■ टेढ़ी पॉलिटिक्स :- राहुल गांधी के नाम में अगर गांधी ना हो, और पृष्ठभूमि में पिता, दादी और नाना का नाम ना हो तो ऐसे देश में 543 सांसद होते हैं, और किसी सांसद की इतनी औकात नहीं है कि वह देश में किसी मुख्यमंत्री को कॉलर पड़कर पीछे खींच दे या हटा दे। यह घमंड आता कहां से है? ■
(वरिष्ठ लेखक व पत्रकार)
देश में मुख्य चुनाव आयुक्त को लेकर राहुल गांधी और कांग्रेस के दिग्गज नेता बड़ी आक्रामक भाषा में बात कर रहे हैं। वे सड़क पर हों, अपने कार्यालय में हो या प्रेस कॉन्फ्रेंस में हों, इनकी देह की ऐंठन, बोलचाल की भाषा और सार्वजनिक स्थलों पर किए जाने वाले व्यवहार यह बताते हैं कि जब तक इसमें सकारात्मक परिवर्तन नहीं लाएंगे, सत्ता पाना तो दूर सत्ता के करीब भी न पहुंच सकेंगे। एक वीडियो सामने आया है, जब प्रदर्शन के दौरान मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार को पीछे से कॉलर पकड़ कर राहुल गांधी खींच रहे हैं या हटा रहे हैं। इस व्यवहार को क्या कहा जाए। राहुल गांधी के नाम में अगर गांधी ना हो, और पृष्ठभूमि में पिता, दादी और नाना का नाम ना हो तो ऐसे देश में 543 सांसद होते हैं, और किसी सांसद की इतनी औकात नहीं है कि वह देश में किसी मुख्यमंत्री को कॉलर पड़कर पीछे खींच दे या हटा दे। यह घमंड आता कहां से है? सिर्फ इसलिए कि पृष्ठभूमि में बड़े नाम हैं। अन्यथा देश के लिए किए गए योगदान व कर्म से तो ऐसा नहीं होता। इसके पहले जाइए तो जिस पैकेट से बिस्किट निकाल कर अपने कुत्ते पीडी को खिलाते हैं, उसी पैकेट से बिस्किट समर्थक को खिलाते हैं। ऐसी ही घटना होने का दावा असम के मुख्यमंत्री हेमंता विश्व शर्मा भी करते हैं कि वह जब असम की चर्चा करने उनके पास बैठे थे तो वह पीडी को बिस्किट खिला रहे थे। इससे आगे यह भी कि जिस प्लेट का बिस्किट पीडी खा रहा था, वही प्लेट हेमंता समेत अन्य नेताओं के सामने घुमाए गए, बिस्किट उठाकर खाने के लिए। तुम तड़ाक और सजा देंगे वाली अहंकारी भाषा राहुल को लगातार डूबो रही है और वह घमंड के आभामंडल में फंसे हुए हैं। बमुश्किल पांच साल बाद वृद्धापेंशन लेने के पात्र बन जाने वाले राहुल गांधी को खींच खींच कर युवा तुर्क बताया जा रहा है। वृद्ध नेताओं से जमींदारी ठाठ की तरह व्यवहार कर रहे है। प्रेस कॉन्फ्रेंस हो या आंदोलन या धरना स्थल, राहुल गांधी और उनके कुछ तथा कथित दिग्गज या चाटुकार नेताओं की शैली देख लें, उनके व्यवहार से घमंडी राजा होने की बू आती है। उनकी दैहिक भाषा हो या बोलचाल की शैली, मुंह से मिठास नहीं बल्कि अहंकार का तीखा मिर्च टपकता है। ऐसे में वह आम जनता से भला आत्मीय लगाव कैसे बढ़ा सकते हैं। जिस व्यक्ति की विशेषता ही पारिवारिक पृष्ठभूमि हो वह जन नेता नहीं बन सकता। जन नेता बनने के लिए जनता के मूड को समझना पड़ता है। जनता से लगाव बढाने का कार्य करना पड़ता है। झूठे नैरेटिव सेट करके आप चुनाव नहीं जीत सकते।
राजीव कुमार के मुख्य चुनाव आयुक्त बनने के पहले आप 90 से अधिक चुनाव हार चुके हैं ,और चुनाव हारने का दोष राजीव कुमार और उनके द्वारा कराए जा रहे एसाईआर पर मढ़ रहे हैं, जबकि आपके कद्दावर नेता केरल में जीत के लिए एसआईआर को ही श्रेय दे रहे हैं। जहां जीते तो वहां सबसे पहले राहुल गांधी एंड फैमली के कर्मों को, कॉंग्रेस की नीतियों को, सरकार के कार्यों से जनता के नाराजगी को श्रेय देते हैं, और जब हारे तो एसआईआर, ईडी, सीबीआई को दोष। हद है यह सब। एक तरफ आप मामूली घटना को भी लेकर सड़क पर उतर जाते हैं और दूसरी तरफ आपका एक सांसद जिसे आंतरिक जांच के बाद जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय बर्खास्त करता है तो आप चुप्पी साध लेते हो। एक तरफ छात्रों के मुद्दे को लेकर दिल्ली में अराजकता फैलाने की हद तक किसी जिद्दी व नासमझ बच्चे की तरह मांग बदलते रहते हुए तानाशाह की तरह सजा देने का ऐलान करते हैं, दूसरी तरह झारखंड, पंजाब के मामले पर चुप्पी साथ लेते हो। ऐसे दोहरापन लाने वाले नेता को जनता गले लगाने से रही।
इसलिए सबसे पहले तो सही मुद्दों को उठाइए। महिला आरक्षण बिल का विरोध भी नहीं करते, खुलकर समर्थन भी नहीं करते। जिस तरह से समाजवादी नेता शरद यादव ने बिल फाड़ दिया था यह कहते हुए कि महिला आरक्षण का मतलब परकटी महिलाओं को सदन में लाना होगा, इसलिए महिला आरक्षण में पहले जाति आधारित आरक्षण की व्यवस्था लागू की जाए, उस तरह का लाइन भी नहीं लेते। पत्रकार, प्रोफेसर, जज सबसे जाति पूछते हो और जाति की राजनीति करते हुए आक्रामकता दिखाते हो, लेकिन जब देने की बारी आती है तो अपनी घोषित नीति से उलट काम करते हो। दुविधा में पड़े एक नेता को जनता प्रधानमंत्री बनाने से तो रही। इसलिए अगर सत्ता पाना चाहते हैं राहुल गांधी तो सही मुद्दों को उठाना होगा। अनर्गल प्रलाप करना त्यागना होगा। अपनी देह की ऐंठन खत्म करनी होगी। बोलचाल की शैली में मधुरता लानी होगी। अन्यथा यह भारत है जिसके डीएनए में सेकुलरिज्म और लोकतंत्र की समझ है। ये भारतीय आपके बहकावे में नहीं आने वाले। यह तय जानिए।
(यह लेखक के निजी विचार हैं)
15 अक्टूबर 2026
सत्ता के लिए छोड़नी होगी ऐंठन और घमंडी राजा वाली शैली:टेढ़ी पॉलिटिक्स https://mediamartindia.in/to-gain-power-one-will-have-to-give-up-the-arrogance-and-the-style-of-an-arrogant-king-crooked-politics/ You may follow me on Fb – https://www.facebook.com/profile.php?id=61560490060207 X- https://x.com/withumashankar LinkedIn- https://www.linkedin.com/in/umashankar-singh-65870b2a/%e0%a4%9c%e0%a4%a8%e0%a4%a4%e0%a4%be-%e0%a4%95%e0%a4%be/
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