Sunday, 5 February 2023

37941 लोग बढ़े बीते एक दशक में हसपुरा प्रखंड में

 


सबसे बड़े पंचायत अमझर शरीफ की आबादी 19054 

सबसे छोटा पंचायत पूरहरा की आबादी 11405 

2011 में थी कुल आबादी 160820 उपेंद्र कश्यप, दाउदनगर (औरंगाबाद) : अनुमंडल के हसपुरा प्रखंड की आबादी बीते एक दशक में 37941 बढ़ गई। यहां 2011 में कुल आबादी 160820 थी। नई जातीय जनगणना के अनुसार अब यहां 198761 लोग रहते हैं। हसपुरा में सबसे बड़ा पंचायत अमझर शरीफ है। यहां की आबादी 19054 है। जबकि सबसे छोटा पंचायत पूरहरा है जिसकी आबादी 11405 है। इस प्रखंड में कुल पंचायत 14 है जबकि वार्ड 197 हैं। जनगणना के लिए इतने ही गणना ब्लाक बनाए गए थे। इस पंचायत में 26748 भवन है। जबकि 28947 मकान हैं। 38787 परिवार रहते हैं जिनकी कुल आबादी 198761 है।


पंचायत वार विवरण 


पंचायत- कुल गणना ब्लाक- कुल भवन- कुल मकान- कुल परिवार- परिवार के कुल सदस्य 

अहियापुर- 13- 1672- 1813- 2294- 12558 

अमझर शरीफ- 14- 2555- 2680- 3743- 19054 

धुसरी- 14- 1769- 1862- 2689- 13543 

डींडीर-16- 2153- 2430- 2820- 15887 

डुमरा- 14- 1642- 1846- 2549- 12721 

हसपुरा- 17- 2143- 2375- 3246- 16675 

इटवां- 15- 1998- 2147- 2735- 14180 

जैतपुर- 13- 1895- 2045- 2696- 13764 

कोइलवां- 13- 1717- 1837- 2206- 12780 

मल्हारा- 14- 1849- 1933- 2719- 14144 

पीरु- 14- 1753- 1886- 2588- 13892 

पुरहरा- 11- 1578- 1640- 2316 11405 

सोनहथु- 13- 1801- 2011- 2656- 13604 

टाल- 16- 2173- 2442- 3530- 15554 

कुल- 197- 26748- 28947- 38787- 198761




2011 की जनगणना के आंकड़े

कुल आबादी -160820 

पुरूष- 83350 

महिला-77470 

कुल परिवार-26945 

औसत लिंगानुपात 929 

कुल साक्षरता दर- 71.46 प्रतिशत 

पुरुष साक्षरता दर- 66.94 प्रतिशत

महिला साक्षरता दर- 49.64 प्रतिशत

शहरी आबादी- 4.9 प्रतिशत

ग्रामीण आबादी-95.1 प्रतिशत

शहरी क्षेत्रों में औसत साक्षरता दर 83.8 प्रतिशत

ग्रामीण क्षेत्रों में साक्षरता दर 70.8 प्रतिशत


Saturday, 4 February 2023

किसी को भी गुटखा खाते देखते हैं तो निकल जाती है आंख से आंसू

 कैंसर दिवस पर विशेष रिपोर्ट


 


कैंसर पीड़ित की अपील- छोड़ दें जहर खाना 

बेकार हो जाती है जिंदगी, दो बार कराना पड़ा जबड़े का आपरेशन 

उपेंद्र कश्यप, दाउदनगर (औरंगाबाद) : शहर के वार्ड संख्या 20 पटवाटोली में रहते हैं छोटू कुमार। युवा हैं और कैंसर से पीड़ित होने के बाद जिंदगी को अपनी पटरी पर लाने में कामयाब रहे। उनको कैंसर गुटखा खाने से हुआ। बताते हैं कि खैनी खाते-खाते एक दिन गुटखा खा लिया तो जबड़े में जख्म हो गया। समझा कि किसी तरह कट गया होगा। दवा लेता रहा। इलाज कराता रहा लेकिन ठीक नहीं हुआ। ऐसे में एक बार महावीर कैंसर संस्थान जाकर दिखाने की सलाह किसी ने दी फिर रिश्तेदार से मिलकर बनारस में जांच कराया तो पता चला कि कैंसर हो गया है। आपरेशन कराया फिर सेंकाई कराई। पूरा ठीक भी नहीं हुआ था कि फिर दोबारा जख्म गहरा हो गया ।जबड़े के आपरेशन के लिए मांस जांघ से काट कर लिया डाक्टरों ने और फिर जबड़े को दुरुस्त किया। दो बार कैंसर के आपरेशन में करीब पांच लाख रुपये खर्च हो गया। अब छोटू बताते हैं कि किसी को खैनी गुटखा खाते देखते हैं तो आंख से आंसू निकल जाता है। मन में सवाल उठता है कि लोग जहर क्यों खा रहे हैं। उन्होंने लोगों से अपील की कि जहर खाना छोड़ दें। अन्यथा एक बार अगर कैंसर हो गया तो जिंदगी बेकार हो जाती है। उन्होंने कहा कि खैनी, गुटका जीवन में कभी नहीं खाएंगे। न ही किसी को खाने के लिए कहेंगे।



 वृद्धावस्था का पैसा बेटे में हो गया खर्च

फ़ोटो-कलावती देवी

 छोटू की मां कलावती देवी बातचीत करने के क्रम में रो पड़ती हैं कहती हैं कि कमाकर वृद्धावस्था में गुजारा करने के लिए कुछ पैसा जमा किया था। बेटे के इलाज में वह सब भी खत्म हो गया। खैनी, गुटका खाना से मना करने पर भी कई लोग जब नहीं मानते हैं तो अधिक तकलीफ होती है। खासकर जिन से रक्त संबंध है उनको लेकर।

कद्दावर बिहारी रेल मंत्रियों के बावजूद परियोजना पर संकट



 कद्दावर बिहारी रेल मंत्रियों के बावजूद परियोजना पर संकट 

15 वर्ष में 326 से 3500 करोड़ की हुई परियोजना

मामला बिहटा औरंगाबाद रेलवे लाइन का

43 वर्ष में भी परियोजना पूरी नहीं 

2007 में लालू प्रसाद यादव ने किया था शिलान्यास 

नीतीश कुमार ने की थी परियोजना पूरी कराने की घोषणा 

उपेंद्र कश्यप, दाउदनगर (औरंगाबाद) : डबल इंजन की सरकार को विकास के लिए बेहतर माडल के रूप में प्रचारित किया जाता है लेकिन मात्र एक परियोजना पूरी करा सकने में डबल इंजन की सरकार सफल नहीं रही। और ना ही केंद्र में कद्दावर रेलवे मंत्री रहते बिहारी नेता सफल हो सके। मामला बिहटा से औरंगाबाद रेलवे लाइन बिछाने का है। सबसे पहले 1980 में आरा के सांसद रहे चंद्रदेव प्रसाद वर्मा ने इस मामले को संसद में उठाया था। इसके बाद यदि देखें तो 2007 में पालीगंज में तत्कालीन रेल मंत्री लालू प्रसाद यादव ने इस परियोजना का शिलान्यास किया और तब से प्रायः हर बजट में कुछ न कुछ राशि मिलती रही। अभी तक बमुश्किल 100 करोड रुपए भी नहीं प्राप्त हुई है। तब यह परियोजना बमुश्किल 326 करोड़ रुपए की बताई गई थी। लेकिन बीते 15 वर्ष में यह 3500 करोड़ रुपए लगभग की हो गई है। जब नीतीश कुमार केंद्र में रेलवे मंत्री बने तो उन्होंने 2004 में अरवल में एक सभा को संबोधित करते हुए घोषणा की कि इस परियोजना को पूरा करवाएंगे। लेकिन हुआ कुछ नहीं। बीते 43 वर्ष में यह परियोजना मात्र सर्वे तक पहुंच पाई है। लोकसभा में इस मामले को काराकाट के सांसद महाबली सिंह ने उठाया और कहा है कि यह परियोजना पूरी कराने के लिए अधिक से अधिक बजट लेने का प्रयास बजट सत्र में करेंगे। इधर रेलवे लाइन निर्माण संघर्ष समिति ने पांच जनवरी से नए सिरे से आंदोलन का आगाज करने की घोषणा की है।



दो चरणों में होना है निर्माण

दो चरणों में बिहटा- औरंगाबाद रेलवे लाइन का निर्माण कार्य पूरा कराना है। पहले चरण में बिहटा से पालीगंज तथा दूसरे चरण में पालीगंज से औरंगाबाद के बीच निर्माण होना है।



रेल परियोजना से जुड़े तथ्य


वर्ष 2007 में अनुमानित प्राक्कलन -326 करोड़ रुपये।

वर्ष 2022 में अनुमानित राशि 3500 करोड़ रुपये।

लंबाई 118.45 किलोमीटर।

 प्रस्तावित स्टेशनों की संख्या -16

यहां बनेंगे स्टेशन- बिहटा, अमहारा, विक्रम, दुल्हिन बाजार, पालीगंज, बारा, अरवल, राजा बिगहा, जयपुर, शमशेरनगर, दाउदनगर, ओबरा, अनुग्रह नारायण रोड, भरथौली, औरंगाबाद।


फाटक व पुल :- 79 समपार फाटक व 196 छोटे-बड़े पुल



बजट पर 90 लाख लोगों की टिकी उम्मीद की नजर

 


मामला औरंगाबाद- बिहटा रेल लाइन का 

15 वर्ष में 326 से 3500 करोड़ की हुई परियोजना

43 वर्ष में भी परियोजना पूरी नहीं 


दाउदनगर (औरंगाबाद) : भारत सरकार का बजट सत्र प्रारंभ होने वाला है। बिहार के चार संसदीय क्षेत्र पाटलिपुत्र, जहानाबाद, काराकाट, औरंगाबाद की लगभग 90 लाख की आबादी की उस पर नजर टिक गई है। इनकी मांग है कि बिहटा-औरंगाबाद रेल लाइन परियोजन के लिए सरकार प्राक्कलन के अनुसार राशि देकर जल्द से जल्द निर्माण कार्य शुरू कराये। बिहटा-औरंगाबाद रेल लाइन संघर्ष समिति ने अभी इसी उम्मीद में पांच से दस जनवरी तक पदयात्रा की। यह समिति वर्ष 2016 से इस मांग को लेकर आंदोलन कर रहा है। अनेक स्तर पर आंदोलन किया गया है। रेलवे लाइन निर्माण संघर्ष समिति के मुख्य संयोजक मनोज सिंह यादव के अनुसार 2016 में पदयात्रा निकाली गई थी। 2017 में रेलवे ट्रैक को जाम करने के अलावा रेल मंत्री व प्रधानमंत्री को पत्र लिखा गया था। हस्ताक्षर अभियान चलाया गया था। 2019 में दिल्ली के जंतर -मंतर पर सत्याग्रह किया गया। दानापुर मंडल कार्यालय के समक्ष धरना भी दिया गया। वर्ष 2004 में तत्कालीन रेल मंत्री नीतीश कुमार ने अरवल में एक कार्यक्रम के दौरान इसके निर्माण की घोषणा की थी। वर्ष 2007 में पालीगंज में तत्कालीन रेल मंत्री लालू प्रसाद यादव ने शिलान्यास किया। तब से प्रायः हर बजट में कुछ न कुछ राशि मिलती रही। अभी तक बमुश्किल 100 करोड रुपए भी नहीं प्राप्त हुई है। तब यह परियोजना बमुश्किल 326 करोड़ रुपए की बताई गई थी। लेकिन बीते 15 वर्ष में यह 3500 करोड़ रुपए लगभग की हो गई है। बीते 43 वर्ष में यह परियोजना मात्र सर्वे तक पहुंच पाई है। 



दो चरणों में होना है निर्माण

दो चरणों में बिहटा- औरंगाबाद रेलवे लाइन का निर्माण कार्य पूरा कराना है। पहले चरण में बिहटा से पालीगंज तथा दूसरे चरण में पालीगंज से औरंगाबाद के बीच निर्माण होना है।



रेल परियोजना से जुड़े तथ्य


वर्ष 2007 में अनुमानित प्राक्कलन -326 करोड़ रुपये।

वर्ष 2022 में अनुमानित राशि 3500 करोड़ रुपये।

लंबाई 118.45 किलोमीटर।

 प्रस्तावित स्टेशनों की संख्या -16

यहां बनेंगे स्टेशन- बिहटा, अमहारा, विक्रम, दुल्हिन बाजार, पालीगंज, बारा, अरवल, राजा बिगहा, जयपुर, शमशेरनगर, दाउदनगर, ओबरा, अनुग्रह नारायण रोड, भरथौली, औरंगाबाद।


फाटक व पुल :- 79 समपार फाटक व 196 छोटे-बड़े पुल

अनुग्रह नारायण रोड और नबीनगर रोड बनेंगे वर्ल्ड क्लास रेलवे स्टेशन

 



o नए बजट में हुआ राशि का आवंटन 

o बिहटा-औरंगाबाद रेलवे लाइन के लिए मिला मात्र 20 करोड़ रुपये

o अब निर्माण का कार्य प्रारंभ होने की बढ़ी उम्मीद

उपेंद्र कश्यप, दाउदनगर (औरंगाबाद) : नए प्रस्तावित बजट में जिन 87 रेलवे स्टेशनों को विश्वस्तरीय बनाए जाने के लिए राशि आवंटित की गई है उसमें औरंगाबाद जिले के दो रेलवे स्टेशन शामिल हैं। जबकि बहुप्रतीक्षित बिहटा- औरंगाबाद भाया अनुग्रह नारायण रोड रेलवे लाइन के विकास के लिए मात्र 20 करोड़ रुपये का आवंटन किया गया है। जिसे लोग ऊंट के मुंह में जीरा के समान बता रहे हैं। इस परियोजना पर पहले भी राशि जारी हो चुकी है। प्राप्त जानकारी के अनुसार औरंगाबाद जिले के दो रेलवे स्टेशन अनुग्रह नारायण रोड और नबीनगर रोड को विश्वस्तरीय बनाया जाना है। इन दोनों स्टेशनों पर यात्रियों को ट्रेनों की सही जानकारी प्राप्त हो इसके लिए बड़े-बड़े होर्डिंग्स लगाए जाएंगे। प्रकाश की उत्तम व्यवस्था होगी। जो अवांछित संरचना है उसे हटाया जाएगा। पैदल मार्ग बनाया जाएगा। सड़कों का चौड़ीकरण जैसे कार्य किए जाएंगे। महिलाओं और दिव्यांग जनों के लिए स्टेशनों पर पर्याप्त संख्या में शौचालय ऐसे स्थान पर बनाए जाएंगे जो स्टेशन पर आसानी से दिखाई दे। दोनों रेलवे स्टेशनों पर मुफ्त वाई-फाई की सुविधा के साथ फाइव जी टावर भी लगाए जाएंगे। पुरानी और बेकार भवनों का उपयोग कर उच्च प्राथमिकता वाली यात्री संबंधी गतिविधियों को तैयार किया जाएगा। जानकारी के अनुसार यात्रियों को पहुंचने में आसानी हो इसके लिए पार्किंग व्यवस्था की जाएगी। प्रस्तावित बजट के अनुसार बिहटा- औरंगाबाद भाया अनुग्रह नारायण रोड रेल लाइन के लिए 20 करोड़ की राशि दी गई है। इससे पहले दानापुर के डीआरआई प्रभात कुमार और एडीआरएम परिचालन आधार राज के अनुसार अब तक इस परियोजना पर 67 करोड़ की राशि जारी की गई है। पहले के पैसे को सर्वे के लिए बताया गया था। अब जो 20 करोड़ की राशि प्राप्त हुई है इस से निर्माण का काम शुरू होगा। यानी उम्मीद बढ़ गई है कि इस रेलवे लाइन का निर्माण होगा।



114 करोड़ रुपए अब निर्माण के लिए उपलब्ध

फोटो- मनोज सिंह यादव

इस परियोजना के निर्माण के लिए औरंगाबाद से पटना और हाजीपुर कार्यालय तक पदयात्रा कर और दिल्ली में बजट से पहले धरना देने वाले संघर्ष समिति के मनोज सिंह यादव ने बताया कि 2019 में 20 करोड़, 2020 में 25 करोड़, 2021 में 50 करोड़ और अब 2023 में 20 करोड़ रुपये मिला है। कुछ राशि रखरखाव में खर्च हुआ है। 94 करोड़ पहले से था अब 20 करोड़ और मिल गया। बताया कि 114 करोड़ रुपए इस परियोजना में अभी है। 23 फरवरी 2022 को टेंडर को रद्द कर दिया गया था और कार्य नहीं करने को कहा गया था। नई राशि आवंटन से यह तय हो गया कि परियोजना जिंदा है और अब निर्माण का काम शुरू होगा।



सोन नगर का भी होगा विकास फोटो-सोन नगर रेलवे स्टेशन

नए बजट प्रस्ताव में कई योजनाएं ऐसी ली गयी है जिससे सोन नगर रेलवे स्टेशन का भी विकास होगा। धनबाद- सोननगर नया तीसरी लाइन बिछेगा। यह 291 किलोमीटर का है। सोननगर-चिरैला पौथु से बाघा बिशुनपुर तक बाईपास लाइन बिछाया जाना है। इसी तरह सोननगर दुर्गावती के बीच लगभग डेढ़ दर्जन समपार फाटक पर दो लेन की ऊपरी सड़क पथ का निर्माण होना है।





Tuesday, 31 January 2023

एक दशक में ओबरा में बढ़ी 46894 आबादी

 



17709 है सबसे बड़ा पंचायत सरसौली की आबादी

7343 है सबसे छोटा पंचायत कारा की आबादी 

2011 में थी कुल 226007 जनसंख्या

उपेंद्र कश्यप, दाउदनगर (औरंगाबाद) : दाउदनगर अनुमंडल के ओबरा प्रखंड की आबादी 46894 बीते एक दशक में बढ़ गई। 2011 में हुए जनगणना के अनुसार 226007 लोग ओबरा में रहते थे। लेकिन ताजा हो रहे गणना के अनुसार अब 272901 लोग ओबरा में रहते हैं। इस हिसाब से यहां की आबादी 46894 बढ़ गयी। ओबरा प्रखंड में सबसे बड़ा पंचायत सरसौली है, जिसकी कुल आबादी 17700 है। जबकि सबसे छोटा पंचायत कारा है जहां की आबादी 7343 है। प्रखंड में कुल 20 पंचायत है। जिनके लिए कुल 281 गणना ब्लाक बनाए गए थे। कुल भवनों की संख्या यहां 34338 है। कुल मकानों की संख्या 30165 है। कुल परिवार 37472 है। जबकि ओबरा प्रखंड की कुल आबादी 272901 है।



जातीय जनगणना के प्रथम चरण का पंचायत वार विवरण 


पंचायत- कुल गणना ब्लाक- कुल भवनों की संख्या- कुल मकानों की संख्या- कुल परिवारों की संख्या- परिवारों के कुल सदस्यों की संख्या


अमिलौना- 15- 2300- 2356- 2356- 14001 

बभनडीहा- 11 -1272- 1736- 1736- 10241 

बेल- 15- 1938- 2835- 2838- 15370 

भरुब- 15- 2071- 2168- 2168- 14510 

चंदा- 14- 1680- 1689- 1689- 13440 

डिहरी- 14- 1764- 1690- 1790- 13520 

डीहरा- 16- 1635- 1725- 1795- 13760 

गैनी- 14- 1382- 1710- 1499- 13600 

कंचनपुर- 14 -1571- 1475- 1595- 12285 

कारा- 10- 898- 1077- 940- 7343 करसांव- 13- 1785- 1790- 1850- 14280 

खुदवां -14- 1831 -1760- 1870- 13838 

महुआंव- 13- 1780- 1790- 1790- 12460 

मलवां- 14- 1813- 1829- 1840 -14560 

ओबरा- 15- 1784- 1890 -1890- 14960 

ऊब -12- 1646- 1710- 1710 -13560 

रतनपुर- 15- 1610- 1825- 1820- 14258 

सरसोली- 18- 1950- 2440- 2320- 17709 

सोनहुली- 14- 1850- 1855- 1870- 14026 

तेजपुरा- 15- 1788- 1815- 2406- 14480 

कुल- 281- 30338- 37165- 37772- 272901




2011 में हुई जनगणना का आंकड़ा


ओबरा की जनसंख्या-226007

पुरुष- 117536

महिला-108471

परिवार की संख्या-35453

साक्षर लोग- 79327 

साक्षर पुरुष- 134307 

साक्षर महिला- 54980  

कुल श्रमिक- 75344 

कृषि श्रमिक- 21603 



Monday, 30 January 2023

42142 आबादी दाउदनगर के गांवों में 11 वर्ष में बढ़ी

 


सबसे बड़ा पंचायत शमशेरनगर 

सबसे छोटा पंचायत महावर 

उपेंद्र कश्यप, दाउदनगर (औरंगाबाद) : जातीय गणना के प्रथम चरण का काम पूरा हो गया है। जिसे सरकार आमतौर पर सर्वे का कार्य बता रही है। मकानों का नंबरीकरण का कार्य पूरा हो गया है। इस सर्वे में भी लोगों की गणना हुई है और इसके मुताबिक 2011 के मुकाबले 2023 में दाउदनगर प्रखंड के ग्रामीण इलाकों में यानी दाउदनगर के 15 पंचायतों में कुल 42142 की आबादी बढ़ी है। सबसे बड़े पंचायत के रूप में शमशेर नगर ने अपना दबदबा बनाए रखा है। वहां की कुल आबादी 18274 है। जबकि सबसे छोटे पंचायत के रूप में महावर सामने आया है। जिसकी कुल आबादी मात्र 7525 है। प्रखंड के अन्य पंचायतों की आबादी पांच डिजिट से कम में नहीं है। मालूम हो कि दाउद नगर में कुल 15 पंचायत हैं। 2011 की जनगणना के अनुसार 154490 आबादी थी।



महत्वपूर्ण तथ्य

जाति आधारित गणना - 2022

चार्ज का नाम:- प्रखंड दाउदनगर

पंचायतों की संख्या:-15

वार्डो की संख्या:-207

गणना ब्लाक की संख्या:-207

उपगणना ब्लाकों की संख्या:-159

भवनों की संख्या:-26128

मकानों की संख्या:-27582

परिवारों की संख्या:-34184

सदस्यों की संख्या:-196627

बेघर परिवारों की संख्या:-1, सदस्यों की संख्या:-5

कुल परिवारों की संख्या:-34185

कुल सदस्यों की संख्या:-196632

2011 की जनगणना के अनुसार कुल जनसंख्या 154490 थी।

एक दशक में वृद्धि-42142


पंचायत वार विवरण पंचायत


 पंचायत- कुल गणना ब्लाक- कुल भवनों की संख्या- मकानों की संख्या- परिवारों की संख्या- परिवार के कुल सदस्यों की संख्या

अंछा- 13- 1707- 1793- 2254- 13638 

अंकोढा- 11- 1356- 1448- 1781- 10331 

अरई- 13- 1467- 1481- 2117- 11266 

बेलवां- 15 -1815- 1913- 2284- 14140 

चौरी-16- 1735- 2000 -2246- 13836

गोरडीहा-13- 1745- 1891- 2194- 12710 

कनाप-16- 2002- 2062- 2633- 14204 

करमा- 10- 1297- 1380- 1666- 10410 

महावर- 08- 994- 1034 -1288- 7525

 मनार -13- 1852- 2015- 2319- 12990 

संसा- 18 -2292- 2430- 3116 -16327 

शमशेर नगर- 21- 2466 -2594 3252 -18274 

सिंदुआर- 13- 1583- 1652- 2070- 11257 

तरार -13- 1619- 1757- 2204- 12847

 तरारी- 14- 2278- 2397- 2760 -16873