यदुवंशी संवाद में लोगों ने उठाया मुद्दा
बड़े जलसा के साथ होगी प्रतिमा प्रतिस्थापित
नबिटा संवाददाता
दाउदनगर (औरंगाबाद) ।
भगवान प्रसाद शिवनाथ प्रसाद बीएड कॉलेज में सोमवार को आयोजित यदुवंशी संवाद कार्यक्रम में कई वक्ताओं ने पूर्व मंत्री रहे रामबिलास सिंह की प्रतिमा जिला मुख्यालय में लगाने की मांग की। कहा गया कि उनकी प्रतिमा ‘कारा में बंद’ कर रखा जाना दुर्भाग्यपूर्ण है। ऐसी मांगों पर विधायक डॉ. प्रकाशचंद्र ने आश्वस्त किया कि प्रतिमा पुनर्स्थापित की जाएगी। कार्यक्रम के दौरान पूर्व विधायक सत्यनारायण सिंह ने इस मुद्दे को उठाते हुए विधायक के इशारे पर कहा कि प्रतिमा स्थापित होगी। हम डॉ. प्रकाशचंद्र की ताकत जानते हैं। पीछे हम खड़ा हैं ही। पूर्व अध्यक्ष राजद ओबरा इंदल यादव व पूर्व जिप सदस्य संजय सिंह सोम ने जिला मुख्यालय में रामबिलास सिंह की प्रतिमा न लग सकने का मुद्दा उठाया। श्री सोम ने कहा कि बड़े जलसा के साथ उनकी प्रतिमा लगेगी। यह दुर्भाग्य है कि कारा मंत्री रहे रामबिलास बाबू की प्रतिमा कारा में बंद है। कहा गया कि सर्वाधिक संख्या में यादव समाज के जिला परिषद के सदस्य हैं, इसके बावजूद ऐसी स्थिति होना दुर्भाग्यपूर्ण है। इंदल या
दव ने बताया कि दिशा की बैठक समेत हर अवसर पर डॉ. प्रकाशचंद्र ने इस मुद्दे को उठाया। प्रतिमा स्थापित करना इनका लक्ष्य है। इस आयोजन के बाद स्व.रामबिलास सिंह की प्रतिमा लगने की उम्मीद जगी है।
क्या है प्रतिमा को ले विवाद
औरंगाबाद का दानी बिगहा पुराना बस स्टैंड सह-व्यावसायिक परिसर है। इसी के एक हिस्से में पहले से सत्येंद्र नारायण सिन्हा पार्क और उनकी प्रतिमा लगी है। 08 जनवरी 2023
को जिला परिषद की सामान्य बैठक में सर्वसम्मति से प्रस्ताव पारित हुआ था। 06 नवंबर 2024 को समर्थकों ने परिसर में बने फाउंडेशन पर रामबिलास बाबू की आदमकद प्रतिमा स्थापित कर दी। 0 8 नवंबर 2024 की रात तत्कालीन उप विकास आयुक्त अभ्येंद्र मोहन सिंह के आदेश पर प्रशासन ने प्रतिमा को हटाकर नगर थाना में रखवा दिया।
12 नवंबर 2024 को जिला पार्षदों और "विरासत बचाओ संघर्ष परिषद" ने प्रेस वार्ता कर 15 दिन में प्रतिमा यथास्थान लगाने का अल्टीमेटम दिया। लेकिन मामला लटका ही रह गया।
जानिए कौन थे रामविलास सिंह
स्व.राम बिलास सिंह 1967, 1972, 1977, 1985 और 1990 में विधायक बने। वह दाउदनगर हसपुरा और दाऊद नगर ओबरा विधानसभा क्षेत्र से विधायक रहे। तीन बार मंत्री बने। वे समाजवादी नेता रहे। उन्होंने इस संवाददाता से 11 अप्रैल 2009 को बातचीत में बताया था कि अपना पहला चुनाव मात्र 3000 रुपये में लड़े थे और 1990 के चुनाव में मात्र छः से सात हजार रुपये खर्च कर विधायक बने थे। उन्होंने कहा था कि सामाजिक एवं आर्थिक सुधार के बिना समाज नहीं बदल सकता।


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