Wednesday, 27 January 2016

सिलौटा बखौरा से दाउदनगर भाया सोन नद की यात्रा


---उपेन्द्र कश्यप---9931852301
सिलौटा बखौरा। जी हां! सतरहवीं सदी में औरंगजेब के शासन काल में बसाये गये दाउदनगर का पूर्व नाम। शहर का नाम महाभारत कालीन श्री कृष्ण के अग्रज बलदाउ से जोड कर “दाउनगर” बताने की कोशिश की जाती है, जिसका कोई प्रमाण नहीं है। तर्क दिया जाता है कि बलदाउ मगध नरेश जरासंध के पास इसी रास्ते से गये थे। क्या वास्तव में ऐसा कोई मार्ग था, जो सिलौटा बखौरा से गुजरता था? माना जाता है कि भगवान बुद्ध बोधगया से सारनाथ जाने के क्रम में मनौरा में विश्राम किये थे। उस मार्ग में गोह, मनौरा और अन्छा परगना के गांव पडे होंगें। कौन जानता है? मनौरा क्षेत्र में इसी कारण बुद्ध का महत्व दिखता है। सोन के पानी का रंगएक रास्ता बताता हैं- जो राजगृह से सीधे पश्चिम चलकर वर्तमान सोनपुर गांव (जिला-गया) होते हुए उत्तर पश्चिम काशी की ओर चला जाता है। राज प्दच्युत होकर कोशल नरेश प्रसेनजित मगध नरेश अजातशत्रु से सहायता मांगने इसी मार्ग से राजगृह आया था। अजातशत्रु बिंबिसार का पुत्र था जिसने अपने पिता के बाद 492 ईसा पूर्व से 462 ई.पू. तक मगध पर शासन किया था। सोनपुर के निकट ही गया से एक और मार्ग आकर मिलता था। यह सम्मिलित मार्ग सोन पार कर कारुष के जंगलों से होकर काशी को चला जाता था। बुद्धत्व प्राप्त करने के बाद गौतम इसी मार्ग से बोधगया से सारनाथ की ओर गये थे। जब मगध की राजधानी राजगृह से उठकर पाटलीपुत्र चली गई तब यह मार्ग बंद हुआ। ललित विस्तरसे अनुमान होता है कि पहली ईसा सदी तक यह मैदानी मार्ग लोगों की नजरों से पूरी तरह ओझल हो गया था। यानी दाउदनगर बनने के करीब साढे सोलह सौ साल पहले ही यह मार्ग बंद हो गया था। बाद में सतरहवीं सदी में जब फ्रांसीसी यात्री तावर्निये पश्चिमी काशी से रोहतास गढ के पास सोन पार कर पटना गया था तब वह सोन के किनारे किनारे दाउदनगर-अरवल होते हुए पटना पहुंचा था। यह इलाका (अंछा परगना) उस मार्ग में पडता था जिससे औरंगजेब कालीन भारत के पूर्वी इलाके (कोलकाता, मगध समेत बडा क्षेत्र) से राजस्व की वसूली कर दिल्ली दरबार को पहुंचाया जाता था। जब यह कहा जाता है कि अंछा पार जब गए भदोही तब जानो घर आये बटोहीतो यह स्पष्ट हो जाता है कि इस परगना के घनघोर जंगली क्षेत्र में राजस्व लूट लिया जाता था। तभी दाउद खां ने इस इलाके की किलाबन्दी की। हम जानते हैं कि सोनघाटी का विकासमान यातायात भी प्राकृतिक महत्व के कारण है, मानवीय महत्व के कारण नहीं। पाटलीपुत्रा (पटना) को छोडकर इस घाटी के प्राचीनतम ज्ञात नगर हैं धनपुर, सोहागपुर और बिलहरी। इनके बाद के मध्यकालीन नगर हैं- अगोरी, पलामू, रोहतासगढ, दाउदनगर तथा मनेर। इस कारण यह स्पष्ट है कि दाउदनगर मध्यकालीन (मुगलकालीन) नगर है। महत्वपूर्ण है कि सिलौटा बखोरा या दाउदनगर परगना अंछा का एक इलाका है। जमीन खरीद फरोख्त के दस्तावेजों में हाल तक हाल-मोकाम के बाद परगना अंछा ही लिखा जाता रहा है। अंछा, गोह और मनौरा तीन महत्वपूर्ण परगना मुगलकाल में थे। इन तीनों परगनाओं को औरंगजेब ने दाउद खां को पलामु फतह के बाद भेंट किया था। औरंगजेब ने सिपहसिलार दाउद खां को बिहार का नया सुबेदार नियुक्त किया था। उसने इलाका विस्तार का अभियान 1660 में प्रारंभ किया और जिला गया का कोठी, औरंगाबाद जिला का कुंडा, और देवगन राज को फतह कर पलामु भी फतह कर लिया था। इसके बाद ही दाउद खां ने सिलौटा बखौरा को आबाद किया और नगर बसाया। यहां 1662 में दाउद खां ने अपना किला बनाना प्रारंभ किया था जो 1672 में पूर्ण हो सका था।

दाउदनगर और उसके दक्षिण बारुण तक का इलाका घने जंगल से भरा हुआ था। 1766 में फ्रांसीसी अभियंता लुई फेलिक्स द ग्लास ने लिखा है कि इस इलाके में सर्वेक्षण करना नितांत असंभव है। अभेद्य वनाच्छादित प्रदेश है। न सडक है न पगडंडी ही। यानी यह इलाका तब भी दाउदनगर ही था घनघोर जंगल के बीच विकास के लिए संघर्ष करता हुआ एक कस्बा। जब बलदाउ (महाभारत काल) और बुद्ध (ढाई हजार साल पूर्व) थे तो यह इलाका था ही नहीं। ऐसे में बलदाउ से दाउग्राम होने की कोई संभावना बचती ही नहीं है। मगध के इस क्षेत्र में पिछले ढाई हजार सालों में मह्त्वपूर्ण भौगोलिक भूगर्भीय घटना रही है सोन भद्र नद के प्रवाह में परिवर्तन। विशेषज्ञ कहते हैं कि पुनपुन नदी जो  वर्तमान में फतुहा में गंगा में मिलती है वह नौबत पुर (पटना के दक्षिण-पश्चिम में) के आगे फतुहा में गंगा में मिलने तक बाल्मिकी कृत रामायणकालीन सोन के पाट का अनुसरण करती है। फल्गु जब गंगा के समानांतर बहना शुरु करती है तो धोवा नाम धारण करती है। सोन की धोवन होने की वजह से ही। सोन जो आज कोइलवर में गंगा में मिलता है उसका प्राचीन प्रवाह और पूरब दिशा से होता था और वर्तमान पटना शहर के बीच से होते हुए गंगा में मिलता था। पूरब में सोनउरा-सोनपुर-मोरहर-दरघा-धोवा-हरोहर से आगे पूरब को सोन कभी नहीं गया। इसी तरह वह पश्चिम में अपने वर्तमान पाट से कुछ पश्चिम तक जा कर रुक गया। बाणभटट की कादम्बरी की रचना सोन नद के किनारे स्थित प्रीतिकूट में की गयी थी। इसे स्वयं बाण ने अपना गृह बताया है। यह प्रीतिकूट कोई दूसरा नहीं बल्कि औरंगाबाद जिले के हसपुरा का पीरू गाँव ही है। ध्यान दें, हर्षवर्धन काल में सोन वर्तमान देवकुण्ड-रामपुर चाय होते हुए प्रवाहित होता था, जिसे दाउदनगर में बहकहा जाता है। हर्षवर्धन-वाणभट्ट काल (सातवीं सदी का पूर्वार्ध) में सोन का मार्ग हुआ करता था बह, जहां निरंतर पानी बहा करे। यहां इसे सोन का छाडन कहा जाता है। जे.डी.बेल्गर ने इसका उल्लेख किया है। उसके शब्दों में-अधिकारियों द्वारा प्राप्त सूचनाओं और अपने व्यक्तिगत अवलोकन निरुपण के आधार पर मेरा विचार है कि सुदूर अतीत में दाउदनगर के पास तराढ (तराड) गांव के निकट से सोन दक्षिण-पूरब को बहता था। देवकुंड या देवकुढ के टांड की बिल्कुल बगल से होता हुआ रामपुर चाइ और केयाल के सटे आगे बहता था। तराढ या तरार (आर तर या आर पर) का हिन्दुस्तानी में अर्थ होता है नदी की उंची कगार पर बसा हुआ। नाम से ही स्पष्ट है कि यह गांव पहले किसी नदी के उंचे तीर या तट पर बसा हुआ था। तराढ से बिल्कुल सटे और इसके तथा दाउदनगर के बीच में सोन नहर के लिए हाल की खुदाई से बिल्कुल साफ हो गया है कि यह इलाका पहले की किसी बडी नदी का पाट था। चाइ और केयाल में पानी के बडे-बडे गड्ढे आज भी मौजूद हैं-संभवत: वे प्राचीन सोन के अवशिष्ट हैं। देवकुंड में हर साल एक मेला लगता है। मैं समझता हूं कि केयाल से सोन उत्तर-पूरब को लगातार बहते उए सोनभदर गांव के पास पुनपुन का वर्तमान पाट धर लेता था।बेल्गर आगे लिखता है- यह स्पष्ट है कि सुदूर अतीत से बुद्ध के निर्वाणकाल तक मेरे इंगित किए हुए रास्ते से बहता हुआ सोन फतुहा के पास गंगा में मिल जाता था।बेल्गर के इस मत में भी संशोधन की गुंजाईश है। उन्नीसवीं सदी में पटना प्रमंडल का अभियंता रह चुका और सडकें बनवाने के सिलसिले में पटना- गया इलाकों के आभियांत्रिक लक्षणों का पूरा ज्ञान हासिल करने वाले एम.पी.बी.डुएल का मत है कि-सोन अरवल और दाउदनगर के बीच से अपना पाट छोडकर पटनावाली सडक पार करने के बाद मसौढी के उत्तर पुनपुन का पाट धर लेता था। वहां से उसका कुछ पानी फतुहा के निकट गंगा में मिल जाता था और कुछ पानी मैथवान (वर्तमान नाम-महतमैन) नदी से होकर मुंगेर की ओर बढा जाता था।कौल के मत को ध्यान रखते हुए डुएल के मत में इतना सुधार किया जा सकता है कि फतुहा के निकट का पानी गिरने (या, बेल्गर के मतानुसार, सोन-गंगा-संगम) की स्थिति बुद्धकालीन हो सकती है, बाल्मीकि कालीन नहीं। उनदिनों फतुहा के उत्तर का राघोपुर-दियारा टापू नहीं , मगध की तत्कालीन भूमि का एक खंड था। सोन के पाट परिवर्तन के इस विशद विवेचना से यह स्पष्ट हो जाता है कि महाभारत और बुद्ध काल में सिलौटा बखौरा के अस्तित्व में होने की धारणा उचित नहीं जान पडता है।

Tuesday, 5 January 2016

तीन साल बाद मिला व्यापार मंडल को अध्यक्ष

फोटो-व्यापार मंडल कार्यालय

इतिहास के आइने में

उपेन्द्र कश्यप
 सोमवार को करीब तीन साल बाद व्यापार मंडल को कार्यकारी अध्यक्ष मिल गया। गत 04 अक्टूबर 2012 को सुदेश सिंह की हत्या के बाद से यह पद रिक्त था। नया कार्यकारी अध्यक्ष दीपक सिंह बने हैं। इस अवसर पर इस संस्था का इतिहास जानना दिलचस्प होगा। मुखिया और पूर्व व्यापार मंडल अध्यक्ष भगवान सिंह ने बताया कि सन 1978 में तरारी पंचायत के मुखिया बने बेलाढी निवासी दिनेश कुमार सिंह 1983 और 1986 में अध्यक्ष चुने गये थे। इनकी पुत्र वधु निर्मला सिन्हा अभी तरारी से मुखिया हैं। इनके पुत्र नागेन्द्र कुमार 2007 में व्यापार मंडल अध्यक्ष पद के लिए चुनाव लडकर हार गये थे। सन 1989, 1992 और 1995 में लगातार तीन बार संसा के हीरालाल सिंह अध्यक्ष निर्वाचित हुए। वे अपने पंचायत संसा से मुखिया और बाजार समिति के अध्यक्ष भी रहे हैं। 1998 में गोरडीहां से मुखिया भगवान सिंह का मुकाबला सुदेश सिंह से हुआ। अध्यक्ष बन गये भगवान सिंह। सन 2001 में पुन: भगवान सिंह निर्विरोध चुन लिए गये। सन 2004 में कर्यकारिणी ने सुदेश सिंह को निर्विरोध अध्यक्ष चुन लिया। कोई चुनौती नहीं मिली। सन 2007 में नागेन्द्र सिंह और करमा पंचायत के मुखिया सुदेश सिंह के बीच मुकाबला हुआ। सुदेश सिंह जीत गये। इसके बद अंतिम चुनाव 2012 में हुआ तो सुदेश सिंह जीते। किंतु एक से डेढ माह के भीतर ही उनकी हत्या कर दी गयी। तब से यह पद रिक्त है।    

Wednesday, 30 December 2015

छुट्टियां न मनाने का अब मिला प्रतिफल

सास के कहने पर भी नहीं की वकालत
बच्चों को दिये समय का अब गर्व
फोटो-इशान के पिता प्रणव कुमार पांडेय और माता सुचित्रा सिंह
उपेन्द्र कश्यप, दाउदनगर (औरंगाबाद) इशान किशन यूं ही भारतीय अंडर 19 क्रिकेट टीम का कप्तान नहीं बना है। उसका क्रिकेट कैरियर बनाने के लिए अधिवक्ता मां सुचित्रा सिंह और पिता प्रणव कुमार पांडेय ने बहुत त्याग किया है। गोरडीहां पंचायत मुख्यालय में पैत्रिक घर में गौरवांवित दंपति ने बताया कि उन्होंने कभी गर्मी या सर्दी की छुट्टी नहीं बिताया। हर छुट्टी का इस्तेमाल इशान और राज किशन के लिए क्रिकेट प्रैक्टिस हेतू किया। जितना अधिक से अधिक अभ्यास कर सके, इसका अवसर बनाया। छुट्टी के दिन में अधिक समय और सहुलियत इसके लिए उपलब्ध हो जाता था। अब जब वह नामचीन और नेशनल सेलेब्रेटी बन गया है तो इस त्याग पर गर्व महसूस हो रहा है। मां बोलीं- “प्राउड फिल कर रही हूं। यह गौरव की बात है। बेटा बिहार, झारखंड ही नहीं देश का प्रतिनिधित्व करने जा रहा है। यह सब उपर वाले की मर्जी है।“ बताया कि वे खुद अधिवक्ता हैं। सास डा.सावित्री सिंह ने वकालत करने को कहा भी किंतु, बच्चों की देख-भाल के लिए यह नहीं किया। बताया कि जब इशान बच्चा था तब दादा राम अनुग्रह पांडेय कुरकुरे और पलास्टिक की गाडी देते थे। तब इशान इससे नहीं खेलता था। उसकी रुचि नहीं थी। तब दादा ने पलास्टिक का बैट बाल दिया तो खूब मन लगा कर खेलता। परदादा राजनंदन पांडेय के जिम्मे पढाना था। पिता ने बताया कि इशान की रुचि को देखते हुए वे उसके साथ मोइनुलहक स्टेडिम जाते थे। कभी दवाब पढने के लिए नहीं बनाया।  

Tuesday, 29 December 2015

अंतर्राष्ट्रीय दबाव में नहीं है इशान किशन

                   
बांगलादेश में खेलेगा वर्ल्ड कप
अंडर-19 क्रिकेट टीम का है कप्तान
उपेन्द्र कश्यप                                                फोटो- इशान अपने परदादा एवं अन्य के साथ
 पहली बार अंडर -19 वर्ल्ड कप भारतीय क्रिकेट टीम का कप्तान बनाये गये इशान किशन पर कोई दबाव नहीं है। मंगलवार को गोरडीहां स्थित उसके पैत्रिक घर पर यह जानने की किशिश की कि उस पर इस उपलब्धि का कितना दबाव है? बताया कि किसी तरह का दबाब नहीं है। अपने लडकों (साथी अन्य 14 खिलाडी) को मानसिक तौर पर मजबूत रखना है। जब अंतर्राष्ट्रीय मीडिया और दर्शक होंगे तब तो दबाव होगाया नहीं? यह पूछने पर कहा कि ऐसा कुछ नहीं है। हम तैयार हैं। मीडिया के हुजूम को लगातार इंगलिश में साक्षात्कार दे रहा हूं। कहा कि हमारी टीम एकजुट होकर खेलेगी और हम जीत कर आएंगे। बांग्लादेश में यह टूर्नामेंट 22 जनवरी से शुरू होना है। ईशान के नेतृत्व में भारतीय टीम 27 जनवरी को अपना पहला मैच आस्ट्रेलिया से खेलेगी। इससे पहले 17 जनवरी तक नेशनल क्रिकेट एकेडमी बंगलुरु में प्रशिक्षण शिविर में भाग लेगा। ईशान ने अपनी सफलता का श्रेय अपने माता-पिता को देते हुये कहा कि छुटटी के दिनों में हम दोनों भाईयों को लेकर पिता अभ्यास कराने पटना के मोईनुल हक स्टेडियम ले जाया करते थे। बीसीए, सीएबी, आरसीसी और सीएपी के तहत प्रशिक्षण मिला। इसके बाद 2011 में झारखंड से खेलने चले गये। बेहतर से बेहतर प्रदर्शन करने का संकल्प ले चुका इशान का लक्ष्य सीनीयर इंडियन टीम में शामिल होकर देश के लिए खेलना है।  

 मुखिया ने किया इशान को सम्मानित
फोटो-मुखिया भगवान सिंह एवं अन्य ने किया सम्मानित
घर पहुंचते जुटा ग्रामीणों का हुजूम
सुरक्षा को पुलिस बल हुआ तैनात
 इशान किशन जब मंगलवार को अपने पैत्रिक गांव गोरडीहां पहुंचे तो पुलिस सुरक्षा में तैनात दिखी। ग्रामीणों का हुजूम जुट पडा। गोरडीहां पंचायत के मुखिया मुखिया भगवान सिंह ने पंचायत की ओर से उसे सम्मानित किया। मौके पर उसे सिनियर होने के नाते नेट पैक्टिस कराने और फिटनेस सत्र दिलाने वाले प्रफ्फुलचन्द्र सिंह, मुखिया लव कुमार सिंह, पंचायत समिति सदस्य कौशल शर्मा, भीम शर्मा, राकेश शर्मा, राजेश पांडेय, पिता प्रणव पांडेय, माता सुचित्रा सिंह, दादा राम अनुग्रह पांडेय और परदादा राजनन्दन पांडेय, भाई राज किशन, अभिषेक कुमारम् समेत सैकडों ग्रामीण उपस्थित रहे। सबमें उसे एक झलक देख लेने की उत्सुकता दिखी। मुखिया भगवान सिंह ने कहा कि इशान के कारण गांव की पहचान अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर होगी। यह गौरव की बात है। गांव का भ्रमण किया। वह गांव में कई घरों में बुलावे पर और स्वयं भी गया। हर कोई उसके साथ अपना एक पल बिता लेने को बेताब था। बडे बुजूर्गों का आशीर्वाद प्राप्त किया। साथ में वह प्रफ्फुलचन्द्र सिंह से गुफ्तगूं करता रहा।

कैसे खेलेगा से बहुत दूर निकल गया इशान
      फोटो- इशान किशन प्रफ्फुलचन्द्र के साथ
शत्रुघ्न सिन्हा ने पूछा था- कैसे खेलेगा यह बच्चा?
 अंडर -19 वर्ल्ड कप भारतीय क्रिकेट टीम का कप्तान बनाये गये इशान किशन ने बहुत दूरी तय कर ली है, किंतु उसे अभी बहुत दूर जाना है। कभी बिहारी बाबु (शत्रुघ्न सिन्हा) ने उस पर शंका जाहिर करते हुए पूछा था- कैसे खेलेगा यह बच्चा? इनको सिनियर होने के नाते मोइनुलहक स्टेडियम में फिटनेस सत्र और नेट प्रैक्टिस कराने वाले प्रफ्फुल चन्द्र सिंह जब उससे मंगलवार को मिले तो पुरानी यादें ताजा हो गयीं। बताया कि 2004 में सुखदेव नारायण क्रिकेट टुर्नामेंट पटना में जन अपने सिनियरों के सामने मात्र 06 साल की उम्र में इशान उतरा तो श्री सिन्हा ने पूछा- कैसे खेलेगा यह बच्चा? तब उसे पैदा भी बान्धना नहीं आता था।प्रफ्फुल ने कहा कि अब हर कोई इसके साथ खेलना चाहेगा। कई सपने देखेंगे कि इनके साथ खेल लेते। यह सौभाग्य भी सबको नहीं उपलब्ध हो सकेगा। दोनों ने अपनी कई यादें साझा की। बताया कि आज जो नाम मोला है वह समर्पण और त्याग की वजह से मिला है। परिस्थिति बदल गयी है। इन्होंने इशान को उपहार भेंट किया। 

प्रदर्शन से खुलेगा भविष्य के कई दरवाजे
 इशान किशन के लिए भविष्य के कई दरवाजे बस खुलने वाले ही हैं। यह इस पर निर्भर करता है कि वह बांलादेश में अंडर-19 वर्ल्ड क्रिकेट टुर्नामेंट में कैसा प्रदर्शन करता है। यदि बतौर बैट्समैन एक दो अर्धशतक या बतौर कप्तान बेहतर प्रदर्शन करने में वह सफल रहा तो भारतीय क्रिकेट के एकदिवसीय और टेस्ट के लिए दरवाके पर वह दस्तक दे सकेगा। प्रफ्फुलचन्द्र सिंह ने बताया कि बांगलादेश के बाद नजदीक में इंडियन प्रिमियर लीग (आईपीएल) होने वाला है। इस नये सत्र के लिए कोई टीम उसे अपने लिए खेला सकती है। यह आने वाले कई साल तक नियमित रणजी खेल सकेगा। इसे बीसीसीआई हर रणजी मैच के लिए मोटी रकम देता है। इशान आश्वस्त है कि वह उंची छलांग लगा सकेगा। उस दिन का सबको इंतजार होगा। जब वह बांगलादेश में खेल रहा होगा तब भी इसकी हर गतिविधि पर औरंगाबाद के निवासियों की नजर होगी। हर कोई बस फिलहाल यही कामना कर रहा है कि वह बेहतर प्रदर्शन कर भारत लौटे।

तब जैसा होगा वह शमां?

 जब बांगला देश में वह भारत की ओर से भारतीय क्रिकेट अंडर 19 टीम का झंडा बतौर कप्तान लेकर चलेगा तो कैसा शमां होगा? जो होगा वह देखना आंखों को सुकून देगा। न सिर्फ भारत के लोग उस दृष्य का गवाह बनना चाहेंगे, बल्कि बिहार, औरंगाबाद और फिर दाउदनगर के लोग उस शमां को देखने से चुकना नहीं चाहेंगे। भारतीय राष्ट्रगान का वह यादगार पल दर्शनीय होगा। 

Wednesday, 23 December 2015

गोरडीहां का है अंडर 19 विश्वकप कप्तान इशान किशन

गोरडीहां के लाल ने पायी अंतर्राष्ट्रीय ख्याति

फोटो- किसान परदादा रामजनम पांडेय, मुखिया भगवान सिंह, ग्रामीण राकेश पांडेय और वह घर जिसमें जन्मा है इशान

गांव में रहते हैं दादा और परदादा
पैत्रिक गांव में हुआ था उसका जन्म
उपेन्द्र कश्यप, दाउदनगर (औरंगाबाद) बांगला देश में होने वाले अंडर 19 विश्व कप का कप्तान इशान किशन दाउदनगर प्रखंड के गोरडीहां पंचायत मुख्यालय का निवासी है। उसका जन्म यहां ही पैत्रिक घर में 1998 में हुआ था। बाद में वह पटना चला गया। उसके पिता प्रणव पांडेय पटना में दवा व्यवसाय में हैं। राजेन्द्र नगर में स्थायी तौर पर रहते हैं। बडा भाई रवि किशन डाक्टर बनने की दिश में अग्रसर हैं।  मां सुचित्रा सिंह गृहणी हैं। आज दादा रामउग्रह पांडेय (65) और परदादा राम जनम पांडेय (91 वर्ष) का मान बढ गया है। गांव में जश्न का भाव है। दादा और परदादा इस उम्र में इशान की उपलब्धि से खुद को गौरवांवित महसूस कर रहे हैं। अब भले ही उसे पटना और नवादा का बताया जा रहा है किंतु वास्तविकता यही है कि वह मूलत: गोरडीहां पंचायत का है। पिता ने बताया कि बैंगलूरु में रणजी खेल रहे इशान को जैसे ही वक्त मिलेगा वह गांव अवश्य आयेगा। वैसे वह हर साल एक बार गांव आते रहा है।

मुखिया करेंगें गांव आने पर सम्मानित
इशान की इस उपलब्धि पर गांव, पंचायत और जिला खुद को गौरवांवित समझ रहा है। ग्रामीण राकेश पांडेय ने कहा कि यह मान गांव का ही नहीं राज्य का भी है। जिस मिट्टी में उसने जन्म लिया उसे उसने अंतर्राष्ट्रीय ख्याति दिला कर जन्मभूमि का कर्ज उतारने की कोशिश की है। मुखिया भगवान सिंह ने कहा कि इससे सबका सम्मान बढा है। जब वह गांव आयेगा तो पंचायत अपने इस लाल को सम्मानित करेगा। उसके सम्मान से पंचायत का मान बढेगा। इन्होंने इशान समेत पूरे परिवार को बधाई दी।

डाक्टर दादी बस गयीं नवादा
इशान को पटना के बाद नवादा का भी बताया जा रह है। वास्त्व में उसके दादा राम उग्रह पांडेय की पत्नी और उसकी दादी डा.सावित्री सिंह नवादा में सिविल सर्जन के पद से सेवानिवृत हुई हैं। उन्होंने वहीं अपना घर बन लिया। वह वहीं रहती हैं। वहां अपना भव्य मकान है। दादा इलाहाबाद में कनीय अभियंता के पद से सेवानिवृत हुए थे। फिलहाल गांव में खेती कराते हैं। परदादा रामजनम पांडेय भी गांव में ही खेती कराते हैं।

मुख्यमंत्री ने दी बधाई


मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने इशान के पिता प्रणव पांडेय को फोन कर इस खुशी को साझा किया। उन्होंने परिवार को इस उपलब्धि के लिए बधाई दिया। इससे पिता का सीना गर्व से फुल गया। परिवार के सदस्य काफी उत्साहित हुए। अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद की स्थानीय इकाई ने भी बधाई दिया है। दाउदनगर कालेज अध्यक्ष आर्य अमर केशरी, नगर मंत्री रविशंकर कुमार, रोहित कुमार ने कहा कि इशान ने देश का नाम रौशन किया है।

दैनिक जागरण में 23.12.2015 को प्रकाशित खबर---



Sunday, 20 December 2015

मांत्रिक, तांत्रिक एवं यांत्रिक साधकों का स्थान मरही धाम


फोटो-दैनिक जागरण में प्रकाशित मेरी खबर
अनेकों ने किया है यहां सिद्धि की प्राप्ति
सती की कनिष्ठा अंगुली है यहां
उपेन्द्र कश्यप
 गोह का मरही धाम चर्चा में है। नकारात्मक कारणों से। यहां से चोर कथित तौर पर दो हजार साल प्राचीन बतायी जा रही मां सिंहवाहिनी और महर्षि भृगु की प्रतिमा ले गये। पुलिस उनकी तलाश कर रही है। इन दोनों प्रतिमाओं का अपना धार्मिक महत्व भी है। महर्षि भृगु को अग्नी का आविष्कारक बताया गय है। इस स्थान का महत्व मांत्रिक, तांत्रिक एवं यांत्रिक साधकों के लिए ही नहीं आम भक्तों के लिए भी है। पुराणों के अनुसार यहां मातारानी सती के बांया पैर की कनिष्ठा अंगुली यहां गिरी थी। इस शक्तिपीठ के भैरव विल्वकेश्वर महादेव भुरकुंडा गांव में स्थित हैं। देवी भागवत में दिये गये श्लोक से इसका पता चलता है-बिलारु विल्व पत्रिकां सिद्धपीठ प्रकाशिनीम, यदुवंश कुलेश्वरी नमामि सिंह वाहिनीम। भृगु भार्या स्वरुपिणी च्यवन जन्मदायिनी, पुलोमा देवी रुपिणी नमामि सिंह वाहिनीम॥ विल्वे के (बिलारु नाला में) विल्व पत्रिका (मां सिंह वाहिनी) नामक सिद्ध पीठ मरही धाम है। पं.लालमोहन शास्त्री ने बताया कि तंत्र ग्रंथों के अनुसार इसके दर्शन से तब पूर्ण फल प्राप्त होता है जब लिंग स्वरुप भैरव का दर्शन करते हैं। मरही में अनेक शैव, शाक्त, वैश्णव, सौर्य और गाणपत्य के मांत्रिक, तांत्रिक एवं यांत्रिक साधक आकर साधना कर सिद्धि प्राप्त कर चुके हैं। यहां पर महर्षि भृगु भी सपरिवार रहा करते थे। भृगु ने ही देवताओं का अध्ययन करने के लिए पुनपुन किनारे मन्दार (मदाड) के संगम पर भरारी में जाते थे।

अग्नीकोण पर स्थित है मरहीधाम
देवी भागवत पुराण के अनुसार 108 सिद्धपीठों में 20 वां पीठ गोह में भुरकुंडा पंचायत मुख्यालय से दक्षिण और गोह हमीदनगर मार्ग स्थित नीरपुर के अग्नी कोण में स्थित मरही धाम है। यहां एक जीर्ण-शीर्ण भवन में माता सिंहवाहिनी और महर्षि भृगु की प्रतिमा के साथ योगिनीमाता, धनलक्षमी, शिवलिंग की टूटी प्रतिमायें हैं। भवन के बाहर अन्यान्य प्रतिमायें भी बिखरे होने की बात कही जाती है। कहा जाता है कि यहां गुरुकुल विद्यापीठ था। आचार्य पंडित लालमोहन शास्त्री की देख रेख में यहं निर्माण कार्य प्रारंभ किया गया था। डा.श्याम बिहारी तिवारी ने तब पुजा-अर्चना की थी। इन्होंने बताया कि निर्माण कार्य होने के बाद यह स्थान आकर्षक होगा। फिलहाल ताजा घटना से समाज उद्वेलित है।

Monday, 14 December 2015

जीएसटी पर भाजपा का समर्थन करेगा राजद- लालु


लालु प्रसाद ने कहा- नीतीश के साथ हम भी
भाजपा और आरएसएस का मौडल खतरनाक
संवाद सहयोगी, दाउदनगर (औरंगाबाद) जीएसटी पर राजद ने भाजपा को साथ देने का ऐलान किया है। सोमवार को हिच्छन बिगहा में अपने समधी राव रणविजय सिंह की प्रतिमा का अनावरण करने आये राजद सुप्रिमो लालु प्रसाद ने इसकी घोषणा की। दैनिक जागरण के सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि अच्छे काम का समर्थन करते हैं। कहा कि नीतीश कुमार के साथ राजद भी जीएसटी के समर्थन में है। जिस जीएसटी पर कांग्रेस के विरोध के कारण संसद ठप है, उसी के साथ बिहार में सरकार चला रही राजद का साथ इस मुद्दे पर भाजपा को मिलने से गतिरोध समाप्त होने की उम्मीद जग गयी है। भाजपा नीत केन्द्र सरकार की जमकर आलोचना भी की। कहा कि भाजपा और आरएसएस का मौडल खतरनाक है। केन्द्र पिछडे राज्यों को पीछे ढकेल रही है। कहा कि इन्दिरा आवास और सामाजिक सुरक्षा पेंशन में कटौती कर दी गयी। कहा कि बिहार से लौटने के बाद मोदी सरकार गुस्से में है। योजना आयोग की जगह नीति आयोग का ऐसा गठन किया है जिसमें किसी राज्य का अभिभावक (मुख्यमंत्री) शामिल नहीं किया गया है। हर योजना में 50 फीसद की कटौती कर दी। पैकेज का झुठा ऐलान किया। देश पर कर्ज का बोझ पहले से है, अब बुलेट ट्रेन के नाम और कर्ज लादा जा रहा है। कहा कि रेल की आमदनी नहीं बढी, किराया बढा दिया। 30 हजार उद्योग धन्धा बन्द हो गया। 14 हजार लोगों ने एनआरआई बनने के लिए आवेदन दिया है। कहा कि आन्दोलन करेंगे और फिर मीडिया को बतायेंगे।  

पटरी पर रेल चलेगा कि खाट बिछेगा?
                     प्रतिमा पर माल्यार्पण करती डा.उषा एवं रोहिणी आचार्या
जनता से किया हर वादा पूरा करेगी सरकार
आर्थिक बोझ के बावजूद होगी शराबबंदी
संवाद सहयोगी, दाउदनगर (औरंगाबाद) दिल्ली के शकुर बस्ती में रेलवे द्वारा उजाडी गयी बस्ती पर राजद सुप्रिमो लालु प्रसाद यादव ने जो कहा उसकी उम्मीद मौजूद पत्रकारों को नहीं थी। कहा कि पटरी रेल चलने के लिए है कि खाट बिछा कर सोने के लिए? पूछा- कभी देखे हो? हां, दिल्ली सरकार हटाये गये गरीबों के लिए बेहतर व्यवस्था करे। मालुम हो कि इस मुद्दे पर राजनीति गरमाई हुई है। उन्होंने हिच्छन बिगहा में अपने समधी राव रणविजय सिंह की प्रतिमा का सोमवार को अनावरण किया। इस अवसर पर डा.उषा सिन्हा, रोहिणी आचार्या, समरेश सिंह, अनिमेष सिंह, समिधा, विधायक बीरेन्द्र कुमार सिन्हा एवं रवीन्द्र सिंह, राजद प्रदेश महासचिव डा.प्रकाशचन्दा, बारुण व्यापार मंडल अध्यक्ष मिथलेश कुमार, संजय सोम, चिंटु मिश्रा, मुकेश मिश्रा, जिलाध्यक्ष कौलेश्वर यादव, प्रखंड अध्यक्ष देवेन्द्र सिंह, सुबोध कुमार सिंह, मुखिया सोनम कुमारी उपस्थित रहे। सभी ने प्रतिमा पर माल्यार्पण किया। बिहार के सन्दर्भ में कहा कि नीतीश कुमार ने जो कमिटमेंट जनता के साथ किया था उसे उनके नेतृत्व में बिहार में महागठबन्धन सरकार पूरा करने में जुटी हुई है। कहा कि महिलाओं में शराब को लेकर आक्रोश था। गरीब परिवार को नुकसान हो रहा था। आर्थिक क्षति के बावजूद भी सरकार राज्य में शराबबंदी लागू करेगी। एक अप्रैल से बिहार में यह नयी शुरुआत है। पांच से सात हजार करोड की क्षति होगी, इसके बावजूद शराबबन्दी होगी ताकि गरीबों को इसका लाभ मिल सके। कहा कि हर मंत्री अपने विभागों की समीक्षा करेगा।     

बिना गुब्बार गुजर रहा कारवां
नयी सडक पर पानी का छिडकाव
दाउदनगर (औरंगाबाद) बिहार विधान सभा चुनाव और राव रणविजय सिंह के निधन के बाद जब पहली बार राजद सुप्रिमो हिच्छन बिगहा पहुंचे तो सत्ता की सोंधी खुशबू भी महसूस हुई। सडकें नयी बनी हुई दिखी। उसका मरम्मत नया था। उस पर पानी का छिडकाव ताकि कारवां गुजरे तो गुब्बार न उडे। लोग पैदल हों या वाहनों का काफिला। पानी के छिडकाव के कारण अरवल-औरंगाबाद के इस सीमावर्ती गांव में चलना खुशगवार रहा। डा.प्रकाशचन्द्रा ने बताया कि एनएच-98 से लेकर हिच्छन बिगहा तक की करीब पांच किलोमीटर की सडक को रातों रात विधायक रवीन्द्र सिंह ने बनवाया, ताकि यात्रा सुगम हो सके। कहा कि अरवल विधायक इसी गांव के हैं सो ग्रामीणों को यह उम्मीद है कि मरम्मत की गयी इस सडक का पक्कीकरण शीघ्र हो जायेगा।

सुरक्षा का पुख्ता इंतजाम
दाउदनगर (औरंगाबाद) लालु प्रसाद यादव के हिच्छन बिगहा आगमन को ले कर प्रशासनिक तैयारी जबरदस्त दिखी। एसडीओ राकेश कुमार, डीएसपी संजय कुमार, इंस्पेक्टर विन्ध्याचल प्रसाद, थानाध्यक्ष पंकज कुमार, एसआई शहुद अख्तर, शंभु कुमार, बीएस मोची समेत दाउदनगर थाना और अरवल जिला के पुलिस अधिकारी दिखे। लाठी लिए जवान एनएच-98 से लेकर गांव तक तैनात देखे गये। अग्नीशमन दस्ता भी दिखा। राव रणविजय सिंह के घर में लालु प्रसाद के आगमन से पूर्व किसी के प्रवेश की अनुमति नहीं थी। मौके पर एक संवाददाता को भी रोका गया तो एसडीओ ने वहीं पास बना कर दिया।