Wednesday, 12 April 2023

शहरीकरण हो रहा किंतु जन आकांक्षाएं रह गयी अधूरी



जितना हुआ हासिल उससे अधिक प्राप्त करने की आकांक्षा

सरकारी शिक्षा व स्वास्थ्य व्यवस्था का हाल बदतर

निजी विद्यालयों व अस्पतालों के भरोसे है आबादी

उपेंद्र काश्यप, दाउदनगर (औरंगाबाद) : शिक्षक प्रशिक्षण महाविद्यालय के एक भवन में अनुमंडल कार्यालय प्रारंभ हुआ था। शहरीकरण बढ़ा लेकिन कई मामलों में जन आकांक्षाएं पूरी नहीं हुई। बाद में नया भवन बना जिसमें अनुमंडल कार्यालय शिफ्ट हुआ। इसी परिसर में अनुमंडल व्यवहार न्यायालय और अन्य कार्यालय भी बना। अनुमंडल कार्यालय और न्यायालय के संदर्भ में भवनों की संख्या कम बताई जाती है। न्यायिक पद रिक्त हैं, और की जरूरत बताई जाती है। दाउदनगर नासरीगंज पुल बना। दाउदनगर-गया मार्ग चौड़ी हुई और अधिक चौड़ी करने की योजना है। लेकिन औरंगाबाद पटना मार्ग के चौड़ीकरण की शीघ्र आवश्यकता है। रेलवे लाइन से नहीं जोड़ने का गम सबको है। बड़े बड़े माल खुले, शहर का विस्तार हो रहा है, आवागमन का दबाव बढ़ रहा है। आवागमन को दुरुस्त करने, सड़कों पर दबाव कम करने का काम अभी तक अधूरा है। ओबरा, गोह और हसपुरा में पर्याप्त विकास नहीं हो सका है। यहां अब भी पिछड़ापन साफ-साफ दिखता है। बाजार में रौनक तो पूर्व की अपेक्षा बढ़ी, लेकिन उस अनुपात में संसाधन नहीं बढ़े। बाजार अतिक्रमण का शिकार है और आवागमन जितना अधिक बढ़ा उस अनुपात में सड़के चौड़ी नहीं की जा स्की। जाम की समस्या से परेशान हैं। इन तीनों प्रखंड मुख्यालयों में शहरीकरण की जरूरत है। तीनों ही अभी तक नगर निकाय नहीं बने हैं। स्वास्थ्य की सुविधाएं नहीं बढ़ी है। अनुमंडल अस्पताल इसी दौरान बना लेकिन प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र हो, अतिरिक्त प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र हो या उप स्वास्थ्य केंद्र हो, उनकी स्थिति नहीं सुधरी है। सरकारी शिक्षण संस्थानों का हाल बद से बदतर होता चला गया और नतीजा निजी शिक्षण संस्थानों ने आबादी को शिक्षित करने की जिम्मेदारी संभाली। 32 वर्ष की इस यात्रा में जितना हासिल हुआ उससे जन आकांक्षाएं तृप्त नहीं हुई। अभी और हासिल करना बाकी रह गया है।



उच्च शिक्षा की व्यवस्था नहीं हुई


डाक्टर शंभू शरण सिंह कहते हैं कि अनुमंडल की घोषणा का सबसे ज्यादा असर जन आकांक्षाओं पर पड़ा। विकास का आकांक्षी जनसमूह शहरीकरण की ओर इस बढ़ते कदम का खुद हिस्सा बना और अपनी बेहतरी के सपने देखने लगा। अनुमंडल बनने के साथ शिक्षा, स्वास्थ्य एवं अन्य सुविधाओं की चाह में लोग अनुमंडल मुख्यालय में बसे। अपनी क्षमता के अनुसार जमीन और घर की व्यवस्था की, लेकिन 32 साल पूरा होने के पश्चात शहर का जो स्वरूप होना चाहिए वह न हो सका। हालांकि सड़कें थोड़ी ठीक हुई। विद्युत व्यवस्था सुधरी। प्राथमिक, माध्यमिक स्तर की शिक्षा का प्रबंध हुआ लेकिन उच्च शिक्षा में कहीं कोई अच्छी व्यवस्था नहीं हुई। चिकित्सा के क्षेत्र में भी अपेक्षित विकास नहीं हुआ। प्लानिंग के तहत शहर को बसाने की बड़ी योजना नहीं बनी। ना अच्छा बस पड़ाव बना। टेंपु के लिए समुचित व्यवस्था नहीं हुई। आने वाले दिनों में हम यह उम्मीद कर सकते हैं कि जिन सपनों को मन में संजोकर लोग मुख्यालय में बसे हैं उनके सपनों को साकार करने को और बेहतर कोशिश की जाएगी और साथ ही जिला मुख्यालय के रूप में दाउदनगर स्थापित होगा।



समाजसेवी डा. प्रकाश चंद्रा ने कहा कि तुलनात्मक रूप से देखें तो औरंगाबाद जिला में जिला मुख्यालय के बाद सर्वाधिक विकास दाउदनगर का हुआ। अनुमंडल बनने से जो नई उम्मीद और आशा का संचार हुआ था कुछ हद तक पूरा हुआ। नए रेस्टोरेंट, होटल, ब्रांडेड शोरूम आये, शहर का विस्तार हुआ। जो भखरुआं 100 मीटर के दायरे में सिमटा रहता था वह दो किलोमीटर तक फैला। वाहनों की संख्या बढ़ी। यातायात का दबाव बढ़ा। आबादी बढ़ी। इससे कुछ मुश्किलें बढ़ी हैं। बाईपास होने से यातायात का दबाव कम हुआ है। शिक्षण संस्थान बढ़े। बेहतर परीक्षा परिणाम आने से गांव की बड़ी आबादी शहर में किराए के मकान में रहकर बच्चों को पढ़ा रही है। जिससे आबादी का दबाव बढ़ा। जीवन शैली बदली। अपने लिए घर बनाना मुश्किल हो गया। लेकिन नौकरियां जा रही हैं, बेरोजगारी है। आनलाइन और बड़े शोरूम के आने से छोटे दुकानदार परेशान हैं। जेल और अनुमंडल होने से मुकदमे के लिए जिला आना-जाना लोगों का कम हुआ लेकिन घर में ही सुविधाएं बढ़ने से प्रशासन और कानून का भय भी लोगों में कम हुआ है।

योजना के फेर में तोड़ दिया घर, अब रह रहे किराए पर

 जागरण आपके द्वार : वार्ड संख्या नौ का हाल 



16 सड़कें नहीं बन सकी पक्की, रह गई कच्ची 

वार्ड संख्या नौ में आवास योजना के तहत हुआ था 78 व्यक्ति का चयन 

नहीं बन सका किसी का भी पूरा घर

दाउदनगर (औरंगाबाद) : वार्ड संख्या नौ का बड़ा बुरा हाल है। प्रधानमंत्री शहरी आवास योजना के तहत 78 लाभुकों का चयन किया गया था। जिसमें लगभग 60 व्यक्ति को ही प्रथम किस्त मिल सका, जबकि दो व्यक्ति ऐसे हैं जिन्हें दूसरी किस्त भी मिली है। तमाम लोगों ने अपना पहले तो घर तोड़ दिया और अब पैसे के अभाव में घर बना नहीं पा रहे हैं। नतीजा यह है कि सभी लोग 1000 रुपये से 3000 मासिक किराया देकर किराए पर मकान लेकर रह रहे हैं। आक्रोश इतना है कि कभी भी लोग प्रदर्शन करने उतर सकते हैं। दूसरी बड़ी समस्या यह है कि इस वार्ड की 16 सड़कें ऐसी हैं जो कच्ची ही रह गई। निर्माण नहीं हो सका। यह वार्ड पुरानी शहर इलाके में है। छत्तर दरवाजा से किला तक जो सड़क गई है वह अतिक्रमण का शिकार है। नाली जाम रहता है। लोगों को इससे परेशानी हो रही है। वार्ड पार्षद प्रतिनिधि अमित कुमार ने बताया कि दो दर्जन से अधिक ऐसे लोग हैं जिनको शौचालय योजना का भी दूसरी किस्त नहीं मिला है। कई लोगों का नाम राशन कार्ड में छूट गया है।



वार्ड में मतदान केन्द्र नहीं


विवेकानंद मिश्रा कहते हैं कि वार्ड संख्या नौ के मतदाताओं के लिए मतदान केंद्र इस वार्ड में नहीं है। लोकसभा और विधानसभा तो लोग दूसरे के वार्ड में जाकर मतदान करते हैं। पर जब वार्ड का चुनाव आता है तो चलंत बूथ भी बनाया जाता है। वार्ड में मतदान केंद्र हो जाए तो सबको काफी सहूलियत होगी। दूसरे इस वार्ड में जोड़ा मंदिर के आसपास नल जल योजना का लाभ आज तक नहीं मिला। नल तो लगा है पर पानी गायब है। वार्ड पार्षद की पहल पर भी कोई सुनवाई नहीं हुई।



अतिक्रमण से बनी रहती है दुर्घटना की आशंका 


आरटीआई एक्टिविस्ट रहे श्रीनिवास कहते हैं कि मुख्य पथ के नाली का चौड़ीकरण अति आवश्यक है। इसके साथ ही मुख्य पथ पर लकड़ी रखकर अतिक्रमण कर लिया गया है। जिससे दुर्घटना की आशंका बनी रहती है। इसे हटाने का कभी प्रयास नहीं किया जा रहा है। मुख्य पथ पर गंदगी रहती है। नाली जाम रहता है जिससे भी समस्या है।



एक इंच भी नहीं बनी पक्की सड़क


सामाजिक कार्यकर्ता सत्येंद्र पासवान कहते हैं कि पासवान टोली मोहल्ला में एक इंच भी पक्की सड़क नहीं बनी। जबकि यहां लगभग ढाई सौ की आबादी रहती है। बताया कि राजेंद्र भगत के घर से पासवान टोली तक और पासवान टोली में कहीं पक्की सड़क नहीं बनी। लगभग 75 प्रतिशत नाली नहीं बनाया गया है। मात्र लगभग 25 प्रतिशत नाली का निर्माण हुआ है। प्राथमिक विद्यालय और सामुदायिक भवन की मोहल्ले में आवश्यकता है।



सही जगह नहीं है डस्टबिन 


कृष्ण मुरारी शर्मा कहते हैं कि जहां डस्टबिन होना चाहिए वहां नहीं रखा रहता है। सही जगह डस्टबिन रखा जाना चाहिए। जहां सफाई रहती है वहीं सफाई होती रहती है, जबकि जिस गली और मोहल्ले में कचरा लगा रहता है वहां सफाई नहीं होती। नालियों की पटिया टूट गई है। वह भी नहीं बन रहा है। जिससे आवागमन मुश्किल हो रहा है। आपसी सहयोग से लोगों को पटिया लगाना पड़ रहा है।



विकास के लिए किया हर काम 


वार्ड पार्षद सुमित्रा साव कहती हैं कि उन्होंने वार्ड के विकास के लिए लगातार प्रयास किया। आवास योजना को स्वीकृत कराया। प्रथम व द्वितीय किस्त दिलाने का प्रयास किया। सात नली गली का पीसीसी निर्माण करवाया। कई गलियों में नाली में पाइप लगाकर आवागमन को सुगम बनाया। सामाजिक सुरक्षा पेंशन अधिक से अधिक लोगों को दिलाने का काम किया। पारिवारिक लाभ की राशि दिलवाई। गली-गली में विद्युत खंभा लगाया और स्ट्रीट लाइट लगाया ताकि रोशनी की पर्याप्त सुविधा उपलब्ध हो सके।



राजनीतिक विशेषता 

वार्ड संख्या नौ की राजनीतिक विशेषता यह है कि यहां पति और पत्नी दोनों वार्ड पार्षद रहे हैं। जब वर्ष 2002 में नगर पंचायत का चुनाव प्रारंभ हुआ था तब अधिवक्ता ललन प्रसाद सिंह वार्ड पार्षद बने और वर्ष 2007 में सुनैना देवी वार्ड पार्षद बनी। जिनके पति अटल बिहारी वाजपेई भाजपा की राजनीति में सक्रिय हैं। जब 2012 में चुनाव हुआ तो पूर्व वार्ड पार्षद ललन प्रसाद सिंह की पत्नी मंजू देवी वार्ड पार्षद बनीं। वर्ष 2017 में चुनाव नहीं हुआ और 2018 में नगर परिषद के रूप में पहली बार जब चुनाव हुआ तो सुमित्रा साव वार्ड पार्षद बनी। 



प्रमुख मोहल्ला :- कुरमीटोला, पासवान टोली, अंजान शहीद, तकिया मल्लाह टोली


 प्रमुख स्थान : जोड़ा मंदिर, चर्च, पुराना शहर स्थित जीमूतवाहन भगवान चौक, पासवान टोली में महावीर मंदिर, सोनटतीय काली स्थान, प्लेग देवी मंदिर




Sunday, 9 April 2023

तीन दशक में अनुमंडल की आबादी हो गयी दोगुनी



1991 में हुआ था दाउदनगर अनुमंडल का गठन 

515596 थी वर्ष 1991 में अनुमंडल की आबादी 

1018051 लोग अब रहने लगे 2023 में

उपेंद्र कश्यप, दाउदनगर (औरंगाबाद) : दाउदनगर अनुमंडल का गठन हुए 32 वर्ष हो गए। इस यात्रा में आबादी लगभग दोगुनी हो गई लेकिन जन आकांक्षा अधूरी रह गई। मामला मानव संसाधन का हो या भौतिक संसाधनों का, जनाकांक्षा तो पूरी कतई नहीं हुई। जब वर्ष 1991 में 31 मार्च को दाउदनगर के अनुमंडल गठन की घोषणा की गई थी तब 515596 लोग रहते थे। वर्ष 2023 में जो जातीय सर्वेक्षण हो रहा है उसके मुताबिक 1018051 लोग इस अनुमंडल में रहने लगे हैं। इन 32 वर्षों में 502455 लोग बढ़े। यानी आबादी लगभग दोगुनी हो गई। लेकिन इस मुताबिक संसाधन दुगनी नहीं हुई। वर्ष 1991 में दाउदनगर प्रखंड से अनुमंडल बना था। तब इसकी आबादी 515596 थी। अनुमंडल बनने के समय नक्सलवादी गतिविधिया चरम पर थीं। इस कारण पिछडे़ इस इलाके में शिक्षा और प्रशासनिक विकास की गति तेज हुई तो ग्रामीण इलाके से बड़ी आबादी नये बने और खुद को गढ़ने में व्यस्त रहे शहर की ओर आयी। इससे शहरी क्षेत्र की आबादी काफी बढ़ी। 1991 में नगरपालिका क्षेत्र की आबादी 30331 थी जो 2001 में बढ़कर 38014 हो गई। और 2011 में 52340 है। वर्ष 2001 से 2011 के दशक में 27.89 फीसद आबादी बढ़ी, जबकि 1991 से 2001 के दशक में यह वृद्धि दर 25.77 रही है। 2001 की जनगणना के अनुसार अनुमंडल के सभी चार प्रखंड गोह, हसपुरा, ओबरा और दाउदनगर की कुल आबादी 776987 है। इसके अतिरिक्त नगर पंचायत की आबादी 52340 है। अर्थात कुल 829329 है। इसमें ओबरा की 226379, दाउदनगर की 154225, हसपुरा की 160475 एवं गोह की 235908 और नगर पंचायत की आबादी 52340 है। वर्ष 2001-2011 के दशक में यह वृद्धि दर रही 37.68 फीसद रही। इस तरह आने वाले दशकों में जनसंख्या वृद्धि से विकास को होड़ लेने की आवश्यकता होगी।





बोलते तथ्य :


2011 के मुकाबले 2023 में दाउदनगर प्रखंड के ग्रामीण इलाकों में यानी दाउदनगर के 15 पंचायतों में कुल 42142 की आबादी बढ़ी है। 2011 की जनगणना के अनुसार 154490 आबादी थी।



दाउदनगर नगर परिषद की आबादी जातीय सर्वे में 65543 बताई गई है। 2011 में शहर की आबादी 52364 थी। यानी लगभग एक दशक में 13179 लोग शहर में बढ़े। प्रतिशत में यह आंकड़ा 20.10 आता है।



2011 में हुए जनगणना के अनुसार 226007 लोग ओबरा में रहते थे। लेकिन जातीय सर्वे के अनुसार अब 272901 लोग रहते हैं।


हसपुरा प्रखंड में 2011 में कुल आबादी 160820 थी। नई जातीय सर्वे के अनुसार अब यहां 198761 लोग रहते हैं।



गोह प्रखंड में 2011 की जनगणना के अनुसार आबादी 234400 थी। अब 284214 लोग यहां रहते हैं।



Wednesday, 5 April 2023

स्वास्थ्य प्रबंधक कक्ष अब मिला प्रभारी को

 


स्वास्थ सेवाओं को सुदृढ़ बनाने की जरूरत

जागरण प्रभाव


दाउदनगर (औरंगाबाद) : प्राथमिक स्वास्थ केंद्र में प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी डा.शिवशंकर झा ने चिकित्सकों एवं स्वास्थ प्रबंधक के साथ बुधवार को बैठक की। चिकित्सा पदाधिकारी के चैंबर के अभाव पर चर्चा की गई। बताया गया कि स्वास्थ्य प्रबंधक के कक्ष को चिकित्सा पदाधिकारी के लिए दे दिया गया है। जो भी कमियां है ,उसे दूर करने का पूरा प्रयास किया जा रहा है, ताकि आम जनता को बेहतर तरीके से स्वास्थ सेवाओं का लाभ मिल सके। मालूम हो कि गत तीन अप्रैल को ही दैनिक जागरण ने रात का रिपोर्टर अभियान के तहत इस संबंध में एक रिपोर्ट प्रकाशित की थी और बताया था कि चिकित्सकों में इस बात को लेकर असंतोष है कि उनके लिए कोई कक्ष नहीं है और ना ही प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी के लिए कोई कक्ष है, जबकि स्वास्थ्य प्रबंधक के लिए कक्ष है। तब रात्रि में डियूटी लर रहे चिकित्सा पदाधिकारी डा. अनमोल कुमार ने इस मुद्दे पर असंतोष व्यक्त किया था। बैठक में प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र की स्वास्थ्य व्यवस्था पर विस्तार पूर्वक चर्चा की गई और स्वास्थ सेवाओं को सुदृढ़ बनाने पर बल दिया गया। प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी ने कहा कि आपस में समन्वय बनाकर कार्य करना है। स्वास्थ सेवाओं का लाभ सही तरीके से आम जनता को मिलना चाहिए। जो भी कमियां है, उसे दूर करनी है। मरीजों को नाश्ता खाना समय से मिलना चाहिए। मौके पर चिकित्सा पदाधिकारी डा. यतीन्द्र कुमार सिंह, डा. आलोक कुमार, डा. अनमोल कुमार, डा.अनिल कुमार, डा.ज्योति, स्वास्थ प्रबंधक आयुषी अश्विनी वर्मा उपस्थित रहे।

जनता के विरोध के कारण नहीं बिछा नल जल योजना का पाइप लाइन

 जागरण आपके द्वार : वार्ड संख्या आठ का हाल 



कोई बड़ी समस्या नहीं, सिर्फ दो जगह टूटी है हुई है सड़क 

कूड़ा दान रखने की जगह तय नहीं


दाउदनगर (औरंगाबाद) : वार्ड संख्या आठ में आमतौर पर कोई समस्या नहीं है। गली, नली व सड़कें बनी हुई हैं। स्ट्रीट लाइट लगे हुए हैं। लेकिन कुछ मोहल्ले ऐसे हैं जहां की सड़कें टूटी हुई हैं। कुछ स्ट्रीट लाइट ऐसे हैं जो खराब हैं। खराब स्ट्रीट लाइट को बनाने में काफी वक्त लगता है या नहीं बन पाता है। सफाई की कोई समस्या नहीं है। एक शिकायत यह भी है कि वार्ड पार्षद कम लोगों की सुनते हैं। वार्ड पार्षद हसीना खातून बताती हैं कि वार्ड में कोई समस्या नहीं है। लेकिन जरूरत यह है कि स्वास्थ्य केंद्र होता तो और बेहतर होता। मालूम हो कि वार्ड संख्या आठ के नजदीक में ही प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र है। इस वार्ड में नल जल योजना कहीं नहीं दिखती। वार्ड पार्षद हसीना खातून ने बताया कि जनता के विरोध के कारण यहां नल जल के पाइप नहीं बिछाए गए। जनता का कहना था कि जब तक सामग्री पूरी तरह नहीं आ जाएगा पीसीसी पथ काटने नहीं देंगे। क्योंकि प्रायः सड़क काट कर छोड़ दी जाती हैं और फिर नल जल योजना काम भी नहीं करता।



दो जगह टूटी हुई है सड़क 

पूर्व वार्ड पार्षद कुशा यादव ने बताया कि कोई समस्या नहीं है। अहिर टोली की सड़क वार्ड संख्या सात और आठ के बीच गुजरती है। विधायक निधि से यह सड़क बहुत पहले बनी थी। लेकिन महावीर स्थान और पन्नू यादव के घर के पास 100 - 100 फीट सड़क लगभग टूटी हुई है। इसको बनाया जाना चाहिए।



कूड़ा के लिए नप, कर्मी से अधिक नागरिक जिम्मेदार


डा.जाहिद हुसैन कहते हैं कि गली बनी हुई है, गुणवत्ता चाहे जैसी हो। लेकिन नाली के मामले में लीपापोती की गई है। इब्राहिम शहीद मोहल्ला में मजार के पास पुराने नाले पर ही नया नाला ढाल दिया गया। कीचड़ से मुक्ति मिली है लेकिन कूड़ा दान का स्थान मुकर्रर नहीं है। मोहल्ले में जहां कहीं भी कचरा है उसके लिए नगर परिषद या सफाई कर्मी से अधिक नागरिक जिम्मेदार हैं जो कूड़ा को नाली में या दरवाजे पर फेंक देते हैं।



सफाई और रौशनी की व्यवस्था दुरुस्त 


सेवानिवृत्त शिक्षक महेंद्र प्रसाद गुप्ता बताते हैं कि कोई समस्या नहीं है। नली गली का निर्माण हुआ है। रोशनी का प्रबंध किया गया है। वार्ड पार्षद की सक्रियता बनी रहती है। जनता की भी नहीं सुनते हैं। जनहित में सक्रिय हैं। सफाई ठीक रहती है।



किसी की नहीं सुनते वार्ड पार्षद 


नालबंद टोली निवासी प्रमोद कुमार कहते हैं कि वार्ड पार्षद किसी की सुनते नहीं। एक तो पार्षद महिला हैं, इस कारण उनसे भेंट करना मुश्किल है। अपनी बात रखने का कोई लाभ नहीं। क्योंकि कोई सुनवाई नहीं होती है। स्ट्रीट लाइट खराब है, लेकिन कहने का साहस नहीं कर पाता। क्योंकि वार्ड पार्षद सुनेंगे नहीं, ऐसा विश्वास है। सफाई कर्मी कम इस्तेमाल किए जाते हैं। कचरा लगा रहता है। जन वितरण प्रणाली का लाभ लेने से कई लोगों को जानबूझकर वंचित कर दिया गया।




10 वर्ष में पीसीसी नाली, गली, बिजली किया दुरुस्त 


वार्ड पार्षद हसीना खातून कहती हैं कि बीते 10 वर्ष में सभी नाली गली को पीसीसी बना दिया। विद्युत खंभे लगाए, बल्ब लगाए। 20 कालोनी स्वीकृत कराया। व्यक्तिगत शौचालय बनवाया। जनता के विरोध के कारण नल जल का पाइप लाइन नहीं बिछाया जा सका। जनता के सुख दुख में बराबर शरीक रहा।



अब तक के वार्ड पार्षद 

नगर पंचायत दाउदनगर के 2002 में कुशा यादव, 2007 में सोनी देवी और 2012 में हसीना खातून वार्ड पार्षद बने। वर्ष 2018 में जब नगर परिषद में नगर पंचायत उत्क्रमित हुआ तो पुनः हसीना खातून नगर परिषद की पहली बार पार्षद बनी।



 प्रमुख मोहल्ला -

नालबंद टोली, इब्राहिम शहीद, यादव टोली, गोस्वामी टोली, अंजान शहीद, मेस्तर टोली


Sunday, 2 April 2023

10 घंटे की परेशानी और पैरवी पर हुआ आपरेशन

 




नहीं बचाया जा सका नवजात 

डबल एमएस चिकित्सक सामान्य चिकित्सक के पद पर कार्यरत 

डाक्टर को काम करने लायक माहौल उपलब्ध नहीं 

पीएचसी की बदतर स्थिति 

भय के साए में रात में रहते हैं चिकित्सक व अन्य स्वास्थ्य कर्मी

दाउदनगर (औरंगाबाद) : रात करीब 10:30 बजे। अनुमंडल अस्पताल जाने के मुख्य रास्ते में अंधेरा का साया। प्रखंड सह अंचल कार्यालय होकर जाने में ही मिलती है रोशनी। मुख्य मार्ग से जाने में बंदरों के हमले के साथ अपराध का शिकार होने का भी सताता है डर। जब अनुमंडल अस्पताल यह संवाददाता रात्रि में पहुंचा तो कुछ लोग इधर-उधर परेशान हाल में दिखे। तरार टोला मिसिर बिगहा की शारदा देवी के प्रसव का आपरेशन चल रहा था। इनके ससुर मुनारीक यादव ने बताया कि सुबह लगभग 10:00 बजे अस्पताल पहुंचे। जांच में बच्चा ठीक स्थिति में बताया गया। काफी प्रयास किया लेकिन पहले टाला गया। अस्पताल द्वारा यह प्रयास किया गया कि आपरेशन न करना पड़े। लेकिन मजबूरी में रहना था। बताया कि राजद नेता सुमित यादव को बुलाया। उन्होंने डाक्टर से बात की। एक शिक्षक से पैरवी करवाया। विधायक तक बात पहुंचाई गई। तब जाकर रात्रि लगभग 9:00 बजे आपरेशन से प्रसव कराया गया। लेकिन बच्चा मृत है, इसकी जानकारी लगभग दो घंटे बाद दी गई। आरोप लगाया कि कमाने के उद्देश्य से बाजार से पांच हजार का एक इंजेक्शन मंगवाया गया। 


पहले भी लग चुका है आरोप

 शारदा देवी का आपरेशन डा गयानंद चौपाल ने किया। उन पर पहले भी बाजार से दवा मंगा कर आपरेशन करने का आरोप लगता रहा है। लिखित शिकायत के बाद एक बार एक माह के लिए आपरेशन करने पर रोक लगाया गया था।


आंतरिक राजनीति का शिकार है एसडीएच 

पूरे मामले में डा. गयानंद चौपाल ने बताया कि आंतरिक राजनीति का शिकार है अनुमंडल अस्पताल। कहा कि वे डबल एमएस हैं। लेकिन 2001 में जब उनको नौकरी लगी थी तब वह एमबीबीएस के साधारण चिकित्सक के रूप में पदस्थापित हैं। उनको आपरेशन करने से रोका जाता है। विभाग से सर्जरी के लिए उनको अनुमति प्राप्त नहीं है। लेकिन चूंकि वे एमएस हैं इसलिए मरीजों के हित में आपरेशन करते हैं। उन्होंने कहा कि 5000 का एक एंटीबायोटिक क्रय करना स्वाभाविक रूप से लोगों को स्वीकार करना चाहिए। आखिर यह एंटीबायोटिक इंजेक्शन मरीज के शरीर में डाला जाता है ताकि किसी भी तरह का कोई इंफेक्शन न हो।



प्रभारी और चिकित्सकों के बैठने के लिए कक्ष नहीं 

समय 9:45 बजे। दाउदनगर-बारुण रोड के किनारे स्थित प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में सन्नाटा है। अंदर जाने पर कुछ स्वास्थ्य कर्मी बैठे दिखे। जिसमें डाक्टर अनमोल कुमार के अलावा एंबुलेंस चालक किशोर कुमार सिंह, सुरक्षा प्रहरी राम विजय सिंह एवं जमुना सिंह, एएनएम रजन्ति कुमारी एवं आशा कुमारी चतुर्थवर्गीय कर्मी प्रहलाद राम, एंबुलेंस के सह चालक अरविंद कुमार दिखे। पूरे अस्पताल में मात्र दाउदनगर के वार्ड संख्या नौ की अर्चना कुमारी का प्रसव हुआ है। रात्रि में पीएचसी में क्या समस्या आती है, इस सवाल के जवाब में डा. अनमोल कुमार ने जो दिखलाया उससे यह साफ है कि चिकित्सकों को काम करने लायक माहौल भी उपलब्ध नहीं है और भय के साए में उनको अपनी ड्यूटी निभानी पड़ती है। चार दिवारी का अभाव है। नतीजा चिकित्सकों और स्वास्थ्य कर्मियों को भय सताता है कि कभी भी कोई भी व्यक्ति आकर उन्हें अपमानित कर सकता है, उनके साथ बदतमीजी कर सकता है, मारपीट कर सकता है। और ऐसा पहले हो चुका है। इस कारण चिकित्सक भय में जीते हैं। डाक्टर ने बताया कि यहां प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी या अन्य चिकित्सकों के लिए कोई कक्ष नहीं है। अब रात्रि ड्यूटी करते समय सोने के लिए भी किसी तरह संघर्ष कर एक कमरे को बैठने लायक बनाया है। जिसमें चिकित्सक को सोना पड़ता है। बताया कि वाशरूम में फ्लैश शुरू से ही नहीं है। अस्पताल में एक्सरे देखने के लिए एक्सरे व्यू बाक्स खराब है। इस कारण 25 से 30 मरीज प्रतिदिन ओपीडी में कम आने लगे हैं। टीवी के मरीज को देखना मुश्किल होता है। यहां एक्सरे बंद है। इसलिए अनुमंडल अस्पताल से सहयोग लिया जाता है। बताया कि प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी डा. शिव शंकर झा शहर में ही हैं। आन काल उपलब्ध रहते हैं। पीएचसी में असुविधा के बीच जनता को सुविधा देने को चिकित्सक बाध्य हैं। 



24 घण्टे डियूटी करना यहां कठीन

डा.अनमोल कुमार को 24 घंटे की ड्यूटी करनी पड़ी। बताया कि सुबह 8:00 बजे से 2:00 बजे तक वह ओपीडी में मरीजों को देखे। इसके बाद 2:00 बजे से रात्रि 8:00 बजे तक इमरजेंसी ड्यूटी लगी और फिर रात्रि 8:00 बजे से सुबह 8:00 बजे तक उनको नाइट ड्यूटी में लगाया गया। यानी लगातार 24 घंटे उन्होंने ड्यूटी की और वह भी तब जब काम करने का बेहतर माहौल नहीं है। उन्होंने कहा कि किसी के साथ बैठकर हम कहां बात कर सकते हैं। क्या वे किसी से मिलना चाहें तो उसको बेडरूम में ले जाएंगे, या फिर खुले आसमान के नीचे या चबूतरे पर कहीं बैठकर बातचीत करनी होती है। ऐसे में काम करना कितना मुश्किल है समझा जा सकता है।







मराठी ताने-बाने में उतरी महिलाएं, देखते बन रहा था जोश और जज्बा

 


जिंदा सर्पों के साथ आकर्षक बना तांडव नृत्य

दाउदनगर (औरंगाबाद) : 

रामनवमी की शोभायात्रा रविवार को शहर में श्री रामचरित मानस यज्ञ समिति के बैनर तले निकली। लगभग एक किलोमीटर लंबी शोभायात्रा में गजब का आकर्षण था। पहली बार दाउदनगर की शोभायात्रा में बड़े पैमाने पर महिलाएं शामिल हुई। नारी शक्ति का प्रतीक मराठा ताने-बाने में दर्जनों महिलाएं दिखीं। जिसमें रिया, शिवानी, शिफाली, रुचि, शालिनी, खुशी, अंजली, प्रिया, सोनल, खुशी, श्रेया एवं अन्य शामिल थे। महिलाओं ने मराठा नथ पहन रखा था और पगड़ी गमछे तलवार तिरंगा उनके हाथों में शोभायमान लग लग रहे थे। इस बार की नगर शोभायात्रा में यह पहला अवसर था। इतिहास रचा गया। इसके अलावा जीवित सर्पों के साथ तांडव नृत्य काफी आकर्षक लगा। लोग काफी प्रभावित हो रहे थे। इस बार की शोभायात्रा में यह भी एक खास आकर्षण का केंद्र बना रहा।


श्रीराम से जुड़े गानों पर लगभग 10 घंटे थिरकते रहे श्रद्धालु 

भव्य रामनवमी शोभायात्रा में झांकियों की भरमार

 हनुमान मंदिर बाजार से शोभायात्रा निकली। शहर के विभिन्न मार्गो से गुजरी। लगभग 10 घंटे तक श्री राम से जुड़े तमाम तरह के भक्ति गीतों पर लोग थिरकते रहे। इस शोभायात्रा में दर्जनों झांकियां आकर्षण का केंद्र रहे। राधा कृष्ण का नृत्य लेकर साहिर सुनील नंदिता, विकास दीपक कुमार की टीम आकर्षक लगे। शंकर दूत में परदेसी, कृष्ण के रूप में विशाल कुमार, महाराणा प्रताप, झांसी की रानी की झांकियां काफी आकर्षक रही। मासूम बच्ची निष्ठी राधा और राहुल कृष्ण के रूप में काफी आकर्षक लगे। शोभायात्रा का नेतृत्व रामचरितमानस यज्ञ समिति के अध्यक्ष अटल बिहारी बाजपेई, नाथू प्रसाद, पप्पू गुप्ता, सुनील केसरी एवं अन्य ने किया।



महिलाओं और बच्चों को प्रेरित करती दिखी एसडीएम

एसडीओ कुमारी अनुपम सिंह बच्चों और महिलाओं को काफी प्रेरित करती दिखीं। दरवाजे पर खड़ी होकर शोभायात्रा देखने वाली महिलाओं को बुलाकर फोटो खिंचवाया, उनको प्रेरित किया। राधा बनी निष्ठा को गोद में उठा लिया। झांकी बने बच्चों को हिदायत दी कि हमेशा पानी पीते रहें, कुछ ना कुछ खाते रहें, ताकि उनकी उर्जा बनी रहे। युवाओं को उन्होंने प्रेरित किया और बुला बुला कर कहा कि हमारी संस्कृति है, हमारा यह पर्व है इसे अच्छे से मनाना है। शांति के साथ उत्साह को प्रदर्शित करना है।



कई जगह किया गया सम्मानित 

दुर्गा क्लब और नगर परिषद के पास दर्जनों व्यक्तियों व कलाकारों को सम्मानित किया गया। हिंदू मुस्लिम का यहां कोई भेद नहीं दिखा। भाईचारा साफ-साफ दिखा। नगर परिषद कार्यालय के पास मुख्य पार्षद प्रतिनिधि कौशलेन्द्र कुमार सिंह के साथ आमीन अनवर फहीम, गुलाम रहबर, वार्ड पार्षद सोहेल अंसारी एवं तारक अंसारी ने लोगों को शरबत पिलाया। अंग वस्त्र देकर सम्मानित किया। इनके साथ अन्य लोग भी सक्रिय रहे।



हर 200 मीटर पर खाने पीने की व्यवस्था 

शोभा यात्रा की लगभग पांच किलोमीटर की यात्रा में प्रायः 200 मीटर पर कुछ ना कुछ खाने पीने की व्यवस्था विभिन्न समूह द्वारा किया गया। पहला स्थान चावल बाजार बना जहां सेवा समिति के युवाओं द्वारा करीब 8000 लोगों के भोजन की व्यवस्था की गई। विकास कुमार, संदीप कुमार, जयप्रकाश कुमार, दिलीप, सोनू, मनु, शिव कुमार, ज्योति कुमार, राजा कुमार, गोलू कुमार, चंदन कुमार, मुन्ना कुमार एवं अन्य ने बताया कि लगभग 10000 लोगों ने भोजन किया। इसके अलावा दर्जनों स्थानों पर खीरा, मुरब्बा, शरबत, अंगूर एवं अन्य तरह के खाद्य पदार्थों का इंतजाम किया गया था।



चाक-चौबंद रही सुरक्षा व्यवस्था

रामनवमी शोभा यात्रा को शांतिपूर्ण संपन्न कराने के लिए सुरक्षा व्यवस्था दुरुस्त रही। शोभायात्रा के आगे एसडीपीओ कुमार ऋषिराज एवं अपर एसडीओ प्रियव्रत रंजन रहे, जबकि सबसे पीछे एसडीएम कुमारी अनुपम सिंह और अन्य पुलिस पदाधिकारी रहे। शोभा यात्रा की सुरक्षा में दाउदनगर के तमाम पदाधिकारी डीसीएलआर संजय कुमार, पुलिस इंस्पेक्टर पवन कुमार, बीडीओ योगेंद्र पासवान, सीओ मनोज कुमार, थाना अध्यक्ष गुफरान अली के अलावा जिला से आए एडीएम आशीष सिन्हा, मुख्यालय एसडीपीओ नव वैभव, मेजर देवानंद रावत, नगर परिषद के कार्यपालक पदाधिकारी संजय उपाध्याय, वरीय उप समाहर्ता कृष्ण कुमार, मनीष कुमार एवं फतेह फैयाज, मृदा संरक्षण विभाग के असिस्टेंट डायरेक्टर रवी शंकर, डीसीएलआर औरंगाबाद, पीजीआरओ, डीपीओ, देवकुंड एवं खुदवां के थाना अध्यक्ष समेत अनुमंडल के सभी थानों से पदाधिकारी सुरक्षा व्यवस्था में लगे रहे तमाम स्थानों को चिन्हित स्थानों पर दंडाधिकारी और पुलिस पदाधिकारी उपस्थित रहे





 शहनाज अख्तर के भजन व झांकियों ने मोहा मन

वृंदावन की झांकियां आकर्षक


संवाद सहयोगी, दाउदनगर (औरंगाबाद) : शमशेरनगर मकबरा मैदान पर रविवार को शहनाज अख्तर का कार्यक्रम हुआ। कई घंटे तक उनके और वृंदावन की आयी टीम द्वारा झांकियों की प्रस्तुति दी गयी। शहनाज का मंच पर मुन्ना शर्मा, रंगेश शर्मा, बलराम गुप्ता एवं अन्य ने स्वागत किया। फिर इसके बाद मोहित यादव ने गणेश वंदना से कार्यक्रम का आगाज किया गया। जिसे गाया इनकी ही टीम के मोहित यादव ने। फिर लगातार कई गीत शहनाज ने प्रस्तुत किया। भोजपुरी में भी भजन प्रस्तुत किया। कांग्रेस नेता अरविंद शर्मा, प्रखण्ड अध्यक्ष राजेश्वर सिंह, अभिनव शर्मा एवं अन्य उपस्थित रहे। वृंदावन की टीम द्वारा कृष्ण-राधा, शिव-पार्वती व महाबली की प्रस्तुति दी गयी। देर रात तक कार्यक्रम चला।