Saturday, 22 April 2023

न सोन में बालू का चौड़ा पाट बचा, न दिखते दीवार की तरह खड़े टीले

 सोन का शोक





बाढ़ को शहर में आने से रोकने में सक्षम थी बालू की दीवार 

सब खत्म हो गया, बन गयी समतल जमीन 

उपेंद्र कश्यप, दाउदनगर (औरंगाबाद) : सोन का शोक कई प्रकार का है। सोन में पानी कम होने और बालू खनन अंधाधुंध होने के कारण सोन का डिल्ला समाप्त हो गया और स्थिति यह है कि जहां अब सोन की धार बची हुई है वहां तक पहुंचने में बालू नहीं दिखता। यानी लगभग सोन का तीन किलोमीटर के पाट में अब बमुश्किल एक किलोमीटर धारा से सटा पाट ऐसा होगा जहां बालू दिखता है। एक समय ऐसा था जब महादेव स्थान से थोड़ी दूरी पर ही पश्चिम की ओर जाने पर सोन का बड़ा डिल्ला था। इसे बालू का टीला कह सकते हैं। कई किलोमीटर दक्षिण से उत्तर की तरफ सोन के पूरब दिशा में फैला हुआ था, और इसे शहर में बाढ़ के प्रवेश को रोकने वाली दीवार माना जाता था। अब बाढ़ आना ही नहीं है तो ऐसी दीवारों का काम भी नहीं बचा। धीरे-धीरे यह दीवार भी ढह गई। ध्वस्त होकर समाप्त हो गयी। सब घर मकान व सड़क और अन्य प्रकार के निर्माण में खपत हो गया। समतल मैदान बन गया। सोन का टीला पूरी तरह खत्म हो गया। एक समय था जब इस पर चढ़ने में लोग हांफ जाते थे। युवा और बच्चों को भी सतह से लगातार शीर्ष तक पहुंचना मुश्किल था। बच्चे उस पर चढ़ते थे और फिसलते थे। मजा लेते थे। मौज मस्ती का वह दौर खत्म हो गया। सुबह और शाम टहलने वालों की अच्छी खासी संख्या होती थी जो यहां मस्ती करते थे। 



1980 के दशक में हांफ जाते थे डिल्ला चढ़ने में


पांडेय टोली निवासी एल एन्ड टी कंपनी में चीफ़ हेल्थ, सेफ्टी, ईनवायरमेन्ट डा. विश्व कान्त पाण्डेय कहते हैं कि दाउदनगर के लोग उपमा देते थे कि सोन का बालू ख़तम हो जायेगा तो हो जायेगा किन्तु  फलाने बाबू का धन नहीं ख़तम होगा। किन्तु सोन के बालू का दोहन हो गया और बालू का टीला विलुप्त हो गया। अस्सी के दशक तक बालू के टीला पर चढ़ने में हांफ छूट जाता था। बच्चों को दौड़ कर चढ़ना पड़ता था और कभी कभी हवाई चपल बालू के ढ़ेर में गायब हो जाता था। हम बच्चों की झुण्ड अभिभावकों के साथ घूमने जाते थे। उनके आगे पीछे दौड़ लगाते बाबा भूत नाथ का अर्ध्य परिक्रमा कर लेते थे। फिर शुरू होता डिल्ला अथवा टिल्ला पर चढ़ने का जद्दोजहद। हम चढ़ते और फिसल जाते, हम चढ़ते और बालू के ढ़ेर में फंस जाते। जोरदार ठहाकों के बीच दूसरा धक्का लगाते और ट्रेन चलने की आवाज़ निकालते हुए ऊपर पहुंच जाते।



आम और महुआ का सुगंध अब कहां

अनुमंडल कार्यालय परिसर में टाइपिंग करने वाले सरोज कुमार नीरज बताते हैं कि डिल्ला पर प्रतिदिन जाने की लगभग आदत सी बन गई थी। वहां का आनंद अलग था। युवा होने के बावजूद एक बार में नहीं डिल्ला नहीं चढ़ पाते थे। मौज मस्ती करने के क्रम में आम और महुआ का सुगंध काफी प्रभावित करता था। अब वह सुगंध नसीब कहां है भला। इसके बाद आम का टिकोला और महुआ चुनते थे। अब न डिल्ला बचा न सोन का बालू वाला वितान।

 

खत्म हो गए बाग बागीचे, सोन का पाट भी


पांडेय टोली के अवधेश पांडेय बताते हैं कि काली स्थान व महादेव स्थान के पास काफी बड़ा बाग बगीचा था। आम के पेड़ काफी संख्या में थे। धीरे-धीरे सब कट कर खत्म हो गए। सोन का डिल्ला के साथ बाग बगीचे खत्म हो गए और उसका खामियाजा आम नागरिक को भुगतना पड़ रहा है। सोन का बालू देखने के लिए भी दो दशक पूर्व की अपेक्षा अब तीन किलोमीटर दूर जाना पड़ता है। अब लंबा चौड़ा बालू से लकदक सोन का पाट भी नहीं दिखता।

Friday, 21 April 2023

तीन साल में चार गुना से अधिक अगलगी की घटना

 


हर वर्ष बढ़ते जा रही अगलगी की घटनाएं 

फोटो- दाउदनगर अग्निशमन कार्यालय 

आठ से पंद्रह- 16 और फिर 24 घटना प्रत्येक माह

लोगों को है जागरूक होने की जरूरत 

सतर्कता के बिना समस्या बढ़ती जा रही

उपेंद्र कश्यप, दाउदनगर (औरंगाबाद) : दाउदनगर अनुमंडल में अगलगी की घटनाओं में लगातार तेजी देखी जा रही है। जागरूकता अभियान चलाए जाने के बावजूद अगलगी की घटनाओं की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है। लोगों को जागरूक होने की जरूरत है लेकिन इसमें आवाम रुचि नहीं ले रहा। यह बड़ी समस्या है। प्राप्त विवरण के अनुसार तीन वर्ष में अगलगी की घटनाएं चार गुना बढ़ गई। इस पर नियंत्रण पाने का कोई उपाय फिलहाल नहीं दिख रहा। वर्ष 2020 में अगलगी की 97 घटना घटी। यानी प्रत्येक महीने लगभग आठ घटना घटी। इस वर्ष एक बड़ी घटना सुर्खियां बनी थी। जब अरई में खलिहान में लगी आग में डेढ़ साल का एक बच्चा झुलस कर मर गया था। वर्ष 2021 में कुल 184 घटनाएं घटी। यानी प्रत्येक महीने लगभग 15 अगलगी की घटना घटी। इस वर्ष 20 अप्रैल को ओबरा प्रखंड के नौनेर में 10 वर्ष की एक लड़की स्वीटी कुमारी की मौत हुई थी। कई घटनाएं ऐसी घटी जिसमें पशुओं की मौत हुई। वर्ष 2022 में 197 अग्निकांड दर्ज किए गए। यानी प्रत्येक महीने लगभग 16 घटना। बिहारी बिगहा में एक गाय और बकरी की मौत हुई थी। वहीं 23 अप्रैल 2022 को खुदवां के बिशुनपुर चंदा में एक व्यक्ति गंभीर रूप से घायल हो गया था। रोशनी कुमारी घायल हुई थी। वर्ष 2023 के प्रारंभिक तीन महीने में ही 102 अग्निकांड हो चुके हैं। अर्थात इस चालू वर्ष में प्रत्येक महीने लगभग 34 अग्निकांड दर्ज हो रहे हैं। यानी तीन साल में ही अग्निकांड चार गुना से अधिक बढ़ गए। यह चिंता का विषय है और इस पर नियंत्रण पाने में जब तक लोग जागरूक नहीं होंगे तब तक सफलता नहीं मिलेगी।



अगलगी की घटनाओं की कई वजह 

विभाग द्वारा बताया गया कि आग लगी होने का कोई एक या दो कारण नहीं है। बल्कि कई कारण हैं। खेत खलिहान में रखे गए धान पुआल में सर्वाधिक आग लगता है। आमतौर पर अज्ञात कारण होता है। कभी-कभी बीड़ी सिगरेट पी कर फेंक देने से, कभी बच्चों द्वारा माचिस जला देने से अगलगी की घटना होती है। कभी-कभी जानबूझकर खेत में आग लगाया जाता है, जिसकी चिंगारी से खलिहान और पुआल के गांज में आग लग जाता है या कई बार घर जल जाते हैं।



समझने को तैयार नहीं ग्रामीण विभागीय अधिकारियों की मानें तो ग्रामीण अगलगी से संबंधित जानकारी जानने तक को तैयार नहीं होते हैं। विभाग की टीम उन्हें समझाने जाती है, जागरूक करने का काम किया जाता है, लेकिन ग्रामीण कोई न कोई बहाना बनाकर समय नहीं देते हैं। वह इसमें रुचि नहीं लेते हैं। शहर में कुछ हद तक तो जागरूकता है लेकिन गांव में स्थिति उलट है।



सोन का शोक : अंधाधुंध खनन के कारण सोन बर्बाद, जा चुकी हैं अब तक कई जानें




मशीनों से खनन के कारण बन गए हैं बड़े बड़े गड्ढे

छठ व्रत करना तक होता है मुश्किल

खतरनाक घाट पर लगाई जाने लगी है रोक

उपेंद्र कश्यप, दाउदनगर (औरंगाबाद) : अंधाधुंध बालू खनन के कारण सोन बर्बाद हो गया है। आधुनिक मशीनों से बालू खनन के कारण बड़े-बड़े गड्ढे सोन में बन गए हैं। स्थिति काफी खतरनाक हो गई है। गत 18 सितंबर 2022 को जीवित्पुत्रिका व्रत के नहाए खाए के दिन ही अमृत बिगहा से सोन में स्नान करने गई माताओं के साथ गए तीन बच्चों की मौत हो गई थी। तब इस घटना में 13 वर्ष के किशु कुमार, 10 वर्ष के सोनू कुमार और आठ वर्ष के शिवा कुमार की मौत हुई थी। इनके स्वजन विरधा पासवान, राम कुमार पासवान एवं मनोज पासवान ने तब खुलकर आरोप लगाया था कि ठेकेदारों द्वारा अंधाधुंध बालू खनन के कारण बन गए गड्ढों में डूबने से इनकी मौत हुई है। तब आक्रोश इतना चरम पर था कि यदि बालू खनन से जुड़े लोग सोन से बाहर नहीं निकलते तो बड़ी घटना घट सकती थी। इससे पहले 19 नवंबर 2021 को भी सत्संग नगर निवासी लक्ष्मण कुमार की गड्ढे में डूबने से मौत हो गई थी। जिसकी उम्र मात्र 15 वर्ष थी। मौत इस कारण होती है क्योंकि ऐसे गड्ढे में कितना गहराई है यह अनुमान लगाना मुश्किल होता है। सोन में एक से डेढ़ दशक पूर्व लोग जब छठ मनाने जाते थे तो खूब मस्ती करते थे। आज स्थिति यह है कि काली स्थान महादेव स्थान घाट पर छठ मनाना मुश्किल हो गया है। बड़े-बड़े गड्ढे मशीनों से खनन के कारण बन गए हैं। बीते छठ में ही खतरनाक घाटों को चिन्हित कर घेराबंदी कर दी गई थी। जब दैनिक जागरण ने यह सवाल उठाया था कि ऐसी स्थिति बन गई है कि कभी भी किसी के डूबने से मौत हो सकती है। डेढ़ से दो फीट पानी के बाद अचानक से बड़े-बड़े गड्ढे हैं। जिसमें आदमी की डूबने से मौत हो सकती है। तब जाकर प्रशासन ने उसकी घेराबंदी कराया था। सीधी सी बात है कि मशीनों ने यह हाल किया है। कालीघाट महादेव स्थान वाले बालू घाट से बालू की निकासी बंद हो गई है। बालू निकासी से परेशान लोगों ने काली स्थान के पास ईट सीमेंट से द्वार बना दिया। ताकि बड़े वाहन इधर से बालू लेने ना जा सकें। प्रतिरोध के बावजूद ग्रामीणों ने काम किया और उसके बाद बड़े वाहनों से बालू ढुलाई की व्यवस्था यहां खत्म हुई। जब तक बड़े स्तर का बाढ़ नहीं आता है तब तक सोन के गड्ढे बराबर नहीं होंगे और खतरनाक स्थिति बनी रहेगी।



नियमानुकूल होगी कार्रवाई


एसडीओ मनोज कुमार ने बताया कि गड्ढों को लेकर खनन विभाग से बात करेंगे और नियमानुसार जो भी संभव होगी वह कार्रवाई की जाएगी। ताकि किसी की जान खतरे में न पड़ सके।


बाढ़ आने की उम्मीद खत्म, कैसे भरेगा गड्ढा 


दाउदनगर बारुण रोड के किनारे रहने वाले 60 वर्षीय अनंत प्रसाद सोनी बताते हैं कि इस सड़क से लगभग एक किलोमीटर की यात्रा कर आदमी सोन की धारा के पास पहुंच जाता था और छठ व्रत धूमधाम से करता था। लेकिन अब लगभग तीन किलोमीटर दूर जाना पड़ता है। रास्ते में जंगल है। कंडा, पतेला, काशी, कटीला झाड़ी जिस कारण असुरक्षित महसूस करते हैं। सोन में मशीनों के कारण बने बड़े गड्ढे प्राकृतिक रूप से जब बाढ़ आएंगे तभी भर सकते हैं। लेकिन बाढ़ आने की उम्मीद भी अब नहीं की जा सकती। खासकर बड़े स्तर का बाढ़। 



अमृत बिगहा के लोगों ने विरोध में बना दिया द्वार 


अमृत बिगहा निवासी रामकरण पासवान बताते हैं कि ग्रामीणों ने बालू की अंधाधुंध ढुलाई बड़े वाहनों से रोकने के लिए काली स्थान के समीप एक द्वार का निर्माण कर दिया। ट्रकों की आवाजाही से आवागमन बाधित होता था। सड़क पर चलना मुश्किल हो जाता था। सुबह की सैर करने वाले सोन जाना बंद कर दिए थे। द्वार बनाने के बाद बालू खनन से जुड़े लोगों ने दूसरे रास्ते से सोन में जाकर बालू निकालना शुरू रखा है। जब तक बाढ़ नहीं आएगा तब तक गड्ढे नहीं भरेंगे।

सोन का शोक : पानी की कमी और बालू खनन से तीन किलोमीटर पश्चिम खिसक गया सोन

 


कभी नाव से पार करने में लगते थे तीन घंटे

आज नहीं बचा वो विस्तृत पाट

उपेंद्र कश्यप, दाउदनगर (औरंगाबाद) : रोहतास के इंद्रपुरी बराज से पटना के मनेर तक की 147 किमी की यात्रा कर गंगा नदी में मिलने वाला सोन नद अपनी बायीं तरफ सिमट व सिकुड़ रहा है। आज यह एक नहर से अधिक नहीं दिखता। गर्मी में तो यह बहुत पतली धार बन जाता है। यही हाल रहा तो आने वाले दिनों में यह और सिमटकर नाला न बन जाए। इसका दुष्प्रभाव भूगर्भ जल-स्तर और पर्यावरण पर पड़ रहा है। नदी के इस हाल के लिए पानी की कमी व बाढ़ के नहीं आने के साथ-साथ बालू के अंधाधुंध खनन को जिम्मेदार माना जा रहा है। 


नदी में अब नहीं आती बाढ़ 

आज से तीन दशक पहले तक सोन का चौड़ा पाट पार करने में पैदल और नाव से लगभग दो से तीन घंटे लगते थे। नदी पर दाउदनगर-नासरीगंज के बीच करीब चार किमी लंबा पुल बनाया गया था। एनीकट में विश्व का सबसे लंबा चौथा बराज 1872 में बना था, इसका वजूद शेष है। नहीं है तो नदी का वह लंबा पाट। अब हर साल बाढ़ भी नहीं आती। यहां वर्ष 1848, 1869, 1884, 1888, 1901 और 1923 में आए बड़े बाढ़ तो मशहूर हैं। लेकिन 1968 में इंद्रपुरी बराज के चालू होने के बाद धीरे-धीरे नदी में पानी की समस्या गहराती गई। इसके बाद वर्ष 1976 में बाढ़ आई। 2016 में भी हल्की बाढ़ आई। आगे नदी कभी पानी से नहीं भरी। धीरे-धीरे सूख व सिकुड़ रही नदी में अब नाव तक नहीं चलती, क्योंकि इसकी जरूरत ही नहीं रही। 


खत्म होते जा रहे बालू घाट 

कहा जाता था कि सोन का बालू कभी खत्म नहीं हो सकता, लेकिन अब वह खत्म होने लगा है। साल 1982 से सोन का सुबह भ्रमण करने वाले 69 वर्षीय सुरेश कुमार गुप्ता कहते हैं कि पानी की कमी के साथ बालू उत्खनन के कारण सोन का वजूद संकट में है। यहां का बालू बड़ी मात्रा में बिहार के विभिन्न इलाकों में ही नहीं, उत्तर प्रदेश तक जा रहा है। पहले दाउदनगर में दक्षिण से उत्तर सोन के किनारे लगभग 10 किलोमीटर तक बालू का टीला था, जिसे बड़का बालू कहा जाता था। फिर छोटका बालू और उसके बाद सोन नद। बड़का बालू टीला की ऊंचाई दो ताड़ से कम नहीं रही होगी। तब युवा रहे सुरेश उसपर चढ़ने में हांफ जाते थे। आज इसका वजूद खत्म हो गया है। 54 वर्षीय अवधेश पांडेय कहते हैं कि दाउदनगर के सबसे किनारे सोन तट पर बसे एक मोहल्ले का नाम ही बालूगंज है। नाम तो वही रहा, लेकिन अब वहां बालू नहीं। बताते हैं कि 20 साल में घर व सड़क बनाने में यहां से बालू उठाकर भरावट का काम किया गया। सोन तट के काली स्थान सोन घाट पर भी बालू खत्म हो गया। आने वाले समय में एक-एक कर बालू घाट खत्म होंगे। 


भूगर्भ जल पर पड़ा असर

मेडिकल दुकान के संचालक और कई वर्षों से सोन टहलने जाने वाले मनीष रंजन कहते हैं कि शहर से नदी के दूर जाने का असर भूगर्भ जल स्तर पर पड़ा है। पहले 40 फीट पर उपलब्ध पानी अब 100 से 200 फीट तक नीचे चला गया है। नदी किनारे की हरियाली व कास के जंगल भी अब नहीं रहे। नदी के पेट से उभर आई नई जमीन पर लोगों का अवैध कब्जा भी बढ़ा है। बालू के बेहिसाब उत्खनन ने वातावरण में हानिकारण धूलकण की मात्रा भी बढ़ा दी है। इसका असर पूरे पर्यावरण पर पड़ा है। 


मंत्री को दिए कई सुझाव 

सवाल है कि आखिर कैसे हो समस्या का समाधान? ईशा फाउंडेशन से जुड़कर पर्यावरण पर काम कर रहे बारुण निवासी सुनील यादव ने कहा कि गत वर्ष पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव और ईशा फाउंडेशन के संस्थापक सद्गुरु जग्गी वासुदेव के साथ बैठक में कई सुझाव दिए गए थे। इनमें बड़ी परियोजनाओं में बालू का विकल्प ढूंढने की बात भी उठी थी। बड़ी परियोजनाओं के लिए पत्थरों को पीसकर बालू बनाने तथा नदियों की गाद को बालू की जगह इस्तेमाल करने लायक बनाने के सुझाव दिए गए थे। 


केवल नदी के मार्ग बदलने का मामला नहीं 

औरंगाबाद के जिला खनन पदाधिकारी विकास पासवान नदियों के सिमटने या खिसकने के मामले में बालू खनन की कोई भूमिका नहीं मानते। कहते हैं कि नदियां अपनी धारा खुद बदलती रहती हैं। ऐसे में पर्यावरणविद सुनील यादव कहते हैं कि इससे पर्यावरण संकट भी जुड़ा है, जिसके लिए निश्चित तौर पर बालू का बेहिसाब उत्खनन जिम्मेदार है। बालू के नियंत्रित इस्तेमाल से समस्या को कम जरूर कर सकते हैं। बालू का विकल्प ढूंढने के साथ पेड़ भी लगाने होंगे। इससे खाद्य सामग्री उपलब्ध होने के साथ आय भी बढ़ेगी। साथ ही पर्यावरण व भूगर्भ जल स्तर भी बेहतर होंगे।



Wednesday, 19 April 2023

व्यवसाई की हत्या के मामले में तीन ने किया आत्मसमर्पण



आरोपित दो भाई और पिता पुत्र ने किया आत्मसमर्पण

फोटो-18.4.23 को प्रकाशित खबर

शनिवार की सुबह शहर में हुई थी हत्या 

संवाद सहयोगी, दाउदनगर (औरंगाबाद) : पुलिस दबिश के कारण व्यवसायी हत्या कांड के मामले में तीन ने सोमवार को व्यवहार न्यायालय में आत्मसमर्पण कर दिया है। दाउदनगर शहर स्थित बम रोड में शनिवार की सुबह राजेंद्र प्रसाद की हत्या हुई थी। इस मामले में नौ व्यक्ति नामजद आरोपी बनाए गए थे। मुख्य आरोपित राजेंद्र प्रसाद तांती, उनके भाई बसंत कुमार और बसंत कुमार के पुत्र नितेश कुमार ने सोमवार को अनुमंडल व्यवहार न्यायालय दाउदनगर में आत्मसमर्पण कर दिया है। इसे पुलिस दबिश का नतीजा माना जा रहा है। इस मामले में एसडीपीओ कुमार ऋषि राज ने बताया कि आरोपितों की गिरफ्तारी के लिए लगातार छापेमारी की जा रही है। माना जा रहा है कि इसी दबिश के कारण उन्होंने आत्मसमर्पण कर दिया। इनके आत्मसमर्पण की जानकारी पुलिस को नहीं है। लेकिन न्यायालय से जुड़े सूत्रों ने इसकी पुष्टि की है। मालूम हो कि दाउदनगर शहर में बम रोड में भूमि विवाद में राजेंद्र प्रसाद की पीट-पीटकर हत्या कर दी गई थी। इस मामले में उनकी पत्नी चंद्रमा देवी ने प्राथमिकी कराई थी। आरोपितों को गिरफ्तार करने की मांग को लेकर घटना के दिन ही लोगों ने शहर इन प्रदर्शन किया था। मृतक के शव को लेकर अस्पताल से भखरुआं तक प्रदर्शन किया था। अब जा कर तीन ने आत्मसमर्पण किया है। 




पूर्व विधायक के पुत्र की हत्या मामले में अनुसंधान बाद होगी कार्रवाई 

इधर शुक्रवार की रात दाउदनगर थाना ले हिच्छन बिगहा गांव में अरवल से दो बार विधायक रहे राजद नेता रवींद्र सिंह के पुत्र कुमार गौरव उर्फ दिवाकर की हत्या के मामले में प्रशासन का हाथ घटना के लगभग 72 घण्टे बाद भी हाथ खाली है। इस मामले में एसडीपीओ कुमार ऋषिराज ने बताया कि पूर्व विधायक की पत्नी उषा शरण ने अपने पुत्र की हत्या कराने का आरोप अपने पति पूर्व विधायक रविंद्र सिंह पर लगाया है। लेकिन दूसरी तरह की बात भी सामने आ रही है और यह प्रश्न उठ रहा है कि आखिर अपने बेटे की हत्या वे क्यों करवाएंगे। इस कारण मामले का अनुसंधान किया जा रहा है। अनुसंधान के बाद ही इस मामले में कोई गिरफ्तारी होगी। इसके लिए तकनीकी मदद भी ली जा रही है। जिला अनुसंधान इकाई मोबाइल लोकेशन और मोबाइल का सीडीआर निकाल कर मामले की जांच कर रही है। वहीं एसएफएल की टीम भी दो बार घटनास्थल पर जा चुकी है। 







36 घंटे बाद भी नहीं हो सकी कोई गिरफ्तारी



फोटो 16.4.23 को प्रकाशित खबर

राजेंद्र प्रसाद तांती ने लोहे की रड से की हत्या 

राजेंद्र साव हत्याकांड में बने नौ आरोपित दाउदनगर (औरंगाबाद) : भूमि विवाद में पीट-पीटकर जिस राजेंद्र साव की हत्या कर दी गई थी उस मामले में नौ व्यक्ति को नामजद आरोपित बनाया गया है। शनिवार को सुबह उनकी हत्या हुई थी। घटना के 36 घंटे बाद भी किसी की गिरफ्तारी की सूचना नहीं है। हालांकि पुलिस सूत्र दावा कर रहे हैं कि वे लगातार आरोपितों की गिरफ्तारी का प्रयास कर रहे हैं। लेकिन अभी तक उनके हाथ कुछ भी हासिल नहीं हुआ है। उनकी पत्नी चंद्रमा देवी द्वारा प्राथमिकी कराई गई है। विभिन्न धाराओं के तहत दर्ज कांड का अनुसंधान सब इंस्पेक्टर सुनील कुमार करेंगे। इस मामले में प्राथमिकी आवेदन में कहा गया है कि वार्ड नंबर 18 बम रोड में चंद्रमा देवी घर पर झाड़ू लगा रही थी। इसी बीच पुरानी शहर वार्ड नंबर तीन के निवासी राजेंद्र प्रसाद तांती, वार्ड नंबर 19 के निवासी बसंत प्रसाद, नितेश कुमार एवं दिनेश कुमार, वार्ड नंबर दो कोयरी टोला के निवासी सुमित कुमार भारती एवं मंटू कुमार, शुक बाजार स्थित मदन कुमार, वार्ड नंबर 17 बम रोड निवासी लक्ष्मी प्रसाद और वार्ड नंबर 21 निवासी मनोज कुमार और 10 अज्ञात के साथ आटो और स्कार्पियो से घर पर आए और गाली गलौज करने लगे। सब को जान मार कर बाहर फेंक देने की धमकी दी। अचानक जानलेवा हमला आरोपियों ने कर दिया। प्राथमिकी आवेदन में कहा गया है कि राजेंद्र साव पर राजेंद्र प्रसाद तांती ने लोहे की रड से हमला किया। जिससे सर पर चोट लगी और वे अचेत होकर गिर गए। लोग ठेला पर लादकर प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र ले गए जहां डाक्टरों ने मृत घोषित कर दिया। इधर अन्य आरोपितों बसन्त कुमार, नितेश कुमार, दिनेश कुमार, सुमित कुमार, मंटू कुमार, मदन कुमार एवं लक्ष्मी प्रसाद अन्य लोगों के साथ घर में घुसकर चंद्रमा देवी के पुत्र पिंटू एवं रवि के साथ मारपीट करने लगे। जिसमें में घायल हो गए। पुलिस मामले की जांच कर रही है।


पिता की हत्या की खबर सुन पुत्र हुआ अचेत

फोटो-घर में स्वास्थ्य लाभ ले रहा चितरंजन कुमार

पिता के दाह संस्कार में भी नहीं हो सका शामिल

संवाद सहयोगी, दाउदनगर (औरंगाबाद) : राजेंद्र साहू की पीट-पीटकर हत्या कर देने की सूचना जैसे ही उनके बेटे चितरंजन को मिली वह मूर्छित हो गया। अचेत हो गया। वह अविवाहित है। उसकी उम्र लगभग 18 वर्ष बताई जाती है। पिता की मृत्यु की सूचना के बाद से उसकी स्थिति लगातार खराब बनी हुई है। हालांकि अस्पताल से इलाज कराने के बाद वह घर लौट आया है। घर में ही स्वास्थ्य लाभ ले रहा है। वह अपने पिता की चिता जलाने में श्मशान घाट पर सोन दियारा क्षेत्र में नहीं जा सका। वह काफी डरा हुआ है। डाक्टरों ने सलाह दी है कि वह जब भी होश में आएगा तो परेशान होगा। इसलिए घबराने की जरूरत नहीं है। उसका इलाज करने वाले अरविंद हास्पिटल के डाक्टर अरविंद कुमार ने बताया कि वह डर गया है। नर्वस एकी कार्डिया का शिकार है। इसके कुछ मरीज तुरंत ठीक हो जाते हैं और कुछ मरीजों को वक्त लगता है। कुछ मरीज काफी समय तक परेशान भी करते हैं।






Sunday, 16 April 2023

भूमि विवाद में एक युवक की पीट पीट कर हत्या

 



शव को लेकर किया करीब तीन किलोमीटर तक प्रदर्शन 

मृतक के दो पुत्र समेत तीन घायल, एक की स्थिति गंभीर

हमला के लिए इस्तेमाल आटो और स्कार्पियो बरामद

संवाद सहयोगी, दाउदनगर (औरंगाबाद) : शहर के वार्ड संख्या 18 पटवाटोली बम रोड निवासी राजेंद्र साव की पीट-पीटकर हत्या कर दी गई। शनिवार की सुबह भूमि विवाद को लेकर दो पक्षों में मारपीट हुई जिसमें राजेंद्र साव घायल हो गए। पीएचसी में लोग इलाज ले लिए ले गए जहां उनकी मौत होने की बात कही गयी। इसके बाद पीएचसी में भीड़ इकट्ठा होते चली गयी। उनकी उम्र 45 वर्ष बताई जाती है। जबकि इस घटना में उनके 22 वर्षीय पुत्र पिंटू कुमार और 24 वर्षीय पुत्र रवि कुमार के साथ पड़ोसी शिव कुमार गुप्ता घायल हुए हैं। पिंटू कुमार की हालत गंभीर बताई जा रही है। मृतक के शव को प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के ओटी से निकालकर स्ट्रेचर पर लिए हुए भखरुआं तक करीब तीन किलोमीटर तक प्रदर्शन किया गया। भखरुआं में सड़क जाम कर दी गई। प्रशासन के समझाने बुझाने के बाद मामला शांत हुआ और फिर शव को लेकर अंत्य परीक्षण के लिए जिला मुख्यालय भेजा गया। संवाद प्रेषण तक शव का अन्त्य परीक्षण नहीं हुआ है। इस मामले में घायल का इलाज अरविंद हास्पिटल में किया जा रहा है। पीड़ित पक्ष का कहना है कि एक लाज और एक निजी विद्यालय में बजाप्ता बैठक कर योजनाबद्ध तरीके से हमला की गई है। हमलावर स्कार्पियो और आटो से आए थे। पुलिस ने एक स्कार्पियो और एक आटो को बरामद किया है। बताया गया कि इन्हीं वाहनों से लाठी और खंती लेकर हमलावर घटना स्थल पर आए थे। इस संबंध में पीड़ित पक्षों द्वारा संवाद प्रेषण तक प्राथमिकी के लिए आवेदन नहीं दिया गया है। काफी लोगों ने प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में ही नारेबाजी शुरू कर दी। यहां से निकल कर फिर दाउदनगर बारुण रोड पर नारेबाजी शुरू किया। नगर परिषद, पुलिस और अंचल अधिकारी के खिलाफ नारेबाजी की गई। प्रदर्शन करने वालों ने यह नारा भी लगाया कि- राजनीति मत करो। इसके बाद उत्तेजित भीड़ प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के ओटी में रखे गए शव को निकालकर स्ट्रेचर सहित भखरुआं ले गई। यहां तोड़फोड़ भी की गई। प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के सूत्रों के अनुसार यह स्ट्रेचर संवाद प्रेषण तक अस्पताल को वापस नहीं मिल सका है। पीएचसी में काफी देर तक भीड़ इकट्ठा रही और पुलिस प्रशासन अपना कार्य करता रहा।  मामला भूमि विवाद से जुड़ा बताया जा रहा है। बताया जा रहा है कि पुरानी शहर वार्ड संख्या तीन निवासी राजेंद्र प्रसाद द्वारा जिस जमीन पर निर्माण का काम करने का प्रयास किया जा रहा है वह जमीन नगर परिषद की है और इनके निर्माण के बाद लगभग 10 घरों का नाली का निकास बंद हो जाएगा। इसलिए ही विवाद हुआ है। दूसरी तरफ राजेंद्र प्रसाद का पक्ष यह है कि उन्होंने जमीन केवाला से खरीदा है और जमीन पर उनका मालिकाना हक बनता है।





एसपी, एसडीपीओ व एसएचओ से मांगा था संरक्षण

संवाद सहयोगी, दाउदनगर (औरंगाबाद) : हत्या कांड के दूसरे पक्ष की तरफ से

पुरानी शहर वार्ड नंबर तीन निवासी राजेंद्र प्रसाद ने डाक के माध्यम से 11 अप्रैल को ही एसपी, दाउदनगर के एसडीपीओ और थाना अध्यक्ष को आवेदन भेज कर संरक्षण की मांग किया था। जिसमें कहा है कि वार्ड नंबर 18 में खाता नंबर 164 प्लाट नंबर 2354 एराजी 1.065 डिसमिल जमीन केवाला से 10 अप्रैल 2008 को उसकी पत्नी सविता देवी ने  बंधिया देवी से खरीदा था। खरीदी के समय विक्रेता ने कब्जा दिया। लेकिन अब शिव प्रसाद, राजेंद्र प्रसाद, पिंटू कुमार, विकास कुमार एवं सिकेश कुमार द्वारा जमीन को बा जबरदस्ती हड़पने का प्रयास किया जा रहा है। जब भी जमीन पर जाते हैं गाली गलौज करते हुए मारपीट पर उतारू हो जाते हैं और कहते हैं कि हम लोग तुम्हें यहां घर नहीं बनाने देंगे। जमीन पर काम लगाओगे तो तुम्हें जान से हाथ धोना पड़ेगा। कहा है कि जमीन पर चहारदीवारी देना चाहते हैं। इसमें उन्होंने 14 अप्रैल के बाद कभी भी जमीन में चारदीवारी देने जाने की बात कही है। आवेदन के माध्यम से उसने पुलिस से संरक्षण की मांग की थी।


घटना:- 15.4.23

औरंगाबाद में अरवल के पूर्व विधायक के पुत्र की गोली मारकर हत्या

 



अरवल के दो बार विधायक रहे हैं रविंद्र सिंह 

पत्नी उषा शरण ने लगाया पुत्र की हत्या करवाने का आरोप 

बनाये गए हैं विधायक समेत छह नामजद आरोपित 

मौका ए वारदात से सिर्फ दो खोखा बरामद

दाउदनगर (औरंगाबाद) : अरवल के दो बार विधायक रहे रविंद्र सिंह के पुत्र कुमार गौरव उर्फ दिवाकर की गोली मारकर हत्या कर दी गई। उनकी उम्र 35 वर्ष बताई जाती है। अपराधियों ने शुक्रवार की रात लगभग 9:30 बजे औरंगाबाद के दाउदनगर थाना क्षेत्र के हिच्छन बिगहा गांव में उनके घर से कुछ दूरी पर उन पर हमला किया और घटनास्थल पर ही उनकी मृत्यु हो गई। एसडीपीओ कुमार ऋषि राज के अनुसार इस मामले में दो खोखा बरामद किया गया है। यह 1.35 बोर का बताया जा रहा है। बताया गया कि देशी बंदूक से गोली मार जाने की अधिक संभावना है। सूत्रों के अनुसार वह खाना खाकर घर से अपने खेत की तरफ गए थे। जहां आरोपित उनसे भिड़ गए और हत्या करने के बाद खलिहान में पुआल के गांज में शव को छुपा दिया। इस बीच दिवाकर ने अपनी मां उषा शरण को फोन किया। लेकिन बात नहीं हो सकी। मां ने काल बैक किया। लेकिन बात नहीं हो सकी। इस बीच फायरिंग की आवाज सुनकर खेत की तरफ मां दौड़ी। बेटे को बेसुध पड़ी देखी। सूत्रों के अनुसार दो गोली सीने में, एक पीठ में और एक पैर पर लगी है। इस मामले में मृतक की मां उषा शरण ने प्राथमिकी कराई है। प्राथमिकी आवेदन में उन्होंने कहा है कि पूर्व विधायक रविंद्र सिंह ने सुनियोजित तरीके से योजना बनाकर अपने गुर्गों से हत्या करवाया है। पूर्व विधायक के अलावा विनय कुमार सिंह, सुधांशु, रोशन उर्फ बमड, रवि और सत्येंद्र महतो को नामजद आरोपित बनाया गया है। सभी आरोपित हिच्छन बिगहा के निवासी बताए जाते हैं। प्राथमिकी आवेदन में कहा गया है कि वर्ष 1995 में पहली बार जब रविंद्र सिंह विधायक बने तो 1996 में उन्होंने अपनी पत्नी को तलाक देने की धमकी दी। पूर्व विधायक के चरित्र पर आरोप लगाया गया है। घटना के तत्काल बाद से गांव में पुलिस कैंप कर रही है। एसडीपीओ कुमार ऋषि राज ने बताया कि तकनीकी साक्ष्य उपलब्ध करने पर काम किया जा रहा है। कोई प्रत्यक्ष गवाह उपलब्ध नहीं है इसलिए मोबाइल डंप और सीडीआर निकाला जा रहा है ताकि वास्तविक हत्यारे का पता लगाया जा सके। मामले के उद्भेदन के लिए एसआईटी का गठन भी किया गया है। बताया कि गांव में मौका ए वारदात पर पुलिस को यह जानकारी दी गई की दो अपराधी आए थे जिन्होंने हत्या की। शव को अंत्य परीक्षण कराकर स्वजनों को सौंप दिया गया। गांव में मातम और दहशत का माहौल है। काफी संख्या में भीड़ इकट्ठा हुई और तरह-तरह की बात की जा रही है।





जिनके सहारे गांव की सुरक्षा, उनकी सुरक्षा में कैसे लगा सेंध


चोरी, हत्या व लूट की घटना पर सबसे पहले पहुंचे थे पूर्व विधायक 

सतर्कता इतनी कि कोइरीटोला से गुजरने पर लोग टोक देते थे 

पहले से ही था सब कुछ ओपन सीक्रेट मामला

गांव आये पिता रवींद्र सिंह को विरोध के कारण भागना पड़ा


 उपेंद्र कश्यप, दाउदनगर (औरंगाबाद) : दाउदनगर और अरवल की सीमा पर स्थित गांव है हिच्छन बिगहा। यहां जाने का रास्ता अरवल जिला के कलेर प्रखंड के अग्नूर से गुजरता है। इसी गांव में लालू प्रसाद यादव की पुत्री रोहिणी आचार्य का विवाह हुआ है। इस गांव की सुरक्षा की जिम्मेदारी कुमार गौरव उर्फ दिवाकर की हत्या में आरोपित बनाए गए इनके पिता पूर्व विधायक रविंद्र सिंह की रही है। ग्रामीणों में इसे लेकर कई सवाल हैं, जो उनकी संलिप्तता को लेकर आशंका को पुष्ट करती है। उनका सुरक्षा तंत्र काफी मजबूत माना जाता है। ग्रामीणों की मानें तो इलाके में चोरी, हत्या और लूट की घटना इनकी सुरक्षा प्रबंधों के कारण ही नहीं होती है। फिर भी यदि कभी भी इस तरह की कोई घटना घटी तो सबसे पहले पूर्व विधायक पहुंचे थे। अब जब उनके पुत्र की हत्या उनके ही घर के समीप हो गई है तो गांव में सबसे बड़ा सवाल यही पूछा जा रहा है कि उनकी सुरक्षा में गांव रहता था, फिर उनकी ही सुरक्षा में ही सेंध कैसे लग गया। उनके पुत्र की हत्या कैसे कोई कर गया। ग्रामीणों की मानें तो गांव में जो कोइरी टोला कहा जाता है यानी जहां रविंद्र सिंह का घर है उस मोहल्ले से कोई दिन में भी गुजर जाए तो उधर बैठे लोग पूछ बैठते थे कि इधर कहां जा रहे हैं। ऐसी सजगता सुरक्षा को लेकर यहां रही है। एक ग्रामीण ने सवाल किया कि पूरे क्षेत्र की सुरक्षा जिन पर थी, जिनके घर में हथियार है, जिनके साथ अंगरक्षक है, फिर उन्हीं के घर में हत्या कैसे हो गई। मालूम हो दिवाकर की हत्या के तुरंत बाद पूर्व विधायक रविंद्र सिंह गांव पहुंचे थे। बताया गया कि वे सीमावर्ती प्रखंड कलेर में बाबा साहब भीमराव अंबेडकर जयंती से जुड़े एक कार्यक्रम में शामिल थे। हत्या की सूचना के बाद गांव पहुंचे और उन्होंने यह जानने का प्रयास किया कि कैसे और किसके द्वारा हत्या की गई है। तभी गांव में इनका विरोध शुरू हुआ और चुपके से उनको निकल जाना पड़ा। गांव में यह बात खुलेआम कहीं जा रही है कि किस-किस ने गोली चलाई होगी और सभी को इनका आदमी बताया जा रहा है। ग्रामीण साफ कह रहे हैं कि हर ग्रामीण यह जानता था कि इस तरह की घटना को अंजाम दिया जा सकता है और कौन दे सकता है। यह सब कुछ पहले से ही ग्रामीणों को पता था और ग्रामीण खुलकर चर्चा इस बात की कर रहे हैं। इस संबन्ध में रवींद्र सिंह का पक्ष जानने के लिए इस संवाददाता ने दो बार काल किया तो रिसीव नहीं किया। फिर बाद में उनका मोबाइल स्वीच आफ बताने लगा।




विधायक बनना चाहते थे कुमार गौरव 

फोटो-दिवाकर और रवींद्र सिंह (दोनों फाइल फोटो)

 अरवल से लड़े थे चुनाव, आरोपित पिता रहे हैं दो बार विधायक 

पत्नी का दावा- अपनी टिकट दिया था पति को 

संवाद सहयोगी, दाउदनगर (औरंगाबाद) : रविंद्र सिंह औरंगाबाद जिला के सीमावर्ती जिला अरवल विधानसभा क्षेत्र से दो बार विधायक बने थे। उसी क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करने की आकांक्षा उनके दूसरे पुत्र कुमार गौरव उर्फ दिवाकर ने पाल रखा था। अविवाहित और लगभग 32 वर्ष की उम्र में कुमार गौरव ने आई एन डी यानी निर्दलीय अरवल विधानसभा क्षेत्र से 2020 में चुनाव लड़ा था। तब उन्हें मात्र 260 मत प्राप्त हुए थे। मालूम हो कि रविंद्र सिंह अतिवादी नक्सली संगठन के सदस्य के रूप में सक्रिय थे और फरारी जीवन जी रहे थे। वर्ष 1995 में लालू प्रसाद यादव से करीबी होने के कारण इनको चुनाव लड़ने का मौका मिला था। इनकी पत्नी उषा शरण का दावा है कि तब जनता दल का टिकट उन्हें मिला था। क्योंकि वह फरार चल रहे थे। लेकिन उन्होंने रविंद्र सिंह को विधायक बनवाने का काम किया और इनके खिलाफ जो दर्जनभर मामले थे उसे खत्म करवाया। दावा किया कि विधायक बनते ही सबसे पहले उन्होंने पत्नी को तलाक देने की धमकी दी और तब से ही संबंध खराब होता चला गया। बताया जाता है कि स्थिति इतनी बिगड़ती चली गयी कि उन्होंने सिंदूर लगाना भी छोड़ दिया। बाद में रविंद्र सिंह विधायक नहीं बन सके। लेकिन 2015 में राजद से टिकट मिला और पुनः विधायक बन गए। इसके बाद 2020 के चुनाव में उन्हें टिकट नहीं मिला। निर्दलीय उनके पुत्र दिवाकर ने चुनाव लड़ा जिसकी हत्या के आरोपित अब वे स्वयं बन गए हैं।




घर से 400 कदम दूर की गई हत्या परिचित ही हत्यारे, शक पर उठा लिया था कुदाल 

संवाद सहयोगी, दाउदनगर (औरंगाबाद) : दिवाकर के हत्यारे पूर्व से ही दिवाकर के परिचित थे। ग्रामीणों के अनुसार हिच्छन बिगहा के जिस घर में उषा शरण रहती हैं वहां से लगभग 400 कदम दूर खेत में खाना खाने के बाद दिवाकर टहलते हुए गए थे। आमतौर पर वे प्राय: खाना खाने के बाद टहलने जाते रहे हैं। इसी बीच सड़क से लगभग 60 कदम दूर बोरिंग के पास उनको लोगों ने पकड़ा। बातचीत करते हुए जा रहे थे। उनको शक हुआ और तब उन्होंने अपनी मां को काल किया। बात नहीं हुई तो उषा शरण ने दिवाकर को काल बैक किया। लेकिन बात नहीं हुई। आशंका के कारण दिवाकर ने कुदाल उठा लिया। अपराधी। भीड़ गए। मारपीट भी की गयी है, जैसा कि ग्रामीण बताते हैं। इसके बाद उसे गोली मार दी गई और शव को पुआल में छुपा दिया गया। ग्रामीणों का कहना है कि हो सकता है कि अपराधियों की योजना पुआल के गांज में आग लगा देने की रही हो। ऐसा होता तो फिर शव को पहचानना भी मुश्किल हो जाता। घटना के वक्त काफी ग्रामीण खाना खा रहे थे। गोली की आवाज सुनकर लोग बाहर निकले। तब तक उषा शरण घटनास्थल पर पहुंच गयी। मौका ए वारदात पर सिर्फ खून के निशान देखे जा सकते हैं।


श्वान दस्ता को नहीं मिली कामयाबी 

हत्या की घटना के तत्काल बाद श्वान दस्ता को बुलाया गया। लेकिन मौका ए वारदात पर अपराधियों का जूता चप्पल नहीं मिला। सिर्फ मृतक का खून था। वहां से श्वान दस्ता बोरिंग पर गया। पुलिस अधिकारी के अनुसार इस मामले में कोई कामयाबी पुलिस को नहीं मिली है। श्वान दस्ता द्वारा न कोई गोली बरामद किया गया न खोखा बरामद किया गया है। पुलिस को अब सिर्फ तकनीकी साक्ष्य के आधार पर हत्यारे तक पहुंचने की उम्मीद है। जिसे उपलब्ध करने के प्रयास में पुलिस जुटी हुई है।