुई तो उषा शरण ने दिवाकर को काल बैक किया। लेकिन बात नहीं हुई। आशंका के कारण दिवाकर ने कुदाल उठा लिया। अपराधी। भीड़ गए। मारपीट भी की गयी है, जैसा कि ग्रामीण बताते हैं। इसके बाद उसे गोली मार दी गई और शव को पुआल में छुपा दिया गया। ग्रामीणों का कहना है कि हो सकता है कि अपराधियों की योजना पुआल के गांज में आग लगा देने की रही हो। ऐसा होता तो फिर शव को पहचानना भी मुश्किल हो जाता। घटना के वक्त काफी ग्रामीण खाना खा रहे थे। गोली की आवाज सुनकर लोग बाहर निकले। तब तक उषा शरण घटनास्थल पर पहुंच गयी। मौका ए वारदात पर सिर्फ खून के निशान देखे जा सकते हैं।


श्वान दस्ता को नहीं मिली कामयाबी 

हत्या की घटना के तत्काल बाद श्वान दस्ता को बुलाया गया। लेकिन मौका ए वारदात पर अपराधियों का जूता चप्पल नहीं मिला। सिर्फ मृतक का खून था। वहां से श्वान दस्ता बोरिंग पर गया। पुलिस अधिकारी के अनुसार इस मामले में कोई कामयाबी पुलिस को नहीं मिली है। श्वान दस्ता द्वारा न कोई गोली बरामद किया गया न खोखा बरामद किया गया है। पुलिस को अब सिर्फ तकनीकी साक्ष्य के आधार पर हत्यारे तक पहुंचने की उम्मीद है। जिसे उपलब्ध करने के प्रयास में पुलिस जुटी हुई है।



Wednesday, 12 April 2023

शहरीकरण हो रहा किंतु जन आकांक्षाएं रह गयी अधूरी



जितना हुआ हासिल उससे अधिक प्राप्त करने की आकांक्षा

सरकारी शिक्षा व स्वास्थ्य व्यवस्था का हाल बदतर

निजी विद्यालयों व अस्पतालों के भरोसे है आबादी

उपेंद्र काश्यप, दाउदनगर (औरंगाबाद) : शिक्षक प्रशिक्षण महाविद्यालय के एक भवन में अनुमंडल कार्यालय प्रारंभ हुआ था। शहरीकरण बढ़ा लेकिन कई मामलों में जन आकांक्षाएं पूरी नहीं हुई। बाद में नया भवन बना जिसमें अनुमंडल कार्यालय शिफ्ट हुआ। इसी परिसर में अनुमंडल व्यवहार न्यायालय और अन्य कार्यालय भी बना। अनुमंडल कार्यालय और न्यायालय के संदर्भ में भवनों की संख्या कम बताई जाती है। न्यायिक पद रिक्त हैं, और की जरूरत बताई जाती है। दाउदनगर नासरीगंज पुल बना। दाउदनगर-गया मार्ग चौड़ी हुई और अधिक चौड़ी करने की योजना है। लेकिन औरंगाबाद पटना मार्ग के चौड़ीकरण की शीघ्र आवश्यकता है। रेलवे लाइन से नहीं जोड़ने का गम सबको है। बड़े बड़े माल खुले, शहर का विस्तार हो रहा है, आवागमन का दबाव बढ़ रहा है। आवागमन को दुरुस्त करने, सड़कों पर दबाव कम करने का काम अभी तक अधूरा है। ओबरा, गोह और हसपुरा में पर्याप्त विकास नहीं हो सका है। यहां अब भी पिछड़ापन साफ-साफ दिखता है। बाजार में रौनक तो पूर्व की अपेक्षा बढ़ी, लेकिन उस अनुपात में संसाधन नहीं बढ़े। बाजार अतिक्रमण का शिकार है और आवागमन जितना अधिक बढ़ा उस अनुपात में सड़के चौड़ी नहीं की जा स्की। जाम की समस्या से परेशान हैं। इन तीनों प्रखंड मुख्यालयों में शहरीकरण की जरूरत है। तीनों ही अभी तक नगर निकाय नहीं बने हैं। स्वास्थ्य की सुविधाएं नहीं बढ़ी है। अनुमंडल अस्पताल इसी दौरान बना लेकिन प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र हो, अतिरिक्त प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र हो या उप स्वास्थ्य केंद्र हो, उनकी स्थिति नहीं सुधरी है। सरकारी शिक्षण संस्थानों का हाल बद से बदतर होता चला गया और नतीजा निजी शिक्षण संस्थानों ने आबादी को शिक्षित करने की जिम्मेदारी संभाली। 32 वर्ष की इस यात्रा में जितना हासिल हुआ उससे जन आकांक्षाएं तृप्त नहीं हुई। अभी और हासिल करना बाकी रह गया है।



उच्च शिक्षा की व्यवस्था नहीं हुई


डाक्टर शंभू शरण सिंह कहते हैं कि अनुमंडल की घोषणा का सबसे ज्यादा असर जन आकांक्षाओं पर पड़ा। विकास का आकांक्षी जनसमूह शहरीकरण की ओर इस बढ़ते कदम का खुद हिस्सा बना और अपनी बेहतरी के सपने देखने लगा। अनुमंडल बनने के साथ शिक्षा, स्वास्थ्य एवं अन्य सुविधाओं की चाह में लोग अनुमंडल मुख्यालय में बसे। अपनी क्षमता के अनुसार जमीन और घर की व्यवस्था की, लेकिन 32 साल पूरा होने के पश्चात शहर का जो स्वरूप होना चाहिए वह न हो सका। हालांकि सड़कें थोड़ी ठीक हुई। विद्युत व्यवस्था सुधरी। प्राथमिक, माध्यमिक स्तर की शिक्षा का प्रबंध हुआ लेकिन उच्च शिक्षा में कहीं कोई अच्छी व्यवस्था नहीं हुई। चिकित्सा के क्षेत्र में भी अपेक्षित विकास नहीं हुआ। प्लानिंग के तहत शहर को बसाने की बड़ी योजना नहीं बनी। ना अच्छा बस पड़ाव बना। टेंपु के लिए समुचित व्यवस्था नहीं हुई। आने वाले दिनों में हम यह उम्मीद कर सकते हैं कि जिन सपनों को मन में संजोकर लोग मुख्यालय में बसे हैं उनके सपनों को साकार करने को और बेहतर कोशिश की जाएगी और साथ ही जिला मुख्यालय के रूप में दाउदनगर स्थापित होगा।



समाजसेवी डा. प्रकाश चंद्रा ने कहा कि तुलनात्मक रूप से देखें तो औरंगाबाद जिला में जिला मुख्यालय के बाद सर्वाधिक विकास दाउदनगर का हुआ। अनुमंडल बनने से जो नई उम्मीद और आशा का संचार हुआ था कुछ हद तक पूरा हुआ। नए रेस्टोरेंट, होटल, ब्रांडेड शोरूम आये, शहर का विस्तार हुआ। जो भखरुआं 100 मीटर के दायरे में सिमटा रहता था वह दो किलोमीटर तक फैला। वाहनों की संख्या बढ़ी। यातायात का दबाव बढ़ा। आबादी बढ़ी। इससे कुछ मुश्किलें बढ़ी हैं। बाईपास होने से यातायात का दबाव कम हुआ है। शिक्षण संस्थान बढ़े। बेहतर परीक्षा परिणाम आने से गांव की बड़ी आबादी शहर में किराए के मकान में रहकर बच्चों को पढ़ा रही है। जिससे आबादी का दबाव बढ़ा। जीवन शैली बदली। अपने लिए घर बनाना मुश्किल हो गया। लेकिन नौकरियां जा रही हैं, बेरोजगारी है। आनलाइन और बड़े शोरूम के आने से छोटे दुकानदार परेशान हैं। जेल और अनुमंडल होने से मुकदमे के लिए जिला आना-जाना लोगों का कम हुआ लेकिन घर में ही सुविधाएं बढ़ने से प्रशासन और कानून का भय भी लोगों में कम हुआ है।

योजना के फेर में तोड़ दिया घर, अब रह रहे किराए पर

 जागरण आपके द्वार : वार्ड संख्या नौ का हाल 



16 सड़कें नहीं बन सकी पक्की, रह गई कच्ची 

वार्ड संख्या नौ में आवास योजना के तहत हुआ था 78 व्यक्ति का चयन 

नहीं बन सका किसी का भी पूरा घर

दाउदनगर (औरंगाबाद) : वार्ड संख्या नौ का बड़ा बुरा हाल है। प्रधानमंत्री शहरी आवास योजना के तहत 78 लाभुकों का चयन किया गया था। जिसमें लगभग 60 व्यक्ति को ही प्रथम किस्त मिल सका, जबकि दो व्यक्ति ऐसे हैं जिन्हें दूसरी किस्त भी मिली है। तमाम लोगों ने अपना पहले तो घर तोड़ दिया और अब पैसे के अभाव में घर बना नहीं पा रहे हैं। नतीजा यह है कि सभी लोग 1000 रुपये से 3000 मासिक किराया देकर किराए पर मकान लेकर रह रहे हैं। आक्रोश इतना है कि कभी भी लोग प्रदर्शन करने उतर सकते हैं। दूसरी बड़ी समस्या यह है कि इस वार्ड की 16 सड़कें ऐसी हैं जो कच्ची ही रह गई। निर्माण नहीं हो सका। यह वार्ड पुरानी शहर इलाके में है। छत्तर दरवाजा से किला तक जो सड़क गई है वह अतिक्रमण का शिकार है। नाली जाम रहता है। लोगों को इससे परेशानी हो रही है। वार्ड पार्षद प्रतिनिधि अमित कुमार ने बताया कि दो दर्जन से अधिक ऐसे लोग हैं जिनको शौचालय योजना का भी दूसरी किस्त नहीं मिला है। कई लोगों का नाम राशन कार्ड में छूट गया है।



वार्ड में मतदान केन्द्र नहीं


विवेकानंद मिश्रा कहते हैं कि वार्ड संख्या नौ के मतदाताओं के लिए मतदान केंद्र इस वार्ड में नहीं है। लोकसभा और विधानसभा तो लोग दूसरे के वार्ड में जाकर मतदान करते हैं। पर जब वार्ड का चुनाव आता है तो चलंत बूथ भी बनाया जाता है। वार्ड में मतदान केंद्र हो जाए तो सबको काफी सहूलियत होगी। दूसरे इस वार्ड में जोड़ा मंदिर के आसपास नल जल योजना का लाभ आज तक नहीं मिला। नल तो लगा है पर पानी गायब है। वार्ड पार्षद की पहल पर भी कोई सुनवाई नहीं हुई।



अतिक्रमण से बनी रहती है दुर्घटना की आशंका 


आरटीआई एक्टिविस्ट रहे श्रीनिवास कहते हैं कि मुख्य पथ के नाली का चौड़ीकरण अति आवश्यक है। इसके साथ ही मुख्य पथ पर लकड़ी रखकर अतिक्रमण कर लिया गया है। जिससे दुर्घटना की आशंका बनी रहती है। इसे हटाने का कभी प्रयास नहीं किया जा रहा है। मुख्य पथ पर गंदगी रहती है। नाली जाम रहता है जिससे भी समस्या है।



एक इंच भी नहीं बनी पक्की सड़क


सामाजिक कार्यकर्ता सत्येंद्र पासवान कहते हैं कि पासवान टोली मोहल्ला में एक इंच भी पक्की सड़क नहीं बनी। जबकि यहां लगभग ढाई सौ की आबादी रहती है। बताया कि राजेंद्र भगत के घर से पासवान टोली तक और पासवान टोली में कहीं पक्की सड़क नहीं बनी। लगभग 75 प्रतिशत नाली नहीं बनाया गया है। मात्र लगभग 25 प्रतिशत नाली का निर्माण हुआ है। प्राथमिक विद्यालय और सामुदायिक भवन की मोहल्ले में आवश्यकता है।



सही जगह नहीं है डस्टबिन 


कृष्ण मुरारी शर्मा कहते हैं कि जहां डस्टबिन होना चाहिए वहां नहीं रखा रहता है। सही जगह डस्टबिन रखा जाना चाहिए। जहां सफाई रहती है वहीं सफाई होती रहती है, जबकि जिस गली और मोहल्ले में कचरा लगा रहता है वहां सफाई नहीं होती। नालियों की पटिया टूट गई है। वह भी नहीं बन रहा है। जिससे आवागमन मुश्किल हो रहा है। आपसी सहयोग से लोगों को पटिया लगाना पड़ रहा है।



विकास के लिए किया हर काम 


वार्ड पार्षद सुमित्रा साव कहती हैं कि उन्होंने वार्ड के विकास के लिए लगातार प्रयास किया। आवास योजना को स्वीकृत कराया। प्रथम व द्वितीय किस्त दिलाने का प्रयास किया। सात नली गली का पीसीसी निर्माण करवाया। कई गलियों में नाली में पाइप लगाकर आवागमन को सुगम बनाया। सामाजिक सुरक्षा पेंशन अधिक से अधिक लोगों को दिलाने का काम किया। पारिवारिक लाभ की राशि दिलवाई। गली-गली में विद्युत खंभा लगाया और स्ट्रीट लाइट लगाया ताकि रोशनी की पर्याप्त सुविधा उपलब्ध हो सके।



राजनीतिक विशेषता 

वार्ड संख्या नौ की राजनीतिक विशेषता यह है कि यहां पति और पत्नी दोनों वार्ड पार्षद रहे हैं। जब वर्ष 2002 में नगर पंचायत का चुनाव प्रारंभ हुआ था तब अधिवक्ता ललन प्रसाद सिंह वार्ड पार्षद बने और वर्ष 2007 में सुनैना देवी वार्ड पार्षद बनी। जिनके पति अटल बिहारी वाजपेई भाजपा की राजनीति में सक्रिय हैं। जब 2012 में चुनाव हुआ तो पूर्व वार्ड पार्षद ललन प्रसाद सिंह की पत्नी मंजू देवी वार्ड पार्षद बनीं। वर्ष 2017 में चुनाव नहीं हुआ और 2018 में नगर परिषद के रूप में पहली बार जब चुनाव हुआ तो सुमित्रा साव वार्ड पार्षद बनी। 



प्रमुख मोहल्ला :- कुरमीटोला, पासवान टोली, अंजान शहीद, तकिया मल्लाह टोली


 प्रमुख स्थान : जोड़ा मंदिर, चर्च, पुराना शहर स्थित जीमूतवाहन भगवान चौक, पासवान टोली में महावीर मंदिर, सोनटतीय काली स्थान, प्लेग देवी मंदिर




Sunday, 9 April 2023

तीन दशक में अनुमंडल की आबादी हो गयी दोगुनी



1991 में हुआ था दाउदनगर अनुमंडल का गठन 

515596 थी वर्ष 1991 में अनुमंडल की आबादी 

1018051 लोग अब रहने लगे 2023 में

उपेंद्र कश्यप, दाउदनगर (औरंगाबाद) : दाउदनगर अनुमंडल का गठन हुए 32 वर्ष हो गए। इस यात्रा में आबादी लगभग दोगुनी हो गई लेकिन जन आकांक्षा अधूरी रह गई। मामला मानव संसाधन का हो या भौतिक संसाधनों का, जनाकांक्षा तो पूरी कतई नहीं हुई। जब वर्ष 1991 में 31 मार्च को दाउदनगर के अनुमंडल गठन की घोषणा की गई थी तब 515596 लोग रहते थे। वर्ष 2023 में जो जातीय सर्वेक्षण हो रहा है उसके मुताबिक 1018051 लोग इस अनुमंडल में रहने लगे हैं। इन 32 वर्षों में 502455 लोग बढ़े। यानी आबादी लगभग दोगुनी हो गई। लेकिन इस मुताबिक संसाधन दुगनी नहीं हुई। वर्ष 1991 में दाउदनगर प्रखंड से अनुमंडल बना था। तब इसकी आबादी 515596 थी। अनुमंडल बनने के समय नक्सलवादी गतिविधिया चरम पर थीं। इस कारण पिछडे़ इस इलाके में शिक्षा और प्रशासनिक विकास की गति तेज हुई तो ग्रामीण इलाके से बड़ी आबादी नये बने और खुद को गढ़ने में व्यस्त रहे शहर की ओर आयी। इससे शहरी क्षेत्र की आबादी काफी बढ़ी। 1991 में नगरपालिका क्षेत्र की आबादी 30331 थी जो 2001 में बढ़कर 38014 हो गई। और 2011 में 52340 है। वर्ष 2001 से 2011 के दशक में 27.89 फीसद आबादी बढ़ी, जबकि 1991 से 2001 के दशक में यह वृद्धि दर 25.77 रही है। 2001 की जनगणना के अनुसार अनुमंडल के सभी चार प्रखंड गोह, हसपुरा, ओबरा और दाउदनगर की कुल आबादी 776987 है। इसके अतिरिक्त नगर पंचायत की आबादी 52340 है। अर्थात कुल 829329 है। इसमें ओबरा की 226379, दाउदनगर की 154225, हसपुरा की 160475 एवं गोह की 235908 और नगर पंचायत की आबादी 52340 है। वर्ष 2001-2011 के दशक में यह वृद्धि दर रही 37.68 फीसद रही। इस तरह आने वाले दशकों में जनसंख्या वृद्धि से विकास को होड़ लेने की आवश्यकता होगी।





बोलते तथ्य :


2011 के मुकाबले 2023 में दाउदनगर प्रखंड के ग्रामीण इलाकों में यानी दाउदनगर के 15 पंचायतों में कुल 42142 की आबादी बढ़ी है। 2011 की जनगणना के अनुसार 154490 आबादी थी।



दाउदनगर नगर परिषद की आबादी जातीय सर्वे में 65543 बताई गई है। 2011 में शहर की आबादी 52364 थी। यानी लगभग एक दशक में 13179 लोग शहर में बढ़े। प्रतिशत में यह आंकड़ा 20.10 आता है।



2011 में हुए जनगणना के अनुसार 226007 लोग ओबरा में रहते थे। लेकिन जातीय सर्वे के अनुसार अब 272901 लोग रहते हैं।


हसपुरा प्रखंड में 2011 में कुल आबादी 160820 थी। नई जातीय सर्वे के अनुसार अब यहां 198761 लोग रहते हैं।



गोह प्रखंड में 2011 की जनगणना के अनुसार आबादी 234400 थी। अब 284214 लोग यहां रहते हैं।



Wednesday, 5 April 2023

स्वास्थ्य प्रबंधक कक्ष अब मिला प्रभारी को

 


स्वास्थ सेवाओं को सुदृढ़ बनाने की जरूरत

जागरण प्रभाव


दाउदनगर (औरंगाबाद) : प्राथमिक स्वास्थ केंद्र में प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी डा.शिवशंकर झा ने चिकित्सकों एवं स्वास्थ प्रबंधक के साथ बुधवार को बैठक की। चिकित्सा पदाधिकारी के चैंबर के अभाव पर चर्चा की गई। बताया गया कि स्वास्थ्य प्रबंधक के कक्ष को चिकित्सा पदाधिकारी के लिए दे दिया गया है। जो भी कमियां है ,उसे दूर करने का पूरा प्रयास किया जा रहा है, ताकि आम जनता को बेहतर तरीके से स्वास्थ सेवाओं का लाभ मिल सके। मालूम हो कि गत तीन अप्रैल को ही दैनिक जागरण ने रात का रिपोर्टर अभियान के तहत इस संबंध में एक रिपोर्ट प्रकाशित की थी और बताया था कि चिकित्सकों में इस बात को लेकर असंतोष है कि उनके लिए कोई कक्ष नहीं है और ना ही प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी के लिए कोई कक्ष है, जबकि स्वास्थ्य प्रबंधक के लिए कक्ष है। तब रात्रि में डियूटी लर रहे चिकित्सा पदाधिकारी डा. अनमोल कुमार ने इस मुद्दे पर असंतोष व्यक्त किया था। बैठक में प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र की स्वास्थ्य व्यवस्था पर विस्तार पूर्वक चर्चा की गई और स्वास्थ सेवाओं को सुदृढ़ बनाने पर बल दिया गया। प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी ने कहा कि आपस में समन्वय बनाकर कार्य करना है। स्वास्थ सेवाओं का लाभ सही तरीके से आम जनता को मिलना चाहिए। जो भी कमियां है, उसे दूर करनी है। मरीजों को नाश्ता खाना समय से मिलना चाहिए। मौके पर चिकित्सा पदाधिकारी डा. यतीन्द्र कुमार सिंह, डा. आलोक कुमार, डा. अनमोल कुमार, डा.अनिल कुमार, डा.ज्योति, स्वास्थ प्रबंधक आयुषी अश्विनी वर्मा उपस्थित रहे।

जनता के विरोध के कारण नहीं बिछा नल जल योजना का पाइप लाइन

 जागरण आपके द्वार : वार्ड संख्या आठ का हाल 



कोई बड़ी समस्या नहीं, सिर्फ दो जगह टूटी है हुई है सड़क 

कूड़ा दान रखने की जगह तय नहीं


दाउदनगर (औरंगाबाद) : वार्ड संख्या आठ में आमतौर पर कोई समस्या नहीं है। गली, नली व सड़कें बनी हुई हैं। स्ट्रीट लाइट लगे हुए हैं। लेकिन कुछ मोहल्ले ऐसे हैं जहां की सड़कें टूटी हुई हैं। कुछ स्ट्रीट लाइट ऐसे हैं जो खराब हैं। खराब स्ट्रीट लाइट को बनाने में काफी वक्त लगता है या नहीं बन पाता है। सफाई की कोई समस्या नहीं है। एक शिकायत यह भी है कि वार्ड पार्षद कम लोगों की सुनते हैं। वार्ड पार्षद हसीना खातून बताती हैं कि वार्ड में कोई समस्या नहीं है। लेकिन जरूरत यह है कि स्वास्थ्य केंद्र होता तो और बेहतर होता। मालूम हो कि वार्ड संख्या आठ के नजदीक में ही प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र है। इस वार्ड में नल जल योजना कहीं नहीं दिखती। वार्ड पार्षद हसीना खातून ने बताया कि जनता के विरोध के कारण यहां नल जल के पाइप नहीं बिछाए गए। जनता का कहना था कि जब तक सामग्री पूरी तरह नहीं आ जाएगा पीसीसी पथ काटने नहीं देंगे। क्योंकि प्रायः सड़क काट कर छोड़ दी जाती हैं और फिर नल जल योजना काम भी नहीं करता।



दो जगह टूटी हुई है सड़क 

पूर्व वार्ड पार्षद कुशा यादव ने बताया कि कोई समस्या नहीं है। अहिर टोली की सड़क वार्ड संख्या सात और आठ के बीच गुजरती है। विधायक निधि से यह सड़क बहुत पहले बनी थी। लेकिन महावीर स्थान और पन्नू यादव के घर के पास 100 - 100 फीट सड़क लगभग टूटी हुई है। इसको बनाया जाना चाहिए।



कूड़ा के लिए नप, कर्मी से अधिक नागरिक जिम्मेदार


डा.जाहिद हुसैन कहते हैं कि गली बनी हुई है, गुणवत्ता चाहे जैसी हो। लेकिन नाली के मामले में लीपापोती की गई है। इब्राहिम शहीद मोहल्ला में मजार के पास पुराने नाले पर ही नया नाला ढाल दिया गया। कीचड़ से मुक्ति मिली है लेकिन कूड़ा दान का स्थान मुकर्रर नहीं है। मोहल्ले में जहां कहीं भी कचरा है उसके लिए नगर परिषद या सफाई कर्मी से अधिक नागरिक जिम्मेदार हैं जो कूड़ा को नाली में या दरवाजे पर फेंक देते हैं।



सफाई और रौशनी की व्यवस्था दुरुस्त 


सेवानिवृत्त शिक्षक महेंद्र प्रसाद गुप्ता बताते हैं कि कोई समस्या नहीं है। नली गली का निर्माण हुआ है। रोशनी का प्रबंध किया गया है। वार्ड पार्षद की सक्रियता बनी रहती है। जनता की भी नहीं सुनते हैं। जनहित में सक्रिय हैं। सफाई ठीक रहती है।



किसी की नहीं सुनते वार्ड पार्षद 


नालबंद टोली निवासी प्रमोद कुमार कहते हैं कि वार्ड पार्षद किसी की सुनते नहीं। एक तो पार्षद महिला हैं, इस कारण उनसे भेंट करना मुश्किल है। अपनी बात रखने का कोई लाभ नहीं। क्योंकि कोई सुनवाई नहीं होती है। स्ट्रीट लाइट खराब है, लेकिन कहने का साहस नहीं कर पाता। क्योंकि वार्ड पार्षद सुनेंगे नहीं, ऐसा विश्वास है। सफाई कर्मी कम इस्तेमाल किए जाते हैं। कचरा लगा रहता है। जन वितरण प्रणाली का लाभ लेने से कई लोगों को जानबूझकर वंचित कर दिया गया।




10 वर्ष में पीसीसी नाली, गली, बिजली किया दुरुस्त 


वार्ड पार्षद हसीना खातून कहती हैं कि बीते 10 वर्ष में सभी नाली गली को पीसीसी बना दिया। विद्युत खंभे लगाए, बल्ब लगाए। 20 कालोनी स्वीकृत कराया। व्यक्तिगत शौचालय बनवाया। जनता के विरोध के कारण नल जल का पाइप लाइन नहीं बिछाया जा सका। जनता के सुख दुख में बराबर शरीक रहा।



अब तक के वार्ड पार्षद 

नगर पंचायत दाउदनगर के 2002 में कुशा यादव, 2007 में सोनी देवी और 2012 में हसीना खातून वार्ड पार्षद बने। वर्ष 2018 में जब नगर परिषद में नगर पंचायत उत्क्रमित हुआ तो पुनः हसीना खातून नगर परिषद की पहली बार पार्षद बनी।



 प्रमुख मोहल्ला -

नालबंद टोली, इब्राहिम शहीद, यादव टोली, गोस्वामी टोली, अंजान शहीद, मेस्तर टोली