Saturday, 6 May 2023

चार व्यक्तियों के आवेदन पर बना था कस्बा से नगरपालिका

 


कस्बा से ऐसे नगरपालिका बना दाउदनगर

अक्टूबर 1884 में हुआ था प्रारुप का प्रकाशन


उपेंद्र कश्यप, दाउदनगर (औरंगाबाद) : 

औरंगजेब के सिपहसालार दाऊद खान ने 17 वीं सदी के उत्तरार्ध में दाउदनगर को बसाया था। यहां किला का निर्माण कराया था। विभिन्न जातियों को बसाया था। कहते हैं कि शहर इस तरह बसाया कि यहां शांति और सौहार्द बना रहे। लेकिन समय करवट बदलता है और एक दौर ऐसा आता है जब यहां की आबादी को कई प्रकार की मुसीबत का सामना करना पड़ता है। लोगों की बेचैनी बढ़ती है और इससे बचने के लिए वे दाउदनगर को शहर का दर्जा दिलाने का प्रयास प्रारंभ करते हैं। नगर पालिका में प्रधान सहायक के पद से सेवानिवृत्त हुए देव भूषण लाल दास (अब स्वर्गीय) ने 2014 में इस संवाददाता को बताया था कि वे कौन चार व्यक्ति थे जिन्होंने नगर पालिका बनाने के लिए तब राज्यपाल से मुलाकात की थी। आवेदन दिया था। उन्हीं की कोशिश रंग लाई थी और 10 फरवरी 1885 को दाउदनगर नगरपालिका बन गया। इससे पहले यह कस्बाई इलाका था। जब नगर परिषद का चुनाव हो रहा है तो यह जानना महत्वपूर्ण है कि आखिर नगर पालिका बनाने का प्रयास किन लोगों ने किया था। चावल बाजार के कसौन्धन बनिया जाति के पुरुषोत्तम दास, बजाजा रोड के कसौन्धन बनिया रामचरण साव, केशरी जाति के हुसैनी साव एवं अग्रवाल जाति के बाबु जवाहिर मल ने तब एक आवेदन ब्रिटिश सरकार में भाया कलक्टर गवर्नर  को दिया और दरख्वास्त की थी। कहते हैं तब दाऊद खां के वंशज डोमन खां के कथित अत्याचार से मुक्ति का रास्ता निकालने का आग्रह किया गया था। इसके बाद अक्टूबर 1884 में प्रारुप का प्रकाशन हुआ। यानी एक खाका तैयार हुआ कि शहर का क्षेत्रफल क्या है, उसकी चौहद्दी क्या है, कितनी आबादी है, सुविधाएं कौन कौन सी है? दावा आपत्ति की मांग हुई। कानूनी प्रक्रिया पूरी की गई। फिर 10 फरवरी 1885 को कस्बा से यह नगर बन गया। इससे संबंधित इतिहास -श्रमण संस्कृति का वाहक-दाउदनगर में संग्रहित है। इसके अलावा कहीं कोई इतिहास लिखित उपलब्ध नहीं है।



अमियावर से आये थे रामचरण साव के वंशज

रामचरण साव के पूर्वज रोहतास जिला के नासरीगंज थाना के अमियावर गांव से आए थे। बजाजा रोड में उनकी किराने की दुकन थी। तूती बोलती थी। ग्रामीण इलाके में दूर दूर तक लोग नाम जानते थे। चलती इतनी थी कि 52 जोडी दरवाजे के मकान के बावजूद परिवार को सोने की जगह नसीब नहीं थी। इतना किराना सामान भरा हुआ रहता था। शहर के लिए अल्पसंख्यक थे मगर दबदबा था। रामचरण साव के पिता ने अमियावर की अपनी सारी संपत्ति ब्राह्मणों को दान कर दिया था। इनकी चौथी पीढि शहर में रहती है। बजाजा रोड में मकान है और गुड बाजार में दुकान। 



लंगोट पहनते थे, दाढ़ी रखतव थे पुरुषोत्तम दास

पुरुषोत्तम दास संपन्न व्यक्ति थे। उनके पास खेतिहर जमीनें काफी थीं। आवासीय जमीन भी प्रयाप्त थी। मुख्य पथ में वर्तमान में जहां भारतीय स्टेट बैंक की शाखा है, उसी के सामने उनका मकान हुआ करता था। साधु प्रवृति के थे सो लंगोट पहनते थे। दाढी रखते थे। सादा जीवन उच्च विचार की जीवन शैली थी। जमीन की खरीद बिक्री भी किया करते थे। उनका कोई वंशज अब शहर में नहीं रहता।



जड़ी बूटी बेचा करते थे हुसैनी साव


केशरी जाति के हुसैनी साव का बजाजा रोड में किराना दुकान था। इनके पिता का नाम तुलसी साव था। इसी दुकान में वे जडी बुटी भी बेचा करते थे। माथे पर मुरेठा बांधना कभी नहीं भुलते थे। एकदम सादा ड्रेस धोती-कुर्ता पहनते थे। काडा ईस्टेट के खजांची थे। हुंडी का काम करते थे। यानी रुपए पैसे रखना-देना। उन्हीं के नाम पर वार्ड संख्या पांच में हुसैनी बाजार है। इनके वंशज के व्यवसाय आज भी शहर में है। श्री बाबू की जडी बुटी दुकान में ही वे अपना व्यवसाय करते थे। उनकी चौथी पीढ़ी भी जडी बुटी के करोबार में यहां सक्रिय है। उन्होंने ही बाजार लगाना शुरु किया था और मुहल्ला भी बसाया था। जिसे कालांतर में हुसैनी बाजार और हुसैनी मुहल्ला का नाम मिला। 



अज्ञात हैं जवाहिर मल 

जवाहिर मल के बारे में बहुत जानकारी प्राप्त नहीं है। शायद वह गया के निवासी थे। साहित्य में बतौर लेखक उनकी चर्चा आती है। दाउदनगर नगरपालिका के प्रथम वाइस चेयरमैन थे। इसके अलावा उनके बारे में कोई जानकारी प्राप्त नहीं है।





Friday, 5 May 2023

मुख्य व उप मुख्य पार्षद अभ्यर्थी 540000 तक कर सकते हैं खर्च

 


हर वार्ड पार्षद अभ्यर्थी के लिए खर्च की सीमा 40 हजार


मुख्य व उप मुख्य पार्षद के लिए होंगे नप क्षेत्र के प्रस्तावक व समर्थक किसी भी चुनाव के लिए न्यूनतम 21 वर्ष की उम्र आवश्यक 

संवाद सहयोगी, दाउदनगर (औरंगाबाद) : कोई भी व्यक्ति जिसकी उम्र 21 वर्ष हो गई है वह मुख्य, उप मुख्य व पार्षद का चुनाव लड़ सकता है। मुख्य पार्षद एवं उप मुख्य पार्षद अभ्यर्थी के लिए प्रस्तावक एवं समर्थक का दाउदनगर नगर परिषद क्षेत्र का मतदाता होना आवश्यक है। जबकि पार्षद का प्रस्तावक और समर्थक संबंधित वार्ड का मतदाता होना चाहिए। मुख्य पार्षद और उप मुख्य पार्षद कोई भी वह व्यक्ति चुनाव लड़ सकता है जो नगर परिषद से संबंधित मतदाता सूची में शामिल है। जबकि पार्षद अभ्यर्थी का नगर परिषद के वार्ड के निर्वाचक सूची में शामिल होना आवश्यक है। अनारक्षित कोटि के पार्षद प्रत्याशियों के लिए 1000 रुपये, मुख्य व उप मुख्य पार्षद अभ्यर्थी के लिए 2000 रुपये नामनिर्देशन शुल्क तय किया गया है। जबकि आरक्षित वर्ग यथा अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, पिछड़ा वर्ग एवं महिला के लिए यह राशि आधी कर दी गई है। पार्षद अभ्यर्थी के लिए अधिकतम खर्च की सीमा राशि 40000 रुपये तय की गई है। जबकि उप मुख्य पार्षद और मुख्य पार्षद अभ्यर्थी के लिए पांच लाख 40 हजार रुपये खर्च करने की अनुमति है। मुख्य पार्षद और उप मुख्य पार्षद दोनों का पद अनारक्षित महिला के लिए तय है। नगर परिषद चुनाव सभी 27 वार्ड में होगा। इसके लिए कुल 53 मतदान केंद्र बनाए गए हैं। जबकि 39038 मतदाता अपने मताधिकार का इस्तेमाल नकर सकते हैं।



नप क्षेत्र से हटवाए गए बैनर व पोस्टर

दाउदनगर (औरंगाबाद) : नगर परिषद चुनाव के लिए गुरुवार से लागू आचार संहिता के बाद शुक्रवार की शाम प्रशासन द्वारा बैनर पोस्टर हटाने की कार्रवाई की गई। सीओ मनोज कुमार गुप्ता, बीडीओ योगेंद्र पासवान एवं एएसआई अर्जुन राम के नेतृत्व में कार्रवाई की गई। पुराना शहर, गुलाम सेठ चौक, जोड़ा मंदिर रोड, कसेरा टोली रोड, पटवा टोली रोड,दाउदनगर बाजार समेत अन्य इलाकों में अभियान चलाया गया। इस दौरान कई स्थानों पर लगे बैनर व पोस्टर को हटवाया गया। बताया गया कि एसडीओ मनोज कुमार ने आदर्श आचार संहिता का पालन सुनिश्चित कराने के लिए टीम का गठन किया है। बीडीओ, सीओ को यह सुनिश्चित करने का निर्देश दिया गया है कि कहीं भी बैनर पोस्टर नहीं लगा होना चाहिए।


138 में 69 वर्ष चुनाव नहीं हुए, दूसरी बार हो रहा नगर परिषद का चुनाव



पदेन अध्यक्ष होते थे तब एसडीओ

जनता से पहला चेयरमैन 1938 में जम्होर के सूर्य नारायण सिंह प्रथम चेयरमैन

1986 के बाद 2001 तक चुनाव नहीं 

उपेंद्र कश्यप । दाउदनगर (औरंगाबाद)


जब 1885 में नगर पालिका का गठन हुआ था तो मुख्य पार्षद या उप मुख्य पार्षद के लिए चुनाव की प्रक्रिया यहां शुरू नहीं हुई थी। तब पदेन एसडीओ यहां के चेयरमैन होते थे और जनता से वाइस चेयरमैन का मनोनयन होता था। तब दाउदनगर न प्रखण्ड था, न अनुमंडल ही था। यह गया जिला का हिस्सा होता था। अनुमंडल तो वर्ष 1991 में बना था। यहां जनता से पहला चेयरमैन 1938 में सूर्य नारायण सिंह मनोनीत किए गए। तब वार्ड पार्षदों का चुनाव जनता बैलेट के जरिए नहीं, बल्कि हाथ उठाकर करती थी। वार्ड के 20 से 25 माननीय लोग वार्ड पार्षद का चयन कर लेते थे। इसके बाद 1986 के बाद 2001 तक चुनाव नहीं हुआ। 2002 से नियमित चुनाव की प्रक्रिया शुरू हुई। इसके बाद 2017 में भी चुनाव नहीं हुआ जब नगर पंचायत को नगर परिषद में प्रोन्नत किया गया। फिर 2018 में बतौर नगर परिषद का चुनाव हुआ था। अब चुनावी गतिविधियां चरम की ओर बढ़ती जा रही है। बतौर नगर परिषद दूसरी बार चुनाव होना है, लेकिन सीधे मुख्य व उप मुख्य पार्षद को पहली बार मतदाता चुनेंगे।



138 वर्ष पूर्व बना था नगरपालिका, अब है नगर परिषद 


दाउदनगर नगर परिषद इसी वर्ष 138 वर्ष का हो गया। इस लंबी यात्रा में काफी कुछ बदलाव आया है। कई रोचक इतिहास भी नगर परिषद ने बनाया है। जब वर्ष 1885 में नगर पालिका का गठन हुआ था उसके पहले भी दाउदनगर मगध और शाहाबाद क्षेत्र में चट्टी के रूप में मशहूर था। कहावत है-शहर में सासाराम और चट्टी में दाउदनगर। यह व्यापारिक केंद्र था। तब और अब में काफी कुछ महत्वपूर्ण बदलाव हुआ है। वर्ष 2002 में जब दूसरी बार बिहार में नगर निकाय चुनाव प्रारंभ हुआ तो दाउदनगर नगर पंचायत बना और फिर वर्ष 2018 में नगर परिषद। 


Thursday, 4 May 2023

आरओ नगर परिषद सह एसडीओ के समक्ष होगा मुख्य पार्षद व उप मुख्य पार्षद का नामांकन

अनुमंडल कार्यालय में होगा नौ मई से नामांकन 



 

सहायक निर्वाची पदाधिकारियों के पास नामांकन करेंगे वार्ड पार्षद के अभ्यर्थी

दाउदनगर (औरंगाबाद) : नगर परिषद चुनाव के लिए अधिसूचना जारी कर दी गई है। इसके साथ ही संबंधित प्रशासन चुनाव प्रक्रिया पूरी कराने में तत्परता से जुट गया है। प्राप्त जानकारी के अनुसार नौ मई से 17 मई तक नामांकन किया जाएगा। अनुमंडल कार्यालय में सभी अभ्यर्थी नामांकन करेंगे। प्राप्त जानकारी के अनुसार निर्वाची पदाधिकारी नगर परिषद सह अनुमंडल पदाधिकारी के समक्ष मुख्य पार्षद और उप मुख्य पार्षद के अभ्यर्थी नामांकन करेंगे। जबकि वार्ड पार्षदों के अभ्यर्थी सहायक निर्वाची पदाधिकारी के पास नामांकन दाखिल करेंगे। सूत्रों के अनुसार सहायक निर्वाची पदाधिकारी पांच बनाए जा सकते हैं। इनके नामों का प्रस्ताव जिला निर्वाची पदाधिकारी नगर पालिका सह जिला पदाधिकारी के माध्यम से राज्य निर्वाचन आयोग के पास भेजा गया है। 



मतदाता सूची में जुटे हैं 381 नाम 

नगर परिषद चुनाव को लेकर मतदाता सूची का अंतिम प्रारूप प्रकाशित कर दिया गया है। बीडीओ योगेंद्र पासवान द्वारा जानकारी दी गई की दावा आपत्ति के तहत प्रपत्र दो अर्थात नाम जोड़ने के लिए कुल 381 आवेदन प्राप्त हुए थे। इसके साथ ही नाम हटाने या संशोधन से संबंधित प्रपत्र तीन में चार आवेदन प्राप्त हुए। नाम में सुधार के लिए प्रपत्र दो ए के तहत मात्र एक आवेदन प्राप्त हुआ है। उन्होंने बताया कि दावा आपत्ति पत्रों पर विचार कर उनका निष्पादन कर दिया गया है।



'भावी प्रत्याशी' वाले पोस्टर, बैनर होंगे हटाने, अन्यथा होगी कार्रवाई

संवाद सहयोगी, दाउदनगर (औरंगाबाद) : दाउदनगर नगर परिषद क्षेत्र में भावी प्रत्याशी संबोधित वाले कई बैनर, पोस्टर, होर्डिंग लगा दिए गए हैं। इन्हें तत्काल हटाना आवश्यक है। यदि ऐसी प्रचार सामग्री नहीं हटाए गए तो संबंधित भावी प्रत्याशी के विरुद्ध आदर्श आचार संहिता उल्लंघन की प्राथमिकी दर्ज की जाएगी। निर्वाची पदाधिकारी नगर परिषद सह एसडीओ मनोज कुमार ने बताया कि इसके लिए बीडीओ सीओ को जिम्मेदारी दी जा रही है। टीम बनाई जाएगी, ताकि शहर में ऐसे लगे होर्डिंग, बैनर, पोस्टर सभी हटाए जाएं। संबंधित व्यक्ति द्वारा यदि बैनर, पोस्टर, होर्डिंग नहीं हटाए जाते हैं तो आदर्श आचार संहिता का उल्लंघन मानते हुए ऐसे व्यक्तियों के खिलाफ प्राथमिकी की जाएगी। इससे संबंधित आदेश जारी कर दिया गया है। 





परिणाम घोषित होने तक नप क्षेत्र में आचार संहिता व धारा 144 लागू


 रात्रि 10 बजे से सुबह छह बजे तक ध्वनि विस्तारक यंत्र का प्रयोग वर्जित

 बिना अनुमति निजी भूमि, भवन, चारदीवारी, वाहनों पर चुनाव संबंधित झंडा पोस्टर लगाना प्रतिबंधित 

संवाद सहयोगी, दाउदनगर (औरंगाबाद) : राज्य निर्वाचन आयोग द्वारा नगर निकायों के निर्वाचन की घोषणा के उपरांत अनुमंडल पदाधिकारी सह निर्वाची पदाधिकारी नगर परिषद मनोज कुमार द्वारा गुरुवार को नगर परिषद क्षेत्र में धारा 144 लागू करने का आदेश जारी किया गया है। इस क्षेत्र में अधिसूचना जारी होते ही आदर्श आचार संहिता भी लागू लर दिया गया है। यह निर्वाचन प्रक्रिया की समाप्ति तक जारी रहेगा। अर्थात चुनाव परिणाम की घोषणा तक क्षेत्र में यह लागू रहेगा। इस आदेश के अनुसार किसी भी प्रकार के जुलूस, सभा, धरना, प्रदर्शन तथा ध्वनि विस्तारक यंत्र का प्रयोग बिना सक्षम पदाधिकारी की पूर्व अनुमति के इस्तेमाल नहीं किए जा सकते हैं। हालांकि यह आदेश शादी, बारात, पार्टी, शव यात्रा, हाट बाजार, अस्पताल में ले जाए जा रहे मरीज के साथ जाने वाले व्यक्तियों, विद्यालय महाविद्यालय में जाने वाली छात्र-छात्राओं एवं कर्तव्य पर तैनात सरकारी कर्मचारी, पुलिस बल पर लागू नहीं होगा। सक्षम अधिकारी द्वारा प्राप्त अनुमति के बावजूद ध्वनि विस्तारक यंत्र का प्रयोग रात्रि दस बजे से सुबह छह बजे तक प्रतिबंधित रहेगा। कोई व्यक्ति आग्नेयास्त्र, लाठी, भाला, गडांसा या मानव शरीर के लिए घातक कोई भी हथियार प्रदर्शित नहीं कर सकता है। कोई भी व्यक्ति या संगठन व्यक्ति विशेष के विरुद्ध सामग्री का अथवा इस प्रकार के पोस्टर, पर्चा, आलेख का प्रकाशन नहीं करेंगे या चिपकाएंगे या नहीं लिखेंगे जिससे आचार संहिता का उल्लंघन हो। यह आदेश सभी प्रकार के सोशल मीडिया माध्यमों के लिए भी लागू रहेगा। कोई भी व्यक्ति या संगठन किसी धार्मिक स्थल का उपयोग राजनीतिक प्रचार के लिए नहीं करेंगे एवं धार्मिक आयोजन से सांप्रदायिक भावना को राजनीतिक हित के लिए नहीं उभारेंगे तथा न ही भड़काएंगे। जारी आदेश के अनुसार कोई भी व्यक्ति मतदाताओं को डराने, धमकाने एवं किसी भी प्रलोभन में लाने का कार्य नहीं कर सकते हैं। प्रदूषण फैलाने वाले प्रचार सामग्रियों का इस्तेमाल राजनीतिक प्रचार प्रसार के लिए नहीं किया जा सकेगा। आदेश दिया गया है कि बिना अनुमति के कोई भी व्यक्ति निजी भूमि, भवन, चारदीवारी, वाहनों पर चुनाव संबंधी झंडा पोस्ट नहीं लगाएंगे। किसी भी अभ्यर्थी अथवा उनके कार्यकर्ताओं के समर्थकों द्वारा पोस्टर चिपकाकर लिखकर या झंडा लगाकर किसी निजी, सार्वजनिक अथवा सरकारी भवन को विरूपित नहीं कर सकते हैं।


Wednesday, 3 May 2023

बहिष्कार और हंगामे के साथ संपन्न हुई नगर परिषद की आखिरी बैठक



कब कैसे क्यों और क्या हुआ, देखने के लिए क्लिक करिये नीचे का लिंक #4thviews

https://youtu.be/ekyPSSeDQN4


उप मुख्य पार्षद और दो वार्ड पार्षदों ने किया बैठक का बहिष्कार 

आवास योजना के लाभुकों के लिए हाई कोर्ट जाएंगी मुख्य पार्षद 

प्रधानमंत्री कार्यालय को पत्र लिखेंगे कार्यपालक पदाधिकारी 

पैसे की कमी के कारण 500 परिवार हो गए हैं बेघर 

संवाद सहयोगी, दाउदनगर (औरंगाबाद) : नगर परिषद का चुनाव होना संभावित है ऐसे में माना यही जा रहा है कि बुधवार को मुख्य पार्षद मीनू सिंह की अध्यक्षता में हुई मासिक बैठक अंतिम बैठक होगी। ऐसे स्थिति में यह बैठक बहिष्कार और हंगामे के साथ खत्म हुई। माना यही जा रहा है कि बैठक में जो कुछ हुआ उसके पीछे चुनावी राजनीति है। बताया गया कि उप मुख्य पार्षद ललिता देवी ने बैठक की प्रोसिडिंग की प्रति ना मिलने को लेकर बहिष्कार किया। जबकि मुख्य पार्षद के प्रतिनिधि कौशलेंद्र कुमार सिंह का कहना है कि उन्हें प्रति मिली है जिस पर उनके पुत्र का हस्ताक्षर है। इसी तरह वार्ड पार्षद तारिक अनवर और सतीश कुमार सिंह ने बैठक का बहिष्कार यह कहकर किया कि उनकी बातों को अनसुना किया जाता है। बैठक में उनके द्वारा रखी गई बात को बैठक की प्रोसिडिंग में शामिल नहीं किया गया। लगभग आधे घंटे की तीखी बहस और कहासुनी के बाद दोनों ने अविश्वास जाहिर करते हुए सदन छोड़कर चले गए। इस मामले में कौशलेंद्र सिंह ने कहा कि यह राजनीति से प्रेरित है। अपने ही वार्ड में योजना से संबंधित स्थल चयन में सहयोग न करने का उन्होंने आरोप लगाया। दो बार ऐसे शब्द इस्तेमाल किए गए जिसे लिखा नहीं जा सकता। कार्यपालक पदाधिकारी ने बताया कि तीन बार टेंडर निकाले जाने के बावजूद सैरातों की बंदोबस्ती नहीं हो सकी, क्योंकि कोई भागीदार नहीं मिला। इसलिए सदन में उनका निर्धारित दर कम करने पर विचार किया गया। नगर परिषद के संविदा कर्मियों को 11 महीने का सेवा विस्तार दिया गया। योजना चयन की जाएगी। कार्यपालक पदाधिकारी ने बताया कि प्रधानमंत्री शहरी आवास योजना की राशि न होने के कारण लाभुकों को लाभ नहीं मिल रहा है। सरकार को अवगत कराई जाएगी। जैसे ही राशि आएगी योजना के लाभुकों के बीच स्थानांतरित कर दी जाएगी। मुख्य पार्षद मीनू सिंह और उनके प्रतिनिधि कौशलेन्द्र कुमार सिंह ने बताया कि आवास योजना के लाभुकों को राशि प्राप्त हो, इसके लिए वे खुद उच्च न्यायालय में जनहित याचिका दायर करेंगी। इसके अलावा बैठक में बताया गया कि प्रत्येक तीन वार्ड पर एक सेनेटरी इंस्पेक्टर का पद सृजित किया गया है। बैठक में सिटी मैनेजर विनय प्रकाश के अलावा लीलावती देवी, बसंत कुमार, प्रमोद कुमार सिंह, सीमन देवी, रीमा देवी, हसीना खातून, दिनेश प्रसाद, सोहेल अंसारी, जागेश्वरी देवी एवं अन्य शामिल हुए।



भोजन के लिए किया आमंत्रित

 नोकझोंक के साथ बैठक का बहिष्कार कर सदन से बाहर निकल गए वार्ड पार्षद तारिक अनवर को साथ भोजन करने के लिए मुख्य पार्षद के प्रतिनिधि कौशलेंद्र सिंह ने फोन कर बुलाया। कहा कि बैठक की बात अलग है लेकिन भाईचारा और प्रेम बना रहना चाहिए। हालांकि इसके बावजूद तारिक अनवर भोजन करने के लिए सदन में नहीं आए।



दो वार्ड पार्षदों को यह आपत्ती 

बैठक का बहिष्कार करने वाले तारिक अनवर और सतीश सिंह को आपत्ति इस बात पर थी कि मासिक बैठक सात महीने पर बुलाई गई है। पिछली बैठक में जिन योजनाओं की चर्चा उन्होंने की उसे प्रोसिडिंग में जगह नहीं दी गई। गत बैठक की संपुष्टि के मुद्दे पर ही तकरार शुरू हो गया। बमुश्किल आधे घंटे के अंदर दोनों एक साथ बैठक का बहिष्कार कर बाहर निकल गए। इस बीच दो बार मुख्य पार्षद प्रतिनिधि कौशलेंद्र सिंह ने अधिकारियों से कहा कि उन्हें निष्कासित किया जाए ऐसा हुआ नहीं।

ग्राम पंचायतों ने बनाया 850 पानी टंकी, लेकिन अधिकतर में कनेक्टर नहीं

 


आग पर नियंत्रण पाने के लिए होती है पानी की जरूरत 

बड़ी मुश्किल से मिलता है दमकलों को पानी 

पानी ली कमी को ले भड़कता है ग्रामीणों का गुस्सा

धरातल पर की समस्या दमकल कर्मियों के वश में नहीं

उपेंद्र कश्यप, दाउदनगर (औरंगाबाद) : अनुमंडल कार्यालय परिसर स्थित अग्निशमन कार्यालय में स्थित दमकलों को पानी भरने की समस्या का सामना नहीं करना पड़ता है। अन्य थानों में तैनात दमकलों को पानी लेने में परेशानी नहीं होती है। लेकिन दाउदनगर अनुमंडल के सुदूर इलाकों में जब आग बुझाने में दमकल का पानी खगम हो जाते हैं तो दोबारा पानी भरना सहज नहीं रहता। काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ता है। कभी-कभी स्थिति इतनी बदतर हो जाती है कि दमकल में पानी भरने के लिए घटना स्थल से बहुत दूर जाना पड़ता है और इस बीच लगने वाले समय के कारण दमकलों का बेहतर इस्तेमाल नहीं हो पाता है। ऐसी स्थिति में अग्निकांडो से होने वाली क्षति को रोकने में दमकल असफल हो जाते हैं। ग्रामीणों का गुस्सा बढ़ जाता है और कभी-कभी इसका खामियाजा दमकल कर्मियों को भुगतना पड़ता है। आम लोगों की शिकायत रहती है कि दमकल में पानी नहीं है। लेकिन समस्या धरातल पर दूसरी तरह की है। विभागीय आंकड़े के अनुसार पंचायती राज से लगाए गए नल जल योजना में जो पानी टंकी बने उसे दमकल में पानी भरा जा सके इसके लिए कनेक्टर नहीं लगाया गया है। जबकि ऐसा करना विभागीय आदेश है। यह आवश्यक है कि तमाम पानी टंकी के पास कनेक्टर लगाया जाए ताकि दमकलों को पानी भरने में सुविधा हो। लेकिन हालात ऐसे हैं कि अग्नि शाम कार्यालय ने जब सर्वे किया तो अनुमंडल में 850 पानी टंकी ग्राम पंचायतों द्वारा नल जल योजना के तहत बनाए गए हैं। लेकिन अधिकतर में कनेक्टर ही नहीं लगाया गया है। जिससे दमकल पानी नहीं भर पाते। दूसरी समस्या यह है कि दर्जनों ऐसे स्थानों पर पानी टंकी है जहां वाहन ही नहीं पहुंच पाते। वहां जाने तक इतनी चौड़ी सड़क नहीं है कि बड़े दमकल पानी के लिए जा सके।



अधिकारियों द्वारा की जानी चाहिए कार्रवाई


 ऐसे में सवाल यह है कि संबंधित एजेंसी या महकमा क्या कर रहा है। साढ़े आठ सौ की संख्या कम तो कतई नहीं है। अब ऐसे में कनेक्टर नहीं लगाया गया तो निर्मात्री एजेंसी को भुगतान कैसे अधिकारियों ने कर दिया। यह भ्रस्टाचार और लापरवाही का अंजाम है। नतीजा अगलगी की घटना के प्रभावित भुगतते हैं। आवश्यकता है कि अधिकारी ऐसी तमाम नल जल योजनाओं की जांच कर कार्रवाई करें, ताकि समस्या का अंत हो सके।



पीएचइडी ने लगाया है कनेक्टर

अग्नि शाम कार्यालय द्वारा किए गए सर्वे के अनुसार अनुमंडल में 19 पानी टंकी पीएचइडी द्वारा बनाए गए हैं। सब में कनेक्टर लगाए गए हैं, ताकि दमकल जाकर पानी ले सकते हैं। नगर परिषद क्षेत्र में भी जो जल मीनार बने हैं उसमें कनेक्टर नहीं है। जबकि यह आवश्यक शर्त है। समस्या यह है कि इसे देखने सुनने वाला कोई नहीं है।

शिक्षा, सुरक्षा व संस्कृति, धर्म का स्थान है वार्ड संख्या 12

 वार्ड नंबर 12 का हाल

जागरण आपके द्वार




नल जल योजना का बुरा हाल, बड़े नाला का निर्माण अवश्य 

बुडको द्वारा नल जल योजना का निर्माण 

बारुण रोड से पासवान चौक तक जाने वाले नाले से निकासी संभव 

थाना, महिला महाविद्यालय, जिउतिया चौक इसी वार्ड में

संवाद सहयोगी, दाउदनगर (औरंगाबाद) : शहर का महत्वपूर्ण वार्ड है वार्ड संख्या 12, यहां के वार्ड पार्षद मीनू सिंह मुख्य पार्षद भी हैं। कई महत्वपूर्ण स्थान इस वार्ड में हैं। जैसे दाउदनगर थाना, दाउदनगर का इकलौता महिला महाविद्यालय, कसेरा टोली जिउतिया चौक और धार्मिक अनुष्ठानों का प्रमुख स्थल सत्संग नगर इसी वार्ड में है। यानी यह वार्ड नारी शिक्षा, सुरक्षा, धर्म व संस्कृति का नियंता वार्ड है यह। लेकिन वार्ड के घरों से जो गंदा पानी निकलता है, उसका निकास बहुत मुश्किल है। क्योंकि मोहल्ले का पानी निकासी के लिए आवश्यक है कि एक नाले का निर्माण जो अभी तक नहीं हुआ है उसका निर्माण हो। बारुण रोड से पासवान चौक तक बड़ा नाला का निर्माण हुआ है। उस नाले में इस मोहल्ले का पानी गिराने के लिए एक नाला बनाया जाना जरूरी है। जो अभी तक नहीं बन सका है। इसके कारण इस वार्ड के कई मोहल्लों में जलजमाव की समस्या बरसात में होती है। इसके अलावा यहां जो नल जल योजना है वह बेकार है। हालांकि पूरे शहर की नल जल योजना निर्माण का हाल एक सा है। मुख्य पार्षद के प्रतिनिधि सह सशक्त स्थायी समिति के सदस्य कौशलेंद्र सिंह इस बात को मानते हैं कि बुरा हाल है। इसकी निर्माण एजेंसी बुडको है और काम नहीं हो रहा है या ढंग से काम नहीं हुआ है। यदि एक नाला बारूण रोड से पासवान चौक वाले नाला के साथ जुड़ता हुआ बना दिया जाए तो जल निकासी की समस्या का भी समाधान संभव है।



पुलिया का निर्माण जरूरी 

शुक बाजार निवासी धीरेंद्र कुमार रत्नाकर बताते हैं कि गली गली और सड़कें तो बन गई हैं लेकिन कई नालियों पर पुलिया का निर्माण नहीं हो सका है, जबकि कई दूसरे वार्डों में ऐसा निर्माण किया गया है। पटिया रखकर काम चलाया जा रहा है जो बार बार टूट जाता है। शंकर मंदिर के पास कचरा रहता है। सफाई पर्याप्त मात्रा में नहीं होती है। स्ट्रीट लाइट खराब है।


सड़क निर्माण की है जरूरत 


खत्री टोला निवासी अजय कुमार सिंह कहते हैं कि पर्याप्त रोशनी नहीं है। कृष्णा प्रसाद रवानी के घर से महिला कालेज वाली गली कभी बनी ही नहीं। इसे आज तक नहीं बनाया गया। इसे बनाया जाना चाहिए। बमुश्किल 500 मीटर लंबी सड़क ना बनाए जाने से काफी लोगों को यात्रा में कठिनाई होती है।



शौचालय व मूत्रालय है जरूरी


कसेरा टोली निवासी विकास कांस्यकार कहते हैं कि व्यापारिक व्यवसायिक जगह है यह, लेकिन पेशाब खाना और शौचालय नहीं है। सफाई की उत्तम व्यवस्था नहीं है। नगर परिषद कई तरह का कर लेती है लेकिन यात्री सुविधा उपलब्ध नहीं है। विकास के लिए कोई महत्वपूर्ण बड़ी योजना नहीं दिखती।



नालियों को ढका जाना अवश्य

कसेरा टोली जीमूतवाहन भगवान चौक के पास के निवासी मनीष रंजन बताते हैं कि यहां जिउतिया समारोह का सबसे बड़ा आयोजन होता है। पारंपरिक तरीके से संवत 1917 से यहां आयोजन हो रहा है। लेकिन यहां की नाली खुली है। यदि इसे ढंक दिया जाए तो आयोजन करने में और सुविधा प्राप्त होगी। श्रद्धालुओं को नली में गिरने का डर नहीं रहेगा।



कच्ची सड़कों को बनाया गया पक्की

मुख्य पार्षद मीनू सिंह ने कहा कि प्रायः सभी कच्ची सडकों को पक्की बनाया गया। कोई सड़क गली कच्ची नहीं है। मरम्मत का कार्य अगले सत्र में कराया जाएगा। क्षतिग्रस्त नाले का निर्माण हुआ। लगभग 150 व्यक्ति का राशन कार्ड बनाया। प्रधानमंत्री शहरी योजाना से प्राप्त चार आवेदन, सभी स्वीकृत, सभी का निर्माण कार्य प्रगति पर। नया 14 योजना स्वीकृत। सामाजिक सुरक्षा पेंशन 40 को स्वीकृत। कचड़ा उठाव की सुनिश्चित व्यवस्था। पर्याप्त स्ट्रीट लाइट लगाया गया है। 


राजनीतिक विशेषता : इस वार्ड से जगरनाथ कांस्यकार वार्ड पार्षद रहे थे। वे संवाददाता भी थे। बाद में लगभग तीन दशक चुनाव हुआ ही नहीं। जब 2002 में नगर पंचायत का चुनाव हुआ तो इनकी पत्नी लालती देवी वार्ड पार्षद बनीं। वर्ष 2007 के चुनाव में भी लालती देवी ही पार्षद बनीं। जब 2012 में चुनाव हुआ तो गुड़िया कुमारी पार्षद बनीं। वे जगरनाथ कांस्यकार के अनुज शिवनाथ कांस्यकार की पुत्रवधु हैं। मान लिया गया था कि यह वार्ड इस परिवार का गढ़ है। लेकिन जब नगर परिषद बना तो वर्ष 2018 के चुनाव में यह गढ़ ढह गया। और मीनू सिंह पार्षद बनीं और फिर मुख्य पार्षद भी।



महत्वपूर्ण स्थान : थाना, कसेरा टोली जिउतिया चौक, महिला महाविद्यालय, पीएचसी कालोनी, छतर दरवाजा, विद्या निकेतन।


मुहल्ला : शुक बाजार, छत्तर दरवाजा, खत्री टोला, कसेरा टोली, सत्संग नगर।