Tuesday, 14 February 2023

ड्रग्स माफियाओं का वर्चस्व : 'उड़ता शहर' बन रहा दाउदनगर

 




अरवल, आरा और सासाराम से हो रही चरस- अफीम की आपूर्ति 

हत्या की डर से नेटवर्क की जानकारी नहीं देते युवा

नशे के कारण बर्बाद हो रही है युवा पीढ़ी 

ड्रग्स खरीदने के लिए चलन में है पासवर्ड और कोड वर्ड 

चिन्हित दुकानों पर तय समय पर हो रही आपूर्ति 

उपेंद्र कश्यप, दाउदनगर (औरंगाबाद) : एक फिल्म आई थी- उड़ता पंजाब। ड्रग्स के शिकंजे में कसे पंजाब की स्थिति को बयां करती है यह फ़िल्म। दाउदनगर भी इसी राह पर जा रहा है, उड़ता दाउदनगर बनने की स्थिति में है। और नई पीढ़ी ड्रग्स की चपेट में आकर बर्बाद हो रही है। काफी लोग इसे शराबबंदी का साइड इफेक्ट बताते हैं। किशोर वय उम्र के लड़के हों या युवा ड्रग्स की लत का शिकार होते जा रहे हैं। शहर में कई ऐसे अड्डे बन गए हैं जहां यह बैठकर ड्रग्स लेते हैं। शहर में कई चिन्हित ऐसे दुकान हैं जहां से ड्रग्स की आपूर्ति हो रही है। सूत्रों के अनुसार अरवल, आरा और सासाराम से ड्रग्स की आपूर्ति हो रही है। खूंखार नेटवर्क विकसित हो गया है। डा. महेंद्र शर्मा बताते हैं कि स्थिति यह है कि नशे की लत के कारण बीमार पड़ रहे बच्चे पूछने पर नेटवर्क के बारे में कोई जानकारी नहीं देते और वे बताते हैं कि यदि वे नाम लेंगे तो उनकी हत्या की जा सकती है। इतना मजबूत नेटवर्क बनता जा रहा है आपूर्तिकर्ताओं का।


कई इलाकों में हो रही बिक्री 

 बुधन बिगहा निवासी गोपाल शरण सिंह कहते हैं कि दाउदनगर गया रोड में, दाउदनगर पटना रोड में उमर चक तक इलाके में ड्रग्स की बिक्री हो रही है। राष्ट्रीय इंटर स्कूल स्टेडियम का मैदान, अंकोढ़ा का शिव मंदिर, पुराना अनुमंडल कार्यालय का सुनसान इलाका, पुरानी शहर का किला, शांति भवन नहर किनारे का सन्नाटा समेत शहर के कई सन्नाटे वाले इलाके ड्रग्स लेने वालों का अड्डा बन गया है।



बिगड़ते नौजवानों को संभालना जरूरी 

भाजपा नेता अश्विनी तिवारी कहते हैं कि बिगड़ते नौजवानों को रोकना संभालना आवश्यक है। पूरी पीढ़ी ड्रग्स की चपेट में जा रही है और बर्बाद हो रही है। ड्रग्स की बिक्री व्यापक पैमाने पर हो रही है। इनका मजबूत नेटवर्क खड़ा हो गया है। प्रशासन चाहे तो बिगड़ते नौजवानों को इस नेटवर्क को ध्वस्त कर बचा सकती है।

Friday, 10 February 2023

विस्थापन का दर्द झेल चुके नप को मिलेगा शीघ्र भव्य कार्यालय



138 वर्ष में पहली बार मिला सुंदर व जरूरत के मुताबिक कार्यालय 

1885 का भवन 2002 में हो गया था ध्वस्त

वर्ष 2005 में बना था सामुदायिक भवन वर्ष 2008 में बना अधूरा प्रशासनिक भवन 

उपेंद्र कश्यप, दाउदनगर (औरंगाबाद) : नगर परिषद अपने स्थापना का 138 वर्ष पूरा कर चुका है। अब उम्मीद की जा रही है कि फरवरी के अंतिम या मार्च के प्रथम सप्ताह में इसे अपना सुंदर भव्य और जरूरत के मुताबिक प्रशासनिक भवन उपलब्ध हो सकेगा, जो बनकर लगभग तैयार है। नगर परिषद कार्यालय को विस्थापन का भी दर्द झेलना पड़ा है। मुख्य पार्षद के प्रतिनिधि कौशलेंद्र कुमार सिंह ने बताया कि प्रशासनिक भवन बन कर लगभग तैयार है। जिसका उद्घाटन फरवरी के अंतिम या मार्च के प्रथम सप्ताह में किए जाने की संभावना है। बताया कि इसका प्राक्कलन राशि 63 लाख रुपये है। जिसमें से 60 लाख रुपये मुख्यमंत्री शहरी निकाय प्रोत्साहन राशि के तहत प्राप्त हुआ था। शेष राशि आंतरिक संसाधन से लगाया गया है। बताया कि लगभग दो लाख रुपये कार्यालय के सौंदर्यीकरण पर खर्च होना है। उन्होंने बताया कि अब तक करीब 45 लाख रुपये लगभग खर्च हो चुका है। फिलहाल नगर परिषद का कार्यालय अधूरा बने प्रशासनिक भवन और सामुदायिक भवन में चल रहा है। वर्ष 1885 में नगर पालिका का गठन हुआ था। तब से वह जिस खपड़े के मकान में चलता था वह 2002 में ध्वस्त हो गया। तब नारायण प्रसाद मुख्य पार्षद थे। वे समूचे कार्यालय को पटवाटोली स्थित दुर्गा क्लब ले गए ले। जहां कार्यालय निशुल्क रहा। इसके लिए नगर परिषद ने दुर्गा क्लब को कोई भुगतान नहीं किया था। बाद में प्रत्येक वार्ड में एक सामुदायिक भवन बनाने की नगर विकास विभाग की योजना आयी। इसी की राशि से नगर परिषद कार्यालय में सामुदायिक भवन का निर्माण किया गया और फिर कार्यालय इसमें शिफ्ट किया गया। तब मुख्य पार्षद सावित्री देवी बन गयी थीं। इसके बाद परमानंद पासवान मुख्य पार्षद 2007 में बने, तो प्रशासनिक भवन के निर्माण का काम किया गया। वर्ष 2008 में बनकर तैयार हुआ। कुल 28 लाख रुपए की राशि से तीन मंजिला भवन बनना था। लेकिन एक मंजिला भवन ही बन सका। जिस पर लगभग 12 लाख रुपये खर्च हुआ था। शेष राशि विभाग को वापस कर दी गयी थी। इस भवन में भी कई प्रकार के नगर परिषद से संबंधित कार्यालय चल रहे हैं।


इतना कुछ बना है नए भवन में

इस भवन में मुख्य पार्षद, उप मुख्य पार्षद, कार्यपालक पदाधिकारी, सिटी मैनेजर, प्रधान सहायक के साथ अन्य कर्मचारियों का निजी कार्यालय उपलब्ध है। इसके अलावा एक बड़ा सभा कक्ष निचले तल पर और ऊपरी तल पर वार्ड पार्षदों के बैठने के लिए सभा कक्ष का निर्माण किया गया है। इस कार्यालय को नगर परिषद के संदर्भ में पर्याप्त बताया जा रहा है।



दिल से बनवाया है कार्यालय 



मुख्य पार्षद मीनू सिंह ने बताया कि प्रशासनिक भवन के निर्माण में किसी तरह की कोई गड़बड़ी न हो यह सुनिश्चित किया गया है। इसे अपने घर से भी ज्यादा लगन और मन से बनाया गया है। इस तरह के सरकारी मकान शायद ही कहीं दूसरा मिले। इसमें लगाए गए सभी सामान ब्रांडेड कंपनियों के हैं। चाहे वह छड़ हो, चाहे टाइल्स, ग्रेनाइट या प्लाईवुड, सनमाइका हो, या बाथरूम शौचालय के नल हो सभी ब्रांडेड कंपनियों के लगाए गए हैं। 

Thursday, 9 February 2023

नगर बने हुआ 138 वर्ष, चट्टी से शहर बन रहा दाउदनगर

 


कस्बाई शहर में युवा पीढ़ी ला रही बड़े बदलाव 

व्यवसायिक प्रतिष्ठान हो रहे भव्य और आकर्षक 

10 फरवरी 1885 को अधिसूचित हुआ था नगरपालिका


उपेंद्र कश्यप, दाउदनगर (औरंगाबाद) : आज 138 वर्ष हो गए, दाउदनगर को नगर के रूप में अधिसूचित हुए। 10 फरवरी 1885 को दाउदनगर नगरपालिका के रूप में अधिसूचित हुआ था। इससे पहले यह चट्टी के रूप में मशहूर था शाहाबाद और मगध के इलाके में। इसकी ख्याति एक चट्टी के रूप में थी। कहावत यह प्रचलित रहा है कि शहर में सासाराम और चट्टी में दाउदनगर। धीरे-धीरे यह कस्बाई शहर बना और अब एक शहर का रूप लेता जा रहा है। इसमें युवाओं का बड़ा योगदान है। आज की युवा पीढ़ी जब अपने व्यवसायिक प्रतिष्ठानों को खोल रही है तो उसका लुक बड़े शहरों जैसा आधुनिक, आकर्षक और भव्य दे रहा है। कई माल, शोरूम या दुकान इसकी बानगी भर हैं। युवाओं की सोच भी महानगरीय हो रही है और यही कारण है कि शहर का लुक बदलता जा रहा है। लेकिन 138 साल की इस यात्रा के बाद शहर जहां ठहरा हुआ महसूस होता है वहां से आगे की यात्रा भी काफी लंबी है। जब यह नगरपालिका अधिसूचित हुआ था तब नगरपालिका तीसरे दर्जे का शहर माना जाता था। अब यह नगर परिषद है यानी दूसरी श्रेणी का शहर। वर्तमान में नगर निगम, नगर परिषद और नगर पंचायत की तीन श्रेणी बिहार में है। दूसरी श्रेणी का शहर दाउदनगर पहली श्रेणी की तरफ बढ़ने की यात्रा तो शुरू किया है लेकिन यात्रा कब पूरी होगी कहा नहीं जा सकता।


बदलाव के हैं कई आयाम

 


फोटो- डा. प्रकाश चंद्र 

डा. प्रकाश चंद्र ने कहा कि दुकानों के सामने झुग्गी झोपड़ी, पतीले और कर्कट अब नहीं रहते। शहर ने शहरीकरण का कापी तेजी से किया है और शुरुआत बड़े उद्यमियों के द्वारा हुई। खासकर वैसे व्यवसायियों द्वारा जो पारंपरिक रूप से व्यवसाय में नहीं थे। बड़े आउटलेट खुले। बड़े ब्रांड के आने से फैशन के पुराने तौर-तरीकों में काफी बदलाव आया। रेजिडेंशियल होटल खुले। खाने-पीने के होटलों का लुक भी बदला। शहरीकरण और व्यवसाय का विस्तार हुआ। बड़े-बड़े मोटर वाहनों के शो रूम की शाखा खुले। शिक्षा का हब बना। जिससे बाहर के काफी लोग बच्चों को पढ़ाने के लिए रहने लगे। प्रशासनिक अधिकारियों का भी योगदान है। जिन्होंने जनप्रतिनिधियों के अधूरे कामों को पूरा किया। नगर परिषद में बदलाव लाया। करोड़ों रुपए की मशीन साफ सफाई के लिए खरीदी गई। लेकिन आवश्यकता यह है कि नगर परिषद अपने संसाधनों का शहर को खूबसूरत और साफ बनाए रखने के लिए अधिकतम उपयोग करे।



मोबाइल ने बदल दी जीवनशैली 


फोटो- चंदन गुप्ता 

मोबाइल दुकान के संचालक चंदन गुप्ता कहते हैं कि मोबाइल आने के बाद लोगों की जीवनशैली बदल गई। जो युवा शहर से बाहर नहीं जा पाते वह भी मोबाइल से दुनिया को देख रहे हैं और उसके हिसाब से बदल रही है उनकी सोच। उनकी प्रवृतियां बदल रही हैं। जिस कारण शहर का लुक बदल रहा है और व्यवसाय में सकारात्मक सोच विकसित हो रही है।




सहजता को अपना रही नई पीढ़ी


फोटो-मुकेश मिश्रा

मुकेश मिश्रा कहते हैं कि नई पीढ़ी हर कार्य में सहजता को अपना रही है। आज के समय में लोगों के पास समय की सबसे ज्यादा दिक्कत है और नई तकनीक अभी तेजी से आ रही है। अब हाथ से बनाया हुआ सामान से ज्यादा आकर्षण आधुनिक मशीनों से बने समान में है। इसलिए युवा पीढ़ी समय बर्बाद ना करते हुए आसानी से सामान खरीदने का काम कर रही है। जिससे बाजार की प्रवृति बदली है।



सोशल मीडिया व वैश्वीकरण का लाभ


फोटो-निशांत राज

बाटा शो रूम के निशांत राज कहते हैं कि सोशल मीडिया से आई जागरूकता और वैश्विकरण के दौर से प्रेरित होकर अधिकतर लोग आधुनिकता और फैशन को स्वीकार कर रहे हैं। इस कारण कई बड़े ब्रांड भी अब छोटे शहरों या कस्बों तक अपना विस्तार करने लगे हैं। फलस्वरूप बड़ी बड़ी कम्पनियों के शोरूम जो जिलास्तर से कम के शहरों में नजर नहीं आते थे अब कस्बाई इलाकों में भी दिखने लगे हैं।

Wednesday, 8 February 2023

नाम अमृत बिगहा और शक्ल-ओ-सूरत जहर बुझा

 




शहर में गांव जैसा लगता है वार्ड संख्या एक


मुख्य पथ की स्थिति बदतर, उड़ती है धूल 

दाउदनगर (औरंगाबाद) : दाउदनगर शहर का वार्ड संख्या एक शहर में होकर भी गांव जैसा है। इस वार्ड का मुख्य मोहल्ला अमृत बिगहा है, लेकिन शक्ल ओ सूरत जहर बुझा सा। इस वार्ड में जाने के लिए धूल फांकना आवश्यक शर्त है। पचकठवा से लेकर पासवान चौक तक आप चले जाइए धूल धूसरित सड़क है। शरीर गंदा हो जाएगा। चेहरे पर धूल चिपक जाएगा। वार्ड संख्या एक की मुख्य सड़क है यह। बरसात में इस रास्ते गुजारना मुश्किल है। कीचड़ जम जाता है। वार्ड के अन्य मोहल्लों की भी स्थिति बेहतर नहीं कही जा सकती। कई मुहल्ले नए बस रहे हैं जहां स्वभाविक रूप से अभी सड़क नहीं है। अमृत बिगहा इसका सबसे मुख्य मोहल्ला है लेकिन अभी भी जलजमाव, नाली और गली के पक्की करण का काम बाकी है।


पचकठवा में बदतर स्थिति 


संजय कुमार कहते हैं कि नली गली नहीं है। रास्ता नहीं है। पचकठवा में बदतर स्थिति रहती है। आवास योजना का लाभ नहीं मिला। खगरी मोहल्ला में गली कच्ची रह गई, बनी ही नहीं। पूरी जी के बगीचा में पक्की गली नहीं बनी। प्राण के घर के पास से खेल मैदान तक सड़क नहीं। लखन राम के बगल से स्कूल तक कच्ची सड़क है।



पक्की सड़क का घोर अभाव 


अमृत बिगहा निवासी हरीनाथ पासवान कहते हैं कि पासवान चौक से मुंडमाल भुईयां टोला तक नाला का निर्माण आवश्यक है। मेन रोड से सुरेंद्र पासवान के घर तक पक्की सड़क चाहिए। गणेश पासवान के घर से काली स्थान सोनतराई तक पीसीसी सड़क जरूरी है।



पानी का निकास नहीं यह बड़ी समस्या 

अखिलेश बताते हैं कि नली गली नहीं है। सबसे बड़ी समस्या पानी का निकास नहीं होना है। गलियों में पीसीसी ढलाई नहीं है। जलजमाव और कीचड़ की परेशानी से मोहल्ला वालों को सामना करना पड़ता है।



विकास के किए हैं कई काम 


फोटो- जागेश्वरी देवी 

वार्ड पार्षद जागेश्वरी देवी बताती हैं कि पट कठवा तकिया मोहल्ला और अमृत बिगहा में पक्की सड़क निर्माण का काम किया है। 82 शौचालय, 80 वृद्धा पेंशन 16 आवास, और मोहल्लों में लाइट लगाने का काम किया गया है।



प्रमुख मोहल्ले -अमृत बिगहा, तकिया मोहल्ला, पटना का फाटक, पचकठवा, अशोक हाई स्कूल मोहल्ला, शिक्षक कालोनी, शिव मूर्ति नगर।



अब तक के वार्ड पार्षद 

वर्ष - पार्षद का नाम 

2002 -शांति देवी 

2007- बीजांती देवी 

2012- जागेश्वरी देवी 

2018- जागेश्वरी देवी


राजनीतिक विशेषता : हैट्रिक जीत

वर्तमान वार्ड पार्षद जागेश्वरी देवी की उम्र लगभग 100 वर्ष बताई जाती है। वे दो बार से वार्ड पार्षद हैं। इनके बनने से पहले 2007 में वार्ड पार्षद बीजांती देवी इनकी पूतोह है। 2008 में जब यह नियम लागू हुआ कि नगर निकाय में चुनाव लड़ने के लिए दो से अधिक संतान नहीं होना चाहिए तो इसी कारण बीजांती देवी की जगह उनकी सासू चुनाव लड़ी। आमतौर पर दो बार जितना मुश्किल होता है। यहां जितेंद्र पासवान की पहली पत्नी और फिर दो बार उनकी मां बनीं। यानी 2007 से लगातार वार्ड पार्षद सासु पूतोह हैं।


Monday, 6 February 2023

20000 लोगों को दिया निशुल्क एक्युप्रेशर इलाज, नहीं मिला सरकार से कोई लाभ

 


 फोटो-इलाज करते एक्यूप्रेशर चिकित्सक डा. विकास मिश्रा

 सड़क दुर्घटना के बाद चली गयी आंख की रोशनी 

प्रतिदिन सशुल्क से अधिक निशुल्क मरीज कराते हैं इलाज

न आवास मिला नया उज्ज्वला गैस कनेक्शन

 उपेंद्र कश्यप, दाउदनगर (औरंगाबाद) : वर्ष 2000 में हुई एक सड़क दुर्घटना ने  डा. विकास कुमार मिश्रा की जिंदगी में उथल-पुथल मचा दिया। 2004 में शादी हुई और इसके बाद धीरे-धीरे उनकी आंख की रोशनी जाती रही। बहुत बाद में चिकित्सकों ने उन्हें बताया कि सड़क दुर्घटना में चोट लगने के कारण नस सूख गया और ग्लूकोमा हो गया जिस कारण वह जीवन भर देख नहीं सकते। अभी उनकी उम्र 40 वर्ष बतायी जाती है। पत्नी वैष्णवी मिश्रा के अलावा एक संतान आकाश मिश्रा है। जिसकी उम्र 16 वर्ष बताई जाती है। तमाम प्रयासों के बावजूद उनको कोई सरकारी मदद नहीं मिली। सिवाय इसके कि उनको दिव्यांगता पेंशन मिलता है। लेकिन न आवास मिला ना उज्जवला गैस का कनेक्शन मिला। इसके लिए प्रयास कर थक गए। दूसरी तरफ स्थिति यह है कि वह एक्यूप्रेशर से इलाज करते हैं। लेकिन 10 मरीज में छह मरीज बिना पैसा दिए चले जाते हैं। जो चार मरीज से उन्हें पैसा मिलता है उसी से जीवन गुजर-बसर करते हैं। मरीज इलाज के बावजूद पैसा क्यों नहीं देते, इस प्रश्न पर श्री मिश्रा ने बताया कि खुद उनके पास पैसा नहीं होता। धन के अभाव में मरीज उन्हें पैसा नहीं देते। बताया कि वर्ष 2011 में जब स्वास्थ्य चेतना यात्रा निकली थी तब तत्कालीन स्वास्थ्य मंत्री अश्विनी चौबे के मौखिक आदेश पर उन्होंने प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में निशुल्क चिकित्सा सुविधा देना शुरू किया था। प्रत्येक सप्ताह दो दिन सेवा देते थे और किसी दिन 100 से कम मरीज नहीं देखते थे। इस प्रकार नौ साल में लगभग 20000 मरीजों की निशुल्क सेवा कर चुके हैं। इसके बावजूद उनको सरकार की तरफ से कोई लाभ नहीं मिलता। सड़क दुर्घटना के बाद जब उनकी आंख की रोशनी जाने लगी तो जीवन यापन के लिए एक्यूप्रेशर का काम सीखा। रांची से पढ़ाई की और फिर पटना स्थित बिहार एक्यूप्रेशर योग कालेज से शिक्षा ग्रहण की। दाउदनगर शहर में एक्यूप्रेशर चिकित्सक के रूप में उनकी प्रतिष्ठा है लेकिन जीवन गुजर-बसर करने के लिए सिर्फ प्रतिष्ठा नहीं बल्कि धन की जरूरत पड़ती है, यह अति आवश्यक है।


सरकार से मदद नहीं, इलाज के नाम पर की गई ठगी

 


डाउन सिंड्रोम से ग्रसित है आदित्य राज 

इस जन्मजात दिव्यांग का इलाज एलोपैथी में नहीं 

अमेरिका तक के डाक्टर ने कहा एलोपैथ से नहीं होगा लाभ वाराणसी के आयुर्वेद चिकित्सक के इलाज से हो रहा लाभ 

उपेंद्र कश्यप, दाउदनगर (औरंगाबाद) : आदित्य राज की उम्र नौ वर्ष है। चूड़ी बाजार निवासी दिनेश कुमार अग्रवाल का यह पुत्र है जन्मना दिव्यांग है। डाउन सिंड्रोम यानी मंदबुद्धि से अधिक खराब स्थिति वाली बीमारी से ग्रस्त है। सरकार से कोई लाभ ना मिला और ना सरकार से किसी लाभ की अपेक्षा अभिभावकों ने की। दिव्यांग का प्रमाण पत्र नहीं बनवाया गया है। इस बाल दिव्यांग के मामले में दुखद स्थिति यह है कि इलाज के नाम पर लोगों ने ठगने तक का काम किया। बताया कि जन्म के बाद ही पता चला कि हृदय में छेद है। 10 से 11 माह की उम्र में बेंगलुरु में सफल आपरेशन कराया। दिनेश अग्रवाल ने बताया कि एम्स में भागदौड़ से बचने के लिए बेंगलुरु इलाज कराया। बाद में पता चला कि इसे डाउन सिंड्रोम है। एलोपैथिक इलाज कराया लेकिन डाक्टर संतोष राय और अमेरिका में रह रहे डा. संजीव कुमार ने आश्वस्त किया कि एलोपैथ से इस मर्ज का इलाज संभव नहीं है। एलोपैथिक चिकित्सक यदि ठीक करने का दावा करते हैं तो वे वास्तव में ठगी करेंगे। थेरेपी या अन्य पैथी में इसे देखें। इसके बाद उन्होंने होम्योपैथ से इलाज कराया लेकिन कोई लाभ नहीं हुआ तो फिर वाराणसी से आयुर्वेदिक इलाज करा रहे हैं। इसके बाद फर्क यह दिखा कि बच्चा एक अक्षर बोलता था अब एक पंक्ति बोलने लगा है। आंख से संपर्क बनाने लगा है। एकांत पसंद की जगह सबसे मिलजुल कर रहने लगा है। स्नान, शौच अब स्वयं करने लगा है। बताया कि एक एक व्यक्ति ने आयुर्वेद चिकित्सा से ठीक करने के नाम पर लगभग तीस हजार रुपये की ठगी कर ली। अब वह दिखता भी नहीं है। दिनेश अग्रवाल ने बताया कि आदित्य कलम पकड़ता है लेकिन क, ख, ग भी नहीं लिख पाता। स्पष्ट बोल नहीं पाता है। उसके बाद मां पिता भी नहीं समझ पाते हैं। कुछ कुछ दिन भर बोलते रहता है। किसी सामान को ले लिया तो उसको दिन भर नहीं छोड़ेगा। 



इटली के डाक्टर ने कहा ठीक नहीं हो पाते ऐसे बच्चे 

जन्मना दिव्यांग कुंदन कृष्ण की है कई समस्याएं 

माता-पिता के भरोसे ही दिनचर्या का हर काम 


मौला बाग स्थित ओम प्रकाश दुबे का पुत्र कुंदन कृष्ण 18 वर्ष का हो गया है। लेकिन वह न चल सकता है, ना बोल सकता है, ना कुछ समझ सकता है। उसकी पूरी दिनचर्या अभिभावक के जिम्मे ही है। उसे सेरेब्रल पाल्सी यानी सीपी रोग है। जन्म के समय ही मस्तिष्क का एक नस दब गया था। ओम प्रकाश दुबे उर्फ मुन्ना दुबे बताते हैं कि अब उसकी उम्र हो गई इसलिए उसे उठा पाना भी मुश्किल होता है। एक व्यक्ति को हमेशा उसके साथ रहना पड़ता है इसलिए कहीं आना जाना संभव नहीं होता। सरकार की तरफ से इलाज के नाम पर कोई मदद कभी नहीं मिली। दिव्यांग पेंशन 400 रुपये प्रतिमाह मिलता है। सरकार से किसी लाभ की इच्छा भी नहीं रहती है। हर डाक्टर यही बोला कि इसका कोई इलाज नहीं है। इटली के डाक्टर मोरेनो टालडो से वाराणसी में एक बार मुलाकात हुई तो उन्होंने हर प्रकार की जांच के बाद कहा कि बच्चा बहरा नहीं है इसलिए दो चार शब्द बोल सकेगा, लेकिन जिंदगी में कभी चल नहीं सकेगा। ऐसे बच्चे ठीक नहीं हो पाते। अमेरिका में इलाज करने वाले डाक्टर संजीव कुमार ने भी यही उनसे कहा कि कभी ठीक नहीं होगा। इस तरह के मर्ज का इलाज अमेरिका में भी नहीं है तो भारत में उम्मीद कैसे की जा सकती है। ओम प्रकाश दुबे ने बताया कि हर समय कुंदन कृष्ण के साथ रहना उनकी आवश्यक विवशता है। 

Sunday, 5 February 2023

37941 लोग बढ़े बीते एक दशक में हसपुरा प्रखंड में

 


सबसे बड़े पंचायत अमझर शरीफ की आबादी 19054 

सबसे छोटा पंचायत पूरहरा की आबादी 11405 

2011 में थी कुल आबादी 160820 उपेंद्र कश्यप, दाउदनगर (औरंगाबाद) : अनुमंडल के हसपुरा प्रखंड की आबादी बीते एक दशक में 37941 बढ़ गई। यहां 2011 में कुल आबादी 160820 थी। नई जातीय जनगणना के अनुसार अब यहां 198761 लोग रहते हैं। हसपुरा में सबसे बड़ा पंचायत अमझर शरीफ है। यहां की आबादी 19054 है। जबकि सबसे छोटा पंचायत पूरहरा है जिसकी आबादी 11405 है। इस प्रखंड में कुल पंचायत 14 है जबकि वार्ड 197 हैं। जनगणना के लिए इतने ही गणना ब्लाक बनाए गए थे। इस पंचायत में 26748 भवन है। जबकि 28947 मकान हैं। 38787 परिवार रहते हैं जिनकी कुल आबादी 198761 है।


पंचायत वार विवरण 


पंचायत- कुल गणना ब्लाक- कुल भवन- कुल मकान- कुल परिवार- परिवार के कुल सदस्य 

अहियापुर- 13- 1672- 1813- 2294- 12558 

अमझर शरीफ- 14- 2555- 2680- 3743- 19054 

धुसरी- 14- 1769- 1862- 2689- 13543 

डींडीर-16- 2153- 2430- 2820- 15887 

डुमरा- 14- 1642- 1846- 2549- 12721 

हसपुरा- 17- 2143- 2375- 3246- 16675 

इटवां- 15- 1998- 2147- 2735- 14180 

जैतपुर- 13- 1895- 2045- 2696- 13764 

कोइलवां- 13- 1717- 1837- 2206- 12780 

मल्हारा- 14- 1849- 1933- 2719- 14144 

पीरु- 14- 1753- 1886- 2588- 13892 

पुरहरा- 11- 1578- 1640- 2316 11405 

सोनहथु- 13- 1801- 2011- 2656- 13604 

टाल- 16- 2173- 2442- 3530- 15554 

कुल- 197- 26748- 28947- 38787- 198761




2011 की जनगणना के आंकड़े

कुल आबादी -160820 

पुरूष- 83350 

महिला-77470 

कुल परिवार-26945 

औसत लिंगानुपात 929 

कुल साक्षरता दर- 71.46 प्रतिशत 

पुरुष साक्षरता दर- 66.94 प्रतिशत

महिला साक्षरता दर- 49.64 प्रतिशत

शहरी आबादी- 4.9 प्रतिशत

ग्रामीण आबादी-95.1 प्रतिशत

शहरी क्षेत्रों में औसत साक्षरता दर 83.8 प्रतिशत

ग्रामीण क्षेत्रों में साक्षरता दर 70.8 प्रतिशत