Friday, 12 May 2023

बैक्रहम मूर के नाम पर बसा इलाका है भखरुआं मोड़



शहर में नहीं शहर का हृदय स्थल भखरुआं

बैक्रहम मूर की है कब्र और आबाद है बुधन बिगहा

उपेंद्र कश्यप, दाउदनगर (औरंगाबाद) :

दाउदनगर से गुजरते ही भखरुआं का सामना होता है। यह शहरी चकाचौंध वाला इलाका शहर में नहीं है, यानी नगर परिषद क्षेत्र का हिस्सा नहीं है। यह ग्राम पंचायत का हिस्सा है। भखरूआं मोड़ का उच्चारण एक जिज्ञासा पैदा करता है कि यह नामकरण कैसे और क्यों हुआ होगा। यह जानने की उत्सुकता बढ़ जाती है। 

बात अंग्रजी हुकूमत के जमाने की है। शिक्षक-प्रशिक्षण महाविद्यालय (डायट) के पास खड़ा एक पीपल का पेड़ इतिहास का वर्तमान गवाह है। यहीं पर एक नील कोठी हुआ करती थी। आज बीआरसी के ठीक सामने पूरब दिशा में इसका अवशेष बचा हुआ है। जिसके एक अंग्रेज मैनेजर थे-बैक्रहम मूर। उनके निवास पर एक नौकर था-बुधन यादव। बुधन बेलाढ़ी गांव के निवासी थे। वह बड़े ही मालिक-सेवी थे। उनके सेवा भाव से प्रभावित होकर वैक्रहम मूर जब अपने वतन इंगलैण्ड चले गये तो साथ में बुधन को भी लेते गये और घुमाकर ले आये। कहते हैं कि मैनेजर बैक्रहम मूर बड़े ही रहमदिल और हंसमुख इंसान थे। वह आस-पास के गांवों में घूमा करते थे। गांव वालों के बीच उठते-बैठते थे और यहां के पर्व-त्योहारों में शामिल भी होते थे। वे बुधन से अक्सर कहा करते थे-यहां के लोग कितने इनोसेण्ट हैं। तुमलोगों के बीच रहना अच्छा लगता है। मुझे इंगलैण्ड जाने की इच्छा नहीं होती। अगर मैं मर गया तो तुमलोग मुझे यहीं पर दफना देना। यहां की मिट्टी में ही शांति मिलेगी।

हुआ भी ऐसा ही। बैक्रहम मूर की मृत्यु यहीं हुई। बुधन से सूचना पाते ही आस-पास के गांव वाले नील कोठी के पास जुट गये। इलाके के लोगों ने ही कब्र खोदी और बड़े ही आदरपूर्वक उन्हें दफनाया गया। उनके सम्मान में ही इस स्थान को -बैक्रहम मूर- कहा जाने लगा,  जो कालांतर में भखरूआं मोड़ हो गया। बैक्रहम मूर का स्मारक नीलकोठी से पच्छिम, बीआरसी के पास है। ट्रेनिंग कालेज मैदान में। इसी के समीप है बुधन बिगहा। आज बुधन बिगहा का आधा से बडा हिस्सा शहर में है, लेकिन भखरुआं तरारी पंचायत में है। जिसे नगर परिषद में शामिल करने की कवायद अभी तक असफल है। बीते महीने जब यहां तत्कालीन जिला पदाधिकारी सौरभ जोरवाल नगर परिषद कार्यालय आये थे तब उनसे भी भखरुआं को नगर परिषद में शामिल करने की मांग मुख्यपार्षद मीनू सिंह ने की थी। अब यह भखरुआं कब शहर का हिस्सा बन सकेगा इसकी सबको प्रतीक्षा है।







पहली बार सीधे 39038 मतदाता करेंगे मुख्य व उप मुख्य पार्षद का चुनाव



20428 पुरुष मतदाता हैं नगर परिषद दाउदनगर में 

18606 महिला मतदाता और चाट अन्य श्रेणी के हैं मतदाता 

27 वार्डों में कुल 39 मतदान केंद्रों पर होगा मतदान 

संवाद सहयोगी, दाउदनगर (औरंगाबाद) :  दाउदनगर के 39 मतदान केंद्रों पर कुल 39038 मतदाता सीधे पहली बार मुख्य और उप मुख्य पार्षद का चुनाव करेंगे। इसके साथ ही उन्हें वार्ड पार्षद का भी चुनाव करना है। यानी एक मतदाता वार्ड पार्षद, उप मुख्य पार्षद और मुख्य पार्षद के लिए कुल तीन मत देगा। शहर में 20428 पुरुष 18606 महिला और चार अन्य श्रेणी के मतदाता हैं। आगामी नौ जून को मतदान होगा और 11 जून को परिणाम आएगा।




वार्ड संख्या- मतदान केंद्र संख्या और नाम-पूरुष-महिला-अन्य- कुल मतदाता संख्या


एक-एक क एवं ख-अशोक उच्च विद्यालय दाउदनगर- 779 -703 - 0 - 1482 

दो - दो क एवं ख हाता मध्य विद्यालय- 908- 811- एक -1720 

तीन - तीन- प्राथमिक विद्यालय बालूगंज 687- 664- 0- 1351 

चार-चार- ठाकुर मध्य विद्यालय- 582 -572 -एक- 1155

पांच-पांच सामुदायिक भवन नोनिया बिगहा -718- 668-0- 1386 

छह- छह क एवं ख-मदरसा इस्लामिया पुराना शहर- 817- 791-0- 1608

सात-सात- कादरी मध्य विद्यालय -630 596- 0- 1226 

आठ-आठ क एवं ख -सामुदायिक भवन इब्राहिम शहीद- 895- 808 -0 -1703 

नौ-नौ क एवं ख-चलंत मतदान केंद्र मुनेश्वर भगत के हाता- 1050- 941 -0 -1991 

10- 10 क एवं ख-कन्या मध्य विद्यालय -828- 749 -0 -1577 

11-11- चलंत मतदान केंद्र बाबा साहब मेन रोड- 724- 695- 0- 1419

 12 -12- नगरपालिका मध्य विद्यालय संख्या एक -828 -753 -0-1581 

13- 13- प्राथमिक विद्यालय जानकीराम की कूचा गली- 670- 554- 0- 1224 

14 -14- नगर परिषद कार्यालय भवन- 788- 693- एक- 1482 

15- 15 -सामुदायिक भवन गोला मोहल्ला- 644- 645- 0 -1289 

16 -16 क एवं ख- मध्य विद्यालय रामनगर एवं राजकीय कन्या प्राथमिक विद्यालय बारुण रोड- 1026- 970 -एक -1997

17- 17 क एवं ख- चलंत मतदान केंद्र बम रोड- 933 -839- 0- 1772 

18-18 क एवं ख-चलंत मतदान केंद्र ब्राह्मण टोली -926- 804 -0- 1730 

19- 19- पटवा पंचायत घर पटवाटोली- 682- 605- 0 -1287

 20- 20 चलंत मतदान केंद्र जितिया चौक इमली तल -523- 501- 0- 1024 

21-21  नगरपालिका मध्य विद्यालय संख्या दो-608- 581 -0 -1189 

22- 22 सिंचाई विभाग का नगर तहसील कार्यालय मौलाबाग- 604- 554- 0 -1158 

23-23क एवं ख- राष्ट्रीय मध्य विद्यालय 667- 563- 0- 1230

 24- 24 सामुदायिक भवन हरिजन हास्टल -435- 404-0-839 

25- 25 क एवं ख बाल विकास परियोजना पदाधिकारी कार्यालय- 960 -852 -0 -1812 

26- 26 क एवं ख राष्ट्रीय उच्च विद्यालय- 853- 743 -0-1596 

27- 27 मौलाबाग मध्य विद्यालय पुराना अनुमंडल- 663- 547 -0 -1210 

कूल 39 मतदान केंद्र -20428 -18606- 04-39038



सबसे छोटा वार्ड 24, सबसे बड़ा वार्ड संख्या 15

कुल 27 वार्डों वाले शहर में मतदाता संख्या के आधार पर सबसे छोटा वार्ड वार्ड संख्या 24 है। जहां मात्र 839 मतदाता है। यह एकमात्र ऐसा वार्ड है जिसकी मतदाता संख्या तीन अंक में है। अन्यथा सभी वार्डों की मतदाता संख्या चार अंक में है। जबकि सबसे बड़ा वार्ड वार्ड नंबर 15 है। यहां कुल 1997 मतदाता हैं। दूसरे स्थान पर वार्ड संख्या नौ है, जहां 1991 मतदाता हैं। तीसरे स्थान पर वार्ड संख्या 17 है। यहां कुल मतदाता संख्या 1772 है। यानी सबसे छोटा और सबसे बड़ा के बीच दोगुना से भी अधिक का अंतर है।

Wednesday, 10 May 2023

...और नगर परिषद की जगह नगर पंचायत बन गया नगरपालिका

 



जनगणना में कर्मी की लापरवाही पड़ी थी तब भारी

पटना उच्च न्यायालय में चला मामला

तब एक अधिकारी बोले थे-भागो, भांड में गया नगरपालिका

कितनी हुई आर्थिक क्षति, इसका आकलन मुश्किल

उपेंद्र कश्यप, दाउदनगर (औरंगाबाद) : 

जब 2002 में नगर निकायों का चुनाव हुआ तो 13 वार्डों के शहर में 18 वार्ड बने, मगर नगरपालिका नगर पंचायत बन गया जब कि इसे नगर परिषद होना चाहिए था। कर्मचारियों की लापरवाही और अदूदर्शिता के कारण 2001 की जनसंख्या में पटवा, तांती समाज के दूसरे राज्यों में प्रवास के कारण शहर की आबादी कम प्रदर्शित हो सकी। इसे एक कर्मी की लापरवाही बताई गई थी।  दरअसल हुआ यह था कि पर्यवेक्षक ने जनगणना कार्य में लगे शिक्षकों को निर्देश दिया था कि जो घर बंद होंगे उनकी गणना नहीं करनी है। यह निर्देश भारी पड गया। इसकी अवहेलना करके भी शिक्षकों ने ऐसे घरों की गणना की मगर उसे अंतिम जनगणना सार में नहीं जोडा गया। इधर अभी कुछ प्रगणकों ने अपनी रिपोर्ट भी नहीं दिया था कि सांख्यकी विभाग ने नगरपालिका की जनसंख्या की रिपोर्ट मांग ली। चूंकि राज्य में नगर निकाय का चुनाव कराने की तैयारी चल रही थी। नगरपालिका ने आधी-अधूरी रिपोर्ट भेज दी। शाम दो बजे तक की रिपोर्ट तत्कालीन विशेष पदाधिकारी सह सीओ अमेरिकन रविदास के पास थी। इसमें नजसंख्या बतायी गई थी- 38 हजार 14 मात्र। जबकि शहर की संख्या इससे अधिक थी। इस भूल सुधार की कोशिश की गई। फाइनल रिपोर्ट अनुसेवक से भेजी गई। वह रिपोर्ट लेकर घर पर सो गया। सुबह गया तो अधिकारी ने कहा –भागो, भांड में गया नगरपालिका। और जब चुनाव की अधिसूचना जारी हुई तो नगर परिषद के रुप में नहीं नगर पंचायत के रुप में। इससे कितनी आर्थिक क्षति हुई इसका आकलन मुश्किल है। क्योंकि विकास राशि आबादी के आधार पर मिलती है। और नगर परिषद बनने में 15 साल की देरी हो गयी। तत्कालीन कांग्रेस प्रखंड अध्यक्ष डा.संजय कुमार सिंह इस मामले (सीडब्ल्यूजेसी नंबर-14151/2001) को उच्च न्यायालय ले गये। दावा किया कि शहर की आबादी 40 हजार से अधिक है। जनगणना में हुई लापरवाही और गडबडी को इसके लिए दोषी बताया। उच्च न्यायालय के बेंच ने 04 दिसंबर 2012 को आदेश दिया कि डीएम अपने स्तर से मामले की जांच कर न्यायालय में तथ्य को प्रस्तुत करें। डीएम ने भी नगर पंचायत से पत्र भेजकर तथ्य देने को कहा मगर कार्यालय ने रुचि नहीं ली। 


नगर परिषद चुनाव एक साल टला

नगर परिषद का दर्जा पाने को शहर में बेचैनी रही। मामले को लेकर वर्ष 2012 में वार्ड संख्या दो से पार्षद बने रामअवतार चौधरी पटना उच्च न्यायालय चले गए। संघर्ष जारी रहा। इधर 12 अप्रैल 2017 को बिहार मंत्रिमंडल ने दाउदनगर को नगर परिषद का दर्जा संबंधित प्रस्ताव पारित कर दिया। तब उम्मीद की गई कि राज्यपाल के स्तर से प्रकाशित होने वाली गजट में एक महीने का वक्त लगेगा और चुनाव नगर परिषद का होगा लेकिन यह भी नहीं हुआ। वर्ष 2018 में नगर विकास आवास विभाग में इस आशय की अधिसूचना जारी की, परिसीमन में वक्त लगा और फिर एक साल विलंब से नगर परिषद का चुनाव हुआ।  









मुकदमा जीतने के लिए वार्ड संख्या 13 में तब किसी ने नहीं डाला वोट

 


शहर होते हुए ग्राम पंचायत का हिस्सा है भखरुआं

उच्च न्यायालय के फैसले के कारण नगर परिषद का हिस्सा नहीं

 05 सितंबर 1980 को आया था उच्च न्यायालय का फैसला

उपेंद्र कश्यप, दाउदनगर (औरंगाबाद) :

सन 1950 में प्रखंड सह अंचल कार्यालय बना। तब इस परिसर का तीन चौथाई हिस्सा नगर पालिका का था,  मगर बीडीओ का आवास और पशुपालन विभाग का कार्यालय नगरपालिका क्षेत्र में नहीं था। सन 1958 में एक रिपोर्ट बहैसियत टैक्स दारोगा देवभूषण लाल ने तैयार किया था। क्षेत्र विस्तार का प्रस्ताव सरकार को भेजा गया। इसमें संपूर्ण दाउदनगर सर्वे मौजा को शामिल किया गया था। सन-1964 में बिहार सरकार ने नगरपालिका से हदबंदी, चौहद्दी, आबादी और पुरानी अधिसूचना की मांग की। अमीन गणेश लाल ने जो खाका तैयार किया उसमें बुधन बिगहा, गुमा, अंकोढा, पिलछी, खीचड बिगहा और भखरुआं को शामिल किया गया। नया वार्ड बना- संख्या-तेरह। श्रमण संस्कृति का वाहक-दाउदनगर के अनुसार जब यमुना प्रसाद स्वर्णकार 27 फरवरी 1972 को चेयरमैन बने तो इस प्रस्ताव को राज्य सरकार के पास भेजा गया। साल 1976 में यह प्रस्ताव स्वीकृत हो गया। वे 11 जुन 1977 तक चेयरमैन रहे हैं। साल 1978 में नए परिसीमन के आधार पर चुनाव हुआ। वार्ड तेरह का मतदान केन्द्र राष्ट्रीय इंटर स्कूल में बनाया गया। भखरुआं के दक्षिणी सीमा पर तीखा मोड (गवसगढ मोड) के पास तब लोहे का बोर्ड लगाया गया। जिस पर लिखा था - ‘शहर में आपका स्वागत है’। मगर राजनीति अडंगे डालने को तैयार हो गई। इस बूथ पर एक भी वोट नहीं डाला गया। मतदाताओं को समझाया गया कि अगर मतदान कम अधिक कुछ भी हुआ तो कोई भी प्रत्याशी जीतेगा ही। ऐसे में स्वीकृत प्रस्ताव को न्यायालय से खारिज कराना मुश्किल होगा। नतीजा एक भी वोट नहीं पडा। कोई वार्ड कमीश्नर नहीं बन सका। बेलाढी के मुखिया दिनेश सिंह भखरुआं को तरारी के साथ रखने के लिए हाई कोर्ट में वाद ले कर गए थे। उनका साथ दे रहे थे ऋकेश्वर सिंह जो भखरुआं में 1971 से संचालित -हिन्दुस्तान अल्युमुनियम वर्क्स- के मालिक थे। मुखिया को चिंता 1978 में होने वाले पंचायत चुनाव को लेकर थी। परिसीमन बदलने से परिणाम बदलने का डर था। दिनेश सिंह ने वाद में प्रतिपक्ष बनाया था राज्य सरकार को, नगरपालिका को नहीं। हाई कोर्ट में दिलिप सिंह वकील थे और जज थे- बल्लभ नारायण सिंह। कोर्ट में पक्ष रखा गया कि ग्राम पंचायत की स्वीकृति के बिना ही इसके एक हिस्से को शहरी क्षेत्र में शामिल कर लेना गलत है। नतीजा 05 सितंबर 1980 को फैसला नगरपालिका के खिलाफ आया, और भखरुआं शहर में शामिल होने से पहले ही अलग हो गया। 

Monday, 8 May 2023

वर्ष 1920-21 में हुआ था सिलौटा बखौरा का बंटवारा

 


08 सितंबर 1930 को किया गया था शहर का बंटवारा

पुराना शहर और नया शहर के रुप में हुआ था बंटवारा

दाउदनगर का पुराना नाम है सिलौटा बखौरा

मूल दाउदनगर पुराना शहर है, नया शहर अहमद खां ने बसाया था



उपेंद्र कश्यप, दाउदनगर (औरंगाबाद) :

दाऊद खां के आगमन से पहले भी दाउदनगर का इलाका था, जिसे सिलौटा बखौरा कहा जाता था। अभी भी जमीन संबन्धी पुराने दस्तावेजों में यह लिखा मिलता है। यह अंछा परगना का हिस्सा था। अब भी जमीन निबंधन में परगना अंछा ही लिखा जाता है। जमीन संबन्धी जानकार अनंत प्रसाद बताते हैं कि निबंधन में परगना अंछा लिखना अति आवश्यक है अन्यथा खतियान निकालने में समस्या आती है। इस सिलौटा बखौरा का बाद में बंटवारा हुआ था। इसके लिए मुकदमा हुआ और फिर नया शहर व पुराना शहर का विभाजन हुआ। विभाजन रेखा बना दाउदनगर-बारूण पथ। जब नगर परिषद का चुनाव हो रहा है तो यह जानना दिलचस्प होगा। शहर का पहला मानचित्र जिसे सर्वे नक्शा के नाम से जाना जाता है, वह सन 1911-12 में बना था। 1901 में शहर में प्लेग की महामारी हुई थी। तब शहर में मात्र चार वार्ड थे और आबादी थी 9744, मगर इस महामारी ने आबादी घटा दिया। जब 1911 में जनगणना हुई तो संख्या- घटकर मात्र 9149 हो गई। अगर इस नक्शे को वर्तमान नक्शे से मिलाया जाए तो पता चलेगा कि कितनी जमीनों पर अवैध दखल कब्जा है। हद यह कि उसके दस्तावेज तैयार कर लिए गए। जमीनों की खरीद फरोख्त होती है। मूल पुराना शहर ही दाउदनगर था। जिसे नया शहर कहते हैं, उसे दाउद खां के वंशज नवाब अहमद खान ने बसाया था। इस कारण इसे अहमदगंज भी कहा जाता था। आधुनिकता ने इसके नाम को नया शहर में बदल दिया। आबादी बढी तो प्राथमिकताएं और आवश्यकताएं भी बदली। श्रमण संस्कृति का वाहक-दाउदनगर पुस्तक बताता है कि सन 1920-21 में केस नंबर-65,  तौजी संख्या-191 के जरिये सिलौटा बखोरा का बंटवारा हुआ। बंटवारा कार्यालय बी.एल.माथुर (अधिनियम-58 बी.सी-1887) द्वारा यह बंटवारा 08 सितंबर 1930 को किया गया। पुराना शहर और नया शहर के रुप में बंटवारा हुआ। तब शहर में कुल छः वार्ड बन गए थे और आबादी हो गई थी- मात्र 8511 (जनगणना -1921 के अनुसार)। हालांकि बंटवारा होने के बाद की जनगणना जब 1931 में हुई तो शहर की आबादी हो गई थी-11699, यह बड़ी उछाल थी जनसंख्या वृद्धि में 37.46 फीसद की उछाल। पुराना शहर बारुण रोड के पश्चिम सोन तट एवं उत्तर में नोनिया बिगहा,  दक्षिण में काली स्थान एवं अमृत बिगहा तक है। इसमें कभी चार वार्ड क्रमशः एक,  दो, तीन एवं चार था। वर्तमान में कई वार्ड बन गए हैं। नया शहर जो है वह पूरब में बुधन बिगहा तक, उत्तर में उमरचक और दक्षिण में बुधु बिगहा तक है। 



पूरब और पश्चिम में है इतने वार्ड

दाउदनगर बारुण रोड नई शहर और पुरानी शहर की विभाजक रेखा है। इस सड़क के पश्चिम में पुरानी शहर है और पूरब में नई शहर है। इस सड़क के पश्चिम में वार्ड संख्या एक से लेकर नौ तक आबाद है। जबकि पूरब में वार्ड संख्या 10 से लेकर 27 तक आबाद है।



मुख्य व उप मुख्य पार्षद के अभ्यर्थी करेंगे एसडीओ कक्ष में नामांकन

 


वार्ड पार्षद के नामांकन के लिए बनाए गए हैं पांच सहायक निर्वाची पदाधिकारी 

वार्ड वार तय किए गए हैं सहायक निर्वाची पदाधिकारी 

संवाद सहयोगी, दाउदनगर (औरंगाबाद) : मुख्य पार्षद और उप मुख्य पार्षद के अभ्यर्थी अपना नामांकन अनुमंडल पदाधिकारी सह निर्वाची पदाधिकारी मनोज कुमार के कार्यालय कक्ष में नामजदगी का पर्चा दाखिल करेंगे। इनके अलावा वार्ड पार्षदों के लिए जिन अभ्यर्थियों को नामांकन करना है उनके लिए अलग से पांच सहायक निर्वाची पदाधिकारी बनाए गए हैं। जिनके लिए वार्ड तय किया गया है। इन सभी पदाधिकारियों के साथ आवश्यक कर्मी भी प्रतिनियुक्त किए गए हैं। इस संबंध में अनुमंडल पदाधिकारी द्वारा एक आदेश निकाला गया है। जिसके अनुसार वार्ड संख्या एक से पांच तक के अभ्यर्थी सहायक निर्वाची पदाधिकारी सह प्रखंड विकास पदाधिकारी दाउदनगर योगेंद्र पासवान के समक्ष नामजदगी का पर्चा दाखिल करेंगे। वे अनुमंडल पदाधिकारी दाउदनगर के न्यायालय कक्ष में बैठेंगे। अनुमंडल सभागार में वार्ड संख्या छह से 10 तक के अभ्यर्थी निर्वाची पदाधिकारी बनाए गए गोह प्रखंड विकास पदाधिकारी मनोज कुमार के समक्ष नामजदगी का परचा दाखिल करेंगे। अनुमंडल दंडाधिकारी के कार्यालय में वार्ड संख्या 11 से 15 तक के अभ्यर्थी ओबरा प्रखंड विकास पदाधिकारी राजू कुमार के समक्ष नामजदगी का पर्चा दाखिल करेंगे। वार्ड संख्या 16 से 22 तक के अभ्यर्थी भूमि सुधार उप समाहर्ता के कार्यालय में डीसीएलआर संजय कुमार के समक्ष नामजदगी का पर्चा दाखिल करेंगे। भूमि सुधार उप समाहर्ता के न्यायालय कक्ष में वार्ड संख्या 23 से 27 तक के अभ्यर्थी अंचल अधिकारी मनोज कुमार गुप्ता के समक्ष नामजदगी का पर्चा दाखिल करेंगे।



नामांकन को लेकर अनुमंडल कार्यालय की सुरक्षा की गई चाक-चौबंद 

कार्यालय के समीप पांच स्थानों पर एसडीओ ने की सुरक्षा बलों को प्रतिनियुक्त

पदाधिकारियों और सुरक्षाबलों को किया गया तैनात

संवाद सहयोगी, दाउदनगर (औरंगाबाद) : नगर परिषद चुनाव को देखते हुए अनुमंडल पदाधिकारी मनोज कुमार द्वारा अनुमंडल कार्यालय की सुरक्षा व्यवस्था की गई है। पांच स्थानों पर पदाधिकारी पुलिस बल के साथ प्रतिनियुक्त किए गए हैं। प्राप्त विवरण के अनुसार मुख्य सड़क से अनुमंडल रोड में कनीय अभियंता सिंचाई प्रमंडल धनंजय कुमार, महिला पर्यवेक्षक मीरा रंजन एएसआई सच्चिदानंद राय ओबरा को पुलिस बल के साथ प्रतिनियुक्त किया गया है। पंचदेव मंदिर के पास प्रखंड सहकारिता पदाधिकारी सतीश राम, महिला पर्यवेक्षक प्रभा कुमारी एवं एएसआई नंदकिशोर सिंह को पुलिस बल के साथ प्रतिनियुक्त किया गया है। अनुमंडल कार्यालय के पश्चिम कृषि समन्वयक मुकेश कुमार आजाद, महिला पर्यवेक्षक पुष्पा कुमारी एवं एएसआई महेश प्रसाद सिंह के साथ प्रतिनियुक्त किया गया है। अनुमंडल कार्यालय के मुख्य द्वार पर पश्चिम में कृषि समन्वयक राजीव रंजन सिंह, महिला पर्यवेक्षक कुमारी गीता, गोह के एएसआई प्रशांत कुमार और पुलिस बल को प्रतिनियुक्त किया गया है। अनुमंडल कार्यालय के पीछे पूर्वी द्वार पर मनरेगा के कार्यक्रम पदाधिकारी निर्भय कुमार, महिला पर्यवेक्षक कुमारी उर्मिला सिन्हा के साथ एएसआई अमरेंद्र कुमार और पुलिस बल के साथ प्रतिनियुक्त किया गया है। सबके साथ एक-चार का पुलिस बल प्रतिनियुक्त किया गया है और साथ में दो पुरुष एवं दो महिला लाठी बल भी दिया गया है। 




कुल 36 एनआर कटे 

दाउदनगर (औरंगाबाद) सोमवार को कुल 36 नाजिर रसीद (एनआर) कटे हैं इसके बिना नामजद की का पर्चा दाखिल नहीं किया जा सकता है। प्राप्त विवरण के अनुसार 36 में 24 महिला और 12 पुरुष के नाम से एनआर कटे हैं। जिसमें मुख्य पार्षद के लिए पांच, उप मुख्य पार्षद के लिए तीन और वार्ड पार्षद के लिए 28 एनआर शामिल हैं।



नगर परिषद चुनाव को लेकर आठ कोषांगों का हुआ गठन

आज से प्रारंभ होगा नामांकन

प्रशासनिक तैयारी हुई पूरी

चार कोषांग अपर एसडीओ के जिम्मे

संवाद सहयोगी, दाउदनगर (औरंगाबाद) : नगर परिषद चुनाव के लिए मंगलवार से नामांकन प्रक्रिया प्रारंभ होगी। नामांकन अनुमंडल कार्यालय में होना है। प्रशासनिक तैयारी इसके लिए पूरी कर ली गयी है। अनुमंडल पदाधिकारी मनोज कुमार ने नगर परिषद चुनाव को लेकर आठ कोषांगों का गठन किया है। इनके लिए नोडल पदाधिकारी, सहयोगी कर्मी की नियुक्ति की गई है। सबसे अधिक सीजर कोषांगों की जिम्मेदारी अपर एसडीओ को दी गयी है। उनको आदर्श आचार संहिता कोषांग, विधि व्यवस्था कोषांग, प्रतिवेदन कोषांग व जन शिकायत कोषांग का नोडल बनाया गया है। नाम निर्देशन कोषांग में भूमि सुधार उप समाहर्ता संजय कुमार, बीडीओ दाउदनगर योगेंद्र पासवान, गोह के मनोज कुमार, ओबरा के राजू कुमार और अंचल अधिकारी दाउदनगर मनोज कुमार गुप्ता को सहायक निर्वाचित पदाधिकारी बनाया गया है। अवर निर्वाचन पदाधिकारी मनोज कुमार नोडल पदाधिकारी होंगे। इसके अलावा 22 व्यक्तियों को सहयोगी कर्मी बनाया गया है। जिसमें अनुमंडल में पदस्थापित कर्मियों के अलावा कई शिक्षक शामिल हैं। यह कोषांग अनुमंडल पदाधिकारी के न्यायालय कक्ष में काम करेगा। आदर्श आचार संहिता कोषांग के लिए अपर एसडीओ प्रियव्रत रंजन नोडल पदाधिकारी बनाए गए हैं, जबकि तीन सहयोगी कर्मी रखे गए हैं। यह अनुमंडल गोपनीय शाखा कार्यालय से संचालित होगा। विधि व्यवस्था कोषांग के लिए भी अपर एसडीओ प्रियव्रत रंजन को ही नोडल पदाधिकारी बनाया गया है। इसके लिए छह सहयोगी कर्मी रखे गए हैं। इसमें हसपुरा, गोह, ओबरा एवं दाउदनगर के अंचल अधिकारी रखे गए हैं। यह अनुमंडल कार्यालय में संचालित होगा। प्रतिवेदन कोषांग के भी नोडल पदाधिकारी प्रियव्रत रंजन को बनाया गया है। इसमें बीडीओ गोह मनोज कुमार और बीडीओ दाउदनगर योगेंद्र पासवान को सहयोगी पदाधिकारी बनाया गया है। तीन सहयोगी कर्मी दिए गए हैं। जन शिकायत कोषांग के नोडल पदाधिकारी प्रिय व्रत रंजन को बनाया गया है। व्यय लेखा कोषांग के नोडल पदाधिकारी अवर निर्वाचन पदाधिकारी मनोज कुमार बनाए गए हैं। इस कोषांग में पांच सहयोगी कर्मी रखे गए हैं। वाहन कोषांग के नोडल पदाधिकारी प्रियव्रत रंजन को बनाया गया है। जिसमें चार सहयोगी कर्मी होंगे। हेल्प डेस्क कोषांग के नोडल पदाधिकारी हसपुरा के बीडीओ अभय कुमार को बनाया गया है। बीस सहयोगी पदाधिकारी व कर्मी इसके लिए तय किये गए हैं। यह अनुमंडल सभा कक्ष के बाहर काम करेगा।



बनाया है अनुमंडल नियंत्रण कक्ष सह हेल्प लाइन 

अनुमंडल नियंत्रण कक्ष सह हेल्पलाइन का गठन किया गया है। बाल विकास परियोजना पदाधिकारी प्रतिभा कुमारी को इसका नोडल पदाधिकारी बनाया गया है। कुल 10 सहयोगी पदाधिकारी व कर्मी इसके लिए नियुक्त किये गए हैं। यह अनुमंडल कार्यालय के प्रवेश द्वार के समीप संचालित होगा।


महत्वपूर्ण नामांकन 15 और 16 मई को 

नामांकन की प्रक्रिया भले मंगलवार से शुरू होगी, लेकिन प्रमुख भावी प्रत्याशी 15 या 16 मई को नामांकन करेंगे। निवर्तमान मुख्य पार्षद मीनू सिंह ने बताया कि वह 16 मई को नामांकन करेंगी। पूर्व मुख्य पार्षद सोनी देवी 15 या 16 मई को नामांकन करेंगी, यह अभी तय नहीं है। पूर्व मुख्य पार्षद परमानंद पासवान की पुत्रवधू मोनी कुमारी 15 मई को मुख्य पार्षद पद के लिए नामांकन करेंगी। जबकि स्वयं परमानंद प्रसाद वार्ड संख्या 22 से वार्ड पार्षद के लिए नामांकन करेंगे। पूर्व उप मुख्य पार्षद अजय कुमार पांडे उर्फ सिद्धि पांडे की पुत्रवधू स्वीटी पांडे 16 या 17 मई को मुख्य पार्षद पद के लिए नामांकन करेंगी।



Sunday, 7 May 2023

दाउदनगर शहर की जमीन में थी 12 इस्टेट की हिस्सेदारी



1899 में हुआ था तख्ते बंदी बंटवारा 1928 में हुआ था नवाब और उनकी बेटी के बीच बंटवारा

लंबाई के लिए अरज एवं चौड़ाई के लिए तुल शब्द का इस्तेमाल

उपेंद्र कश्यप, दाउदनगर (औरंगाबाद) : दाउदनगर शहर की कहानी भी अजीब है। इसे दाऊद खां ने बसाया था और बाद में यह कारा इस्टेट की मिल्कियत बन गयी। भारत-पाकिस्तान विभाजन के वक्त कारा इस्टेट के नवाब व अन्य लोग पाकिस्तान चले गए। यही वजह है कि इस शहर में हुकुमनामा से प्राप्त जमीनों को लेकर विवाद होते रहता है। क्योंकि कारा इस्टेट रिटर्न दाखिल नहीं किया था। यहां तख्ते बंदी की कहानियां भी काफी हैं। जब पूरा शहर कारा इस्टेट के नियंत्रणाधीन हो गया था तब संभवतः हसन इमाम नवाब थे। इन्हें शहर हसनु बाबू के नाम से जानता था। कहा जाता था हसनु बाबू का तख्ता। शहर में कई लोगों की मिल्कियत थी। इस कारण तख्ता भी कई थे। बैजनाथ पांडेय (अब स्वर्गीय) ने इस संवाददाता को बताया था कि उनके पूर्वज उन्हें बताते थे कि इस शहर में 12 इस्टेट की हिस्सेदारी हुआ करती थी। कारा इस्टेट, बंगाली इस्टेट, युरोपीयन सोलोनो इस्टेट, काली प्रसाद अग्रवाल, सूरज प्रसाद अग्रवाल, संस्कार विद्या के सीएमडी सुरेश प्रसाद गुप्ता के पूर्वज विशेश्वर नाथ, लियाकत हुसैन, कयुम हुसैन एवं इकबाल हुसैन के पूर्वज, गुदानी लाल, मनहरण लाल, यदुनंदन साव, राम कृपाल प्रसाद एवं रामबिलास बाबु स्वर्णकार के पूर्वज सखीचंद साव, स्वतंत्रता सेनानी जगदेव प्रसाद के पूर्वज अनंत लाल, रामेश्वर पांडेय, रामेश्वर पूरी, सोमारु साव, केशव प्रसाद की शहर की जमीनों में हिस्सेदारी हुआ करती थी। समय के साथ जमींदारी चली गई। जमीनें अन्य के कब्जे में चली गई। सुरेश प्रसाद गुप्ता बताते हैं कि उनके ही 16 भूखंड बाजार में ऐसे हैं जो दूसरे के कब्जे में चले गये। वे लड़ना नहीं चाहते इसलिए कब्जा अन्य का है। अवैध कागजातों के बल पर इस तरह संपत्ति पर कब्जा करने के कई उदाहरण शहर में मिल जायेंगे।

कारा नवाब और उनकी बेटी (शायद) खुदैतुल कुबरा के बीच बंटवारा 1928 में हुआ। नौ आना और सात आना। इससे पहले इनके अधीन के अठारह जमींदारों के अधीन पुरानी शहर था। इन सबने 1896 में बंटवारा सुट दाखिल किया था। इन्हें उर्दु में सायल (प्रार्थी, फरियादी) कहा जाता है। जिस पर फैसला 1899 में हो चुका था। रैयती खतियान बना कर दिया गया था। इसे तख्ते बंदी बंटवारा कहा जाता है। इसके साथ एक नजरी नक्शा बना हुआ था। इसमें लंबाई के लिए अरज एवं चौड़ाई के लिए तुल तथा क्षेत्र के लिए कट्ठा शब्द का इस्तेमाल किया गया है। डिस्मिल शब्द कारा नवाब के बंटवारे में इस्तेमाल किया गया है। यहां लक्ष्मी बाबु का तख्ता, गोमती प्रसाद का तख्ता, सोहन मिश्रा का तख्ता, सिताब लाल मंगल बाबु का तख्ता, मनहरण लाल का तख्ता हुआ करता था। अर्थात इनके अधीन कई-कई बिगहा जमीनें हुआ करती थी।



इनके तख्ते में था यह इलाका

सोहन मिश्रा के तख्ता में बालुगंज, मलाह टोली, डफाली टोली एवं बरादरी का हिस्सा आता था। सराय रोड सोलेने साहब के तख्ता के अधीन था। वे अंग्रेज थे। एक महिला भी ऐसी ही जमींदार थी। सभी ओझाइन का तख्ता के नाम से जानते थे। ओझाइन के तख्ता में माली टोला, जाट टोली का हिस्सा आता था। 



कारा नवाब नहीं गए थे पाकिस्तान


शहर में आम जानकारी यह है कि आजादी के समय जब देश का विभाजन हुआ तब कई लोग यहां से पाकिस्तान चले गये। इसमें कारा नवाब भी शामिल थे। कहा जाता है कि उस समय कारा नवाब ने अपना रिटर्न अर्थात अपनी अचल संपत्ति का और बसाये गये रैयतों का विवरण नहीं दिया था। लेकिन कारा नवाब हसन इमाम के पौत्र सैय्यद फरीद नुरू सईद कादरी बताते हैं कि यह तथ्य सही नहीं है कि कारा नवाब पाकिस्तान गए थे। हां, खानदान के लोग गए थे। बताया कि हसन इमाम और हुसैन इमाम दोनों भाई थे। दोनों की माता का नाम आयशा बीबी था। हुसैन इमाम पाकिस्तान भाग गए थे जब बंटवारा के वक्त दिल्ली में दंगा हो रहा था। वे तब दिल्ली रहते थे।