Tuesday, 4 August 2026

अंतिम सोमवार भादव में, 17 अगस्त तक मांगलिक कार्य शुभ

 


सावन मास 2026 के महत्व पर विशेष

18 अगस्त से सावनपुरिया भेजना व शुभ कार्य नहीं

नबिटा संवाददाता

दाउदनगर (औरंगाबाद) ।

30 जुलाई गुरुवार से प्रारंभ सावन का महीना 20 अगस्त दिन शुक्रवार तक रहेगा। सूर्य कर्क संक्रांति 27 जुलाई से 17 अगस्त तक मांगलिक कार्यो के लिए सावन मान्य है। सावन मास के शुरू गुरुवार से होने से भगवान् शंकर अपनी पत्नी पार्वती के साथ रहेंगें। इस दिन पूजा उपासना रुद्राभिषेक करने से भक्तों की अभीष्ट कामनाऐं पूर्ण होगी। कृष्ण पक्ष चौदह दिनों का और शुक्ल पक्ष सोलह दिनों का होगा। आचार्य पं. लाल मोहन शास्त्री बताते हैं कि इस सावन मास में चार सोमवार पड़ेगा। मगध की परम्परा है कि एक या तीन ही सोमवार करना चाहिये। इस वर्ष अन्तिम सोमवार सौर्य मास सावन सौर्य भादव महीना में पड़ेगा। अतः कृष्ण पक्ष का दो और शुक्ल पक्ष का एक सोमवार व्रत करना चाहिये। सावन मास के प्रथम सोमवार से कार्तिक मास के अन्तिम सोमवार तक क्रमश: सोलह सोमवार का व्रत करना महत्वपूर्ण है। यह अधिक फल दायक माना जाता है। श्री शास्त्री सावन मास देवताओं के गुरु वृहस्पतिवार से प्रारम्भ और राक्षस दैत्य गुरु शुक्राचार्य के दिन शुक्रवार को समाप्त हो रहा है। अतः इस महीना में साधना उपासना करने देव दानव दोनों प्रसन्न होंगे।


किस सोमवार को रुद्राभिषेक का क्या लाभ


प्रथम सोमवार दिन भगवान शंकर वसहा बैल पर रहेंगे। इस दिन रुद्राभिषेक करने से अभीष्ट की सिद्धि मिलेगी। दूसरा सोमवार को प्रातः 05.55 बजे के बाद बसहा बैल से उतर कर भोजन करने बैठ जायेंगे। इस दिन भगवान् को नाना प्रकार का भोग, भांग, धतूरा, विल्व फल समर्पित करना चाहिये। जिससे घर अन्न धन की वृद्धि और स्वस्थता की प्राप्ति होगी। तीसरा सोमवार के दिन अपने परिवार तथा कुटुम्ब के साथ कैलाश पर रहेंगे। इसदिन रुद्राभिषेक करने से लोगों से मित्रता बढ़ेगी। शत्रु भी मित्र हो जायेंगे। चतुर्थ सोमवार को भी शिव जी कैलाश में रहेंगे।


भगवान शंकर को समर्पित यह मास


आचार्य पं. लाल मोहन शास्त्री ने बताया कि सावन मास शुरू होते ही भारत वर्ष के प्रत्येक शहर गांव में भगवान शंकर के मन्दिर को सजाया जाता है। भक्तों की भीड़ होती है। यह महीना पूर्ण रूप से भगवान् शंकर को समर्पित है। सभी भारतीय अपने भोले बाबा को मनाने के लिये गंगा जल, अक्षत, फुल, विल्वपत्र, धतूरा, मन्दार से बाबा की पूजा करते हैं। महत्वपूर्ण महामन्त्र "बोल बम" की उदघोषण करते रहते हैं। केसरिया भगवा रंग का वस्त्र धारण कर कांवर के जल को भगवान शिव लिंग पर चढ़ाते हैं।


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