Thursday, 13 February 2025

बेतरतीब आवासीय विकास से मुक्ति की है जरूरत

 बदलता शहर 05




भवन निर्माण में आवश्यक है 30 प्रतिशत क्षेत्र पार्किंग के लिए 

बिहार भवन निर्माण उप विधि का नहीं होता पालन

घर बनाने को परमिशन मिलने में आती है समस्या

उपेंद्र कश्यप, जागरण ● दाउदनगर (औरंगाबाद) : नगर परिषद दाउदनगर सी श्रेणी का शहर है। शहर में आबादी जैसे-जैसे बढ़ती गई बसावट का दायरा भी बढ़ता गया। नए घर बनते गए, लेकिन बेतरतीब तरीके से निर्माण होते जाने का नतीजा रहा कि गालियां संकरी हो गयी। नालियां भी बेहतर स्थिति में नहीं रही। किसी एक पक्ष को जिम्मेदार भी नहीं ठहराया जा सकता। नागरिक और नगर परिषद प्रशासन दोनों इसके लिए जिम्मेदार है। घर बनाने के लिए परमिशन की जरूरत होती है। नगर परिषद से परमिशन लेना काफी मुश्किल का काम रहा है। ढाई दशक तक तो नगर परिषद सिर्फ प्रशासनिक अधिकारी के हवाले रहा है। कई बार एलपीसी ना होने के कारण घर बनाने की परमिशन नहीं दी गई। अब जो व्यक्ति घर बनाना चाहता है, जमीन खरीद चुका है, स्वाभाविक है कि वह व्यक्ति घर बनाएगा ही। ऐसी स्थिति में घर तो बनते गए लेकिन बिहार भवन उप विधि का कहीं कोई अनुपालन नहीं हुआ। न इसकी जानकारी से लोगों को मतलब रहा। कार्यपालक पदाधिकारी ऋषिकेश अवस्थी कहते हैं कि उपविधि का पालन होना चाहिए। व्यवसाय के लिए अगर कोई भवन बना है तो उसमें 30 प्रतिशत क्षेत्र पार्किंग के लिए रखना आवश्यक है। आज शहर की स्थिति यह है कि बड़े-बड़े मार्केट में शौचालय तक नहीं है। पार्किंग की सुविधा नहीं है।


नप लापरवाह, नागरिक भी जिम्मेदार 

बाजार के निवासी पप्पू गुप्ता कहते हैं कि कर देने वाले लोगों की सुविधा का ख्याल रखना चाहिए। घर बनाने के लिए परमिशन लेने में भी समस्या आती है। नगर परिषद इसके लिए जिम्मेदार है, वह वह लापरवाह भी है। नागरिक भी परमिशन लेने के लिए बहुत उत्सुक नहीं दिखते।



बिना एलपीसी मिल रहा परमिशन 

कार्यपालक पदाधिकारी ऋषिकेश अवस्थी कहते हैं कि घर बनाने के लिए परमिशन देने को सरल किया गया है। एलपीसी आवश्यक नहीं ।है खतियान के आधार पर भी घर निर्माण के लिए परमिशन दी जा रही है। कोई भी वह दस्तावेज आवश्यक है जो स्वामित्व साबित करता हो। बीस लाख रुपये तक का घर निर्माण पर आठ से दस हजार रुपये का शुल्क लगता है। ऐसे में हर नागरिक को घर बनाने का परमिशन लेना चाहिए। इससे उनके स्वामित्व को भी शक्ति मिलती है।



सरल किया गया है परमिशन देना 

मुख्य पार्षद अंजली कुमारी कहती हैं कि परमिशन बहुत ही सहजता से दिया जा रहा है। यह तय कर दिया गया है कि सहजता से लोगों को घर बनाने के लिए परमिशन मिले। लोगों को भी चाहिए कि वह हर हाल में घर बनाने से पहले आर्किटेक्ट से नक्शा बनवा ले और नगर परिषद से निर्माण के लिए परमिशन प्राप्त कर लें।


आवास और रहने वाली आबादी


बिहार जाति आधारित गणना 2022 के प्रथम चरण के आंकड़े के अनुसार शहर के सभी 27 वार्डों में कुल 8010 भवन है। जबकि 8610 मकान है। इन मकानों में 11071 परिवार रहते हैं। महत्वपूर्ण है कि आमतौर पर 2011 में बताया गया था कि शहर में 6000 लगभग घर हैं। लेकिन ताजा सर्वे के मुताबिक यह संख्या 8610 है।


Wednesday, 12 February 2025

बढ़ती आबादी के साथ बढ़ती गई यातायात की मुश्किलें

 बदलता शहर 04



8225 से बढ़कर 65543 हो गई शहर की जनसंख्या 

140 वर्ष में आठ गुना बढ़ी आबादी लेकिन यातायात की सुविधाएं नहीं 

1885 में जब बना नगरपालिका तो थी 8225 जनसंख्या

शहरी विकास के लिए आवश्यक होती है चौड़ी सड़क 

हटानी पड़ेगी अतिक्रमण तभी होगा यातायात सुगम

उपेंद्र कश्यप, जागरण ● दाउदनगर (औरंगाबाद) :

140 साल पहले जब 1885 में दाउदनगर चट्टी से नगरपालिका बना था तब वर्ष 1881 की जनगणना के अनुसार 8225 की जनसंख्या शहर में थी। यह लगातार बढ़ती गयी। अब आठ गुना हो गई है। वर्ष 2011 की जनगणना के अनुसार 52364 जनसंख्या है। जबकि 2022 में हुए जाति सर्वे के अनुसार 65543 जनसंख्या है। लेकिन इस अनुपात में शहर में यातायात की व्यवस्थाएं नहीं बदली। नई गलियां आबादी के बसावट के साथ बनी तो वे संकरी रही। पुरानी आबादियों वाली गलियां काफी संकरी हुई। अतिक्रमण मुख्य समस्या रही। हालांकि शहर में कुछ सड़कें काफी चौड़ी है। दाउदनगर बारुण रोड जो पुरानी शहर और नई शहर को विभाजित करती है यह काफी चौड़ी सड़क है। हालांकि तब भी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र और पिराही बाग के इलाके में अतिक्रमण के कारण थोड़ी संकरी हुई है। मजार के आसपास भी अतिक्रमण साफ दिखता है। शहर में जगन मोड़ से लखन मोड तक की सड़क थोड़ी चौड़ी कहीं जा सकती है। लखन मोड़ से नहर होते भखरुआं तक और मौला बाग से पचकठवा देवी मंदिर होते सोनतराई क्षेत्र तक की सड़क चौड़ी है। इसके अलावा जो सड़के हैं उसकी चौड़ाई बेहतर नहीं है। कसेरा टोली रोड भी प्रायः चौड़ी है लेकिन कई जगह अतिक्रमण के कारण संकरी हो गई है। शहर में अतिक्रमण एक बड़ी समस्या है।



चौड़ी सड़कों के अभाव में बाजार पिछड़ रहा 

फोटो- ऋषिकेश अवस्थी 

नगर परिषद के कार्यपालक पदाधिकारी ऋषिकेश अवस्थी कहते हैं कि शहरी क्षेत्र के लिए चौड़ी सड़के होनी आवश्यक है। मुख्य पथ न्यूनतम 30 फीट चौड़ी होनी चाहिए। चौड़ी सड़कों के अभाव में ही बाजार पिछड़ रहा है। जबकि भखरुआं विकास कर रहा है। 30 फीट चौड़ी सड़क हो तो 15 -15 फीट का डिवाइड कर बीच में डिवाइडर दिया जा सकता है। मुख्य पथ में लखन मोड़ से नहर तक 70 से 80 फिट है, लेकिन अतिक्रमण मुक्त नहीं है। विद्युत खंभा सड़क पर ही गाड़ दिए गए हैं। उसे हटाने में सात से आठ लाख रुपये खर्च है।



अस्थाई डिवाइडर, पेवर ब्लाक आवश्यक

कार्यपालक पदाधिकारी कहते हैं कि अस्थाई डिवाइडर बनाना होगा। दुकानें हटानी पड़ेगी। धीरे-धीरे बढ़ रहे अतिक्रमण का दायरा बड़ा हो गया है। लिंक रोड को अतिक्रमण मुक्त करने की जरूरत है। जबकि कई जगह पेवर ब्लाक लगाने में 25 लाख रुपये लगभग खर्च होगा। यह काम हो जाए तो शहर में यातायात की व्यवस्था कुछ हद तक बेहतर हो सकेगी।



इस तरह बढ़ती गयी शहर की आबादी

साल जनसंख्या वृद्धि दर: में

1881     8225      0.00 

1891     8730      6.13 

1901     9744      11.61

1911     9149      -06.10 

1921     8511      -06.97 

1931    11699      37.46

1941    11133      -04.84 

1951    10448      -06.15 

1961    13320      27.49 

1971    20743      55.80

1981    24513      18.74 

1991    30331      23.80

2001    38014   25.33 

2011    52340   37.67


(2022 में हुए जाति सर्वे के अनुसार 65543 वृद्धि- 25.22)  



Tuesday, 11 February 2025

हृदय स्थल से ही वंचित है नगर निकाय दाउदनगर

 बदलता शहर 03




भखरुआं को शामिल करने की कोशिश रही है असफल 

नगर परिषद कर रहा भखरुआं को शामिल करने का प्रयास

सारे प्रमुख कार्यालय, न्यायालय, माल, बैंक ग्रामीण क्षेत्र में

उपेंद्र कश्यप, जागरण ● दाउदनगर (औरंगाबाद) जब आप पटना से औरंगाबाद या औरंगाबाद से पटना की तरफ आ जा रहे हैं या गया से डुमरांव अर्थात एनएच 139 या एनएच 120 से यात्रा करते हैं तो भखरुआं से गुजरना पड़ता है। यहां गोलंबर है। चकाचौंध है। पूरा-पूरा शहर दिखता है। अस्त व्यस्त क्षेत्र है। इसे दाउदनगर का हृदय स्थल कहा जाता है। लेकिन दुर्भाग्य से यह नगर परिषद का हिस्सा नहीं है। यह तरारी पंचायत का भखरुआं गांव है। अनुमंडल कार्यालय, अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी का कार्यालय, निबंधन कार्यालय, कृषि कार्यालय, अनुमंडल व्यवहार न्यायालय सारे महत्वपूर्ण कार्यालय के साथ कई बड़े-बड़े बैंक, बड़े-बड़े माल और शिक्षण संस्थान इस इलाके में स्थित है। भखरुआं को नगर पालिका में शामिल करने का प्रयास तत्कालीन अध्यक्ष यमुना प्रसाद स्वर्णकार ने किया था। लेकिन मामला उच्च न्यायालय गया और फिर पराजय मिला। तरारी तीखा मोड़ के पास तब सूचना पट्ट भी टांग दिया गया था कि यह क्षेत्र नगर पालिका में है। न्यायिक निर्णय के बाद बोर्ड तक उखाड़ने पड़े थे। उसके बाद भी कई बार कोशिश की गई। सफलता हाथ नहीं मिली। नए सिरे से फिर एक बार प्रयास शुरू हुआ है। गत 29 जनवरी को जिला मुख्यालय में आयोजित दिशा की बैठक में मुख्य पार्षद अंजली कुमारी ने इससे संबंधित एक पत्र जिला पदाधिकारी को दिया है। वास्तव में भखरुआं के लोग शहरी सुविधा तो प्राप्त करना चाहते हैं लेकिन शहर में शामिल होना नहीं चाहते। ऐसा ही तर्क तब भी दिया गया था और यही तर्क अब भी दिया जाता है। लेकिन एक न एक दिन यह तय है कि यह क्षेत्र नगर निकाय का ही हिस्सा होगा। अब इसमें चाहे वक्त जितना लगे।


डीएम को लिखा है पत्र : अंजली कुमारी

मुख्य पार्षद अंजली कुमारी ने बताया कि जिला पदाधिकारी को दिए गए आवेदन दिया गया है। इसमें कहा गया है कि नगर परिषद के सीमावर्ती ग्राम भखरुआं थाना नंबर 75 को नगर परिषद दाउदनगर में सम्मिलित किए जाने के लिए बोर्ड की बैठक में निर्णय लिया गया था। इसके आलोक में इस कार्यालय के द्वारा पूर्व में प्रेषित पत्रों एवं जिला सामान्य शाखा औरंगाबाद के ज्ञापांक 32 मु सा दिनांक छह अगस्त 2024 की प्रति भी भेजी गयी है। अनुरोध है कि भखरुआं ग्राम थाना संख्या 75 को संपूर्ण एवं थाना संख्या 74 तरारी के आंशिक विकसित एवं वाणिज्य कर एरिया को नगर परिषद में सम्मिलित कराया जाए।


बचेंगे नहीं, लेकिन इच्छा भी नहीं : सत्येंद्र तिवारी

भखरुआं निवासी बीमा अभिकर्ता सत्येंद्र तिवारी कहते हैं कि नगर परिषद क्षेत्र में नाली, सफाई और शौचालय की जो बदयर व्यवस्था है उससे नगर निकाय में शामिल होने की इच्छा नहीं करती। लेकिन जिस तरह से इस क्षेत्र का शहरीकरण हुआ, विकास हुआ, उससे एक दिन नगर निकाय में इसका शामिल होना भी तय है। इससे बचा नहीं जा सकता। जरूरत यह है कि नगर परिषद क्षेत्र में व्यवस्था बेहतर हो।


नगर परिषद की वर्तमान सीमा

नगर परिषद इलाका में भखरुआं गोलंबर से पटना रोड में नहर पुल तक और औरंगाबाद रोड में गोलंबर से कुर्बान बिगहा तक, गया रोड में गोलंबर से जेल तक का इलाका दाउदनगर नगर परिषद क्षेत्र में नहीं है। दाउदनगर बाजार रोड में बड़ी नहर पुल तक का इलाका शहर से बाहर है। जबकि इस इलाके में शहर बसता है। 


भखरुआं की आबादी है 16460

तरारी पंचायत का हिस्सा है भखरुआं थाना नंबर 75, तिवारी मोहल्ला, कुर्बान बिगहा और बाबा जी का बागीचा। पूरे इलाके को मिलाकर वर्ष 2011 की जनगणना के अनुसार 16460 की आबादी है। इतना बड़ा इलाका शहर में शामिल होने से वंचित है। यदि यह शहर में शामिल हो जाए तो शहर की वर्तमान आबादी 2011 के जनगणना के अनुसार करीब 70 हजार से अधिक हो जाएगी। ऐसा होने से ना सिर्फ शहरीकरण का इलाका बढ़ेगा, बल्कि नगर परिषद को राजस्व की भी वृद्धि होगी। दूसरी तरफ भखरुआं के लोगों को बेहतर नगरीय सुविधा मिलेगी।



नगर परिषद बना, क्षेत्र विस्तार नहीं

 राज्यपाल के आदेश से नगर विकास एवं आवास विभाग बिहार सरकार के प्रधान सचिव चैतन्य प्रसाद ने 27 जुलाई 2002 को नगर परिषद गठित किए जाने की अधिसूचना जारी की थी। दाउदनगर नगर पंचायत की तत्कालीन परिधि में पड़ने वाले क्षेत्र एवं उसकी व‌र्त्तमान चौहदी को ही नगर परिषद दाउदनगर कहा गया। इसका क्षेत्र विस्तार नहीं हुआ। 



Monday, 10 February 2025

दाउदनगर : चार वार्डों की संख्या से शुरू यात्रा पहुंची 27 तक

 


1910 में हुआ था वार्डों का शहर में गठन 

25 वर्ष नगर पालिका गठन के बाद गठित हुए थे वार्ड 

उपेंद्र कश्यप, जागरण ● दाउदनगर (औरंगाबाद) :

140 वर्ष पूर्व जब वर्ष 1885 में नगर पालिका का गठन हुआ था उसके पहले भी दाउदनगर मगध और शाहाबाद क्षेत्र में चट्टी के रूप में मशहूर था। तब और अब में काफी कुछ महत्वपूर्ण परिवर्तन हुआ है। प्रशासनिक तौर पर कई बार पुनर्गठन हुआ। वार्डों की संख्या क्रमशः बढ़ती चली गई। 

जब नगर पालिका का गठन हुआ था तब शहर में कोई वार्ड का गठन नहीं हुआ था। करीब 25 वर्ष बाद पहली बार 1910 में शहर में वार्डों का गठन किया गया था। तब मात्र चार वार्ड का गठन किया गया था। इसके बाद 1925 में शहर में छह वार्ड बने और फिर 1971 में 12 वार्ड गठित किए गए। 1983 में 13 वार्ड बना। इसके बाद कोई चुनाव नहीं हुआ। जब 2002 में पुनः चुनाव की प्रक्रिया शुरू हुई तो वार्डों का पुनर्गठन किया गया और यहां 13 से 18 वार्ड बन गए। 2007 में यहां 23 वार्ड गठित हुए और जब 2018 में नगर परिषद में नगर पंचायत प्रोन्नत हुआ तो यहां कुल 27 वार्ड गठित किए गए। अभी यहां 27 वार्ड हैं।


मत से नहीं, हाथ उठाकर होता था चुनाव 

नगर पालिका बनने के साथ यहां अध्यक्ष के लिए चुनाव की प्रक्रिया शुरू नहीं हुई थी। तब सिंचाई विभाग के पदेन एसडीओ यहां के चेयरमैन होते थे और जनता से वाइस चेयरमैन का मनोनयन होता था। यहां जनता से पहला चेयरमैन 1938 में सूर्य नारायण सिंह मनोनीत किए गए। तब वार्ड पार्षदों का चुनाव जनता बैलेट के जरिए नहीं, बल्कि हाथ उठाकर करती थी। वार्ड के 20 से 25 माननीय लोग वार्ड पार्षद का चयन कर लेते थे। वर्ष 1986 के बाद 2001 तक चुनाव नहीं हुआ। 2002 से नियमित चुनाव की प्रक्रिया शुरू हुई। इसके बाद 2017 में भी चुनाव नहीं हुआ जब नगर पंचायत को नगर परिषद में प्रोन्नत किया गया। वर्ष 2018 से यहां नगर परिषद का चुनाव हो रहा है। वार्ड पार्षद ही चेयरमैन बनाते थे। वर्ष 2018 में नौ जून को अध्यक्ष बनी सोनी देवी और फिर चार मार्च 2021 को इस पद पर काबिज हुई मीनू सिंह। वर्ष 2023 में सरकार में नई व्यवस्था लागू कर दी। सीधे जनता को यह अधिकार मिला कि वह अपने मत से चेयरमैन व वायस चेयरमैन का निर्वाचन करे। नतीजा जनता ने पहली बार अपनी पसंद से इन दो पदों के लिए भी वार्ड पार्षद के साथ मतदान किया। और फिर 27 जून 2023 को नगर परिषद के लिए अध्यक्ष व उपाध्यक्ष का शपथ ग्रहण हुआ। और अंजली कुमारी चेयरमैन व कमला देवी उप मुख्य पार्षद बनीं।



छह वार्ड से चुने जाते थे 15 पार्षद 

नगर पालिका में जब तक वार्डों की कुल संख्या छह थी, तब तक 12 वार्ड पार्षद जनता द्वारा चुने जाते थे, और तीन वार्ड पार्षद सरकार मनोनीत करती थी। जिसमें एक चिकित्सक, एक सामाजिक कार्यकर्ता और किसी भी राजनीतिक दल का एक प्रतिनिधि वार्ड पार्षद मनोनीत किया जाता था।


तब डेढ़ रुपये दे कर बनते थे मतदाता 

तब व्यवस्था यह थी कि जो व्यक्ति न्यूनतम डेढ़ रुपये नगर पालिका को टैक्स देता था वही मतदाता होता था। दूसरे लोग वोट का अधिकार नहीं रखते थे। तब डेढ़ रुपये का कितना महत्व था इससे समझ सकते हैं कि तब एक किरानी को सरकार मात्र 30 रुपये महीना वेतन देती थी। 


अभी पुनर्गठन की योजना नहीं


मुख्य पार्षद अंजली कुमारी बताती हैं कि फिलहाल वार्डों के विस्तार की कोई योजना नहीं है। सरकार का जब निर्देश प्राप्त होगा तभी वार्डों का पुनर्गठन होगा। अभी ऐसा कोई निर्देश सरकार से प्राप्त नहीं हुआ है।


Sunday, 9 February 2025

1885 में जितनी आबादी थी उससे अधिक निर्मित हो गए घर

 बदलता शहर


8225 घर थे जब बना था नगर पालिका 

8644 मकान हो गए हैं अब शहर में निबंधित 

अनिबंदित घरों की भी संख्या शहर में कम नहीं

10 फरवरी 1885 को नगरपालिका बना था दाउदनगर

उपेंद्र कश्यप, जागरण ● दाउदनगर (औरंगाबाद) :

दाउदनगर सोन के तट पर बसा हुआ एक महत्वपूर्ण शहर है। कभी यह कस्बा हुआ करता था। वर्ष 1881 में यहां की जनसंख्या मात्र 8225 थी। एक कहावत है- शहर में सासाराम और चट्टी में दाउदनगर। यह काफी मशहूर चट्टी हुआ करता था। उद्योग भी यहां थे। बादशाह औरंगजेब के सिपहसालार दाऊद खान द्वारा 17 वीं सदी में बसाया गया यह शहर है। यहां के लोगों में तब छटपटाहट थी और इसे नगर का दर्जा देने के लिए प्रयास हुआ। अंततः 10 फरवरी 1885 को तत्कालीन उड़ीसा, बिहार और बंगाल की सरकार ने इसे नगर पालिका का दर्जा दे दिया। महत्वपूर्ण तथ्य है कि 22 मार्च 1912 को बिहार और उड़ीसा को बंगाल से अलग करके बिहार और उड़ीसा प्रांत बनाया गया था। और फिर एक अप्रैल 1936 को बिहार और उड़ीसा को अलग-अलग प्रांत बना दिया गया था। तब से यह शहर काफी कुछ बदल गया। तब की आबादी से आठ गुना शहर की आबादी हो गई। वर्ष 2023 में हुए जाति सर्वे के अनुसार शहर की जन संख्या 65543 है। तब जितनी आबादी थी उससे अधिक तो अब शहर में घर बन गए हैं। नगर परिषद में आज 8644 घर निबंधित है। बताया जाता है कि शहर में अनिबंधित घरों की भी संख्या कम नहीं है। धीरे-धीरे विकास होता गया और शहर में घर बनते चले गए। यह आंकड़ा 2017-18 का है। उसके बाद अपडेट नहीं हुआ है। अपडेट करने के लिए सर्वे की आवश्यकता है और अभी सर्वे नहीं हुआ है।



सबसे अधिक वार्ड 16 में, 

सबसे कम चार में घर


शहर में कुछ इलाके काफी सघन है तो कुछ इलाके काफी खुले हुए है। वार्ड वार अगर निर्मित घरों का आकलन करें तो सबसे अधिक घर 565 वार्ड संख्या 16 में है। इसके बाद 562 घर वार्ड संख्या 23 में और 526 घर वार्ड संख्या 15 में है। सबसे कम घर वाले तीन वार्डों में 156 घर के साथ वार्ड संख्या चार शीर्ष पर है। जबकि 209 घर के साथ वार्ड संख्या एक है दूसरे स्थान पर। कुल 245 घर के साथ वार्ड संख्या 18 तीसरे स्थान पर है।



कार्यपालक बोले- शीघ्र होगा सर्वे

फोटो-ऋषिकेश अवस्थी

कार्यपालक पदाधिकारी ऋषिकेश अवस्थी ने बताया कि होल्डिंग सर्वे के लिए एजेंसी तय कर लिया गया था। लेकिन कुछ वार्ड पार्षदों के अनावश्यक हस्तक्षेप से मामला लटक गया। अब विभाग ने नया एजेंसी भेज दिया है। उस एजेंसी ने कोई सर्वे अभी तक नहीं किया है। नगर परिषद ने विभागीय निर्देश प्राप्त कर लिया है। होल्डिंग सर्वे एक से डेढ़ माह में कार्य आरंभ हो जाएगा। अगर विभाग सर्वे नहीं किया तो नप कराएगी। 




इस प्रकार वार्डों में बने हैं घर 

वार्ड संख्या - होल्डिंग की संख्या एक-209

दो-356 

तीन-387 

चार-156 

पांच-278 

छह-359 

सात-251 

आठ-359 

नौ-481 

10- 249 

11-320 

12-386 

13-427 

14-451 

15-526 

16-565 

17-307 

18-245 

19-479 

20-440 

21-498

22- 353 

23-562 

कुल- 8644



Wednesday, 22 January 2025

जहां आए थे बोस, वह बने प्रेरणा स्थल तो पीढियां होंगी प्रेरित


 लंबे प्रयास के बाद बनी प्रतिमा, विकास की आस अधूरी 

1939 में नौ और 10 फरवरी को चौरम थे सुभाष चंद्र बोस 

चतुर्थ गया जिला कांग्रेस सम्मेलन में लिए थे भाग 

प्रेरणा स्थल के रूप में किया जाना चाहिए विकसित


 उपेंद्र कश्यप, जागरण ● दाउदनगर (औरंगाबाद) : वर्ष 1939 में नौ और 10 फरवरी को यहां के चौरम में चतुर्थ गया जिला कांग्रेस सम्मेलन का आयोजन किया गया था। सुभाष चंद्र बोस शामिल हुए थे। उन्होंने यहीं से तुम मुझे खून दो मैं तुम्हें आजादी दूंगा का नारा बुलंद किया था और जवाहरलाल नेहरू को एक पत्र लिखा था। इन यादों को संरक्षित करते हुए यहां सुभाष चंद्र बोस की प्रतिमा स्थापित की गई है। वर्ष 2021 में जब यहां वंदना कुमारी मुखिया बनी तब उन्होंने यहां उनकी आदमकद प्रतिमा स्थापित की। इसके पहले लंबे समय तक यह कोशिश चलती रही। विकास की आस अभी अधूरी है। वास्तव में इस स्थल को युवाओं के लिए प्रेरणा स्थल बनाया जा सकता है। जिससे पीढियां प्रेरित होकर राष्ट्रभक्ति के जज्बे से सराबोर हो सकेंगे। यहां तब बड़े-बड़े नेताओं का जुटान हुआ था। यदि चौरम खेल मैदान की चारदीवारी कर इसे प्रेरणास्थल के रूप में विकसित किया जाए, यहां बड़ा पुस्तकालय का निर्माण हो, जिसमें सुभाष चंद्र बोस की जीवनी से संबंधित पुस्तक हो, तब आयोजित चतुर्थ गया जिला कांग्रेस सम्मेलन से जुड़ी यादें रखे जाएं तो यहां आने वाली पीढियों को प्रेरित कर सकेगा। उनमें राष्ट्रवाद का जज्बा भर सकेगा। लेकिन यह उम्मीद कब पूरी होगी या पूरी होगी भी कि नहीं, फिलहाल यह कहने की स्थिति में कोई नहीं है। इसी पंचायत के विकास कुमार कहते हैं कि जनप्रतिनिधियों ने स्टेडियम बनाने का वादा तो किया लेकिन इस दिशा में कोई काम नहीं हुआ।




होता है बड़े खेल आयोजन, बने स्टेडियम 

विकास कुमार कहते हैं कि इसे बड़े स्टेडियम का आकार दिया जाना चाहिए। यहां कई अंतरराज्यीय फुटबाल और क्रिकेट टूर्नामेंट हो चुका है और प्रायः आयोजन होते रहते हैं। दूर-दूर से यहां खिलाड़ी आ चुके हैं। यदि इसे बड़े स्टेडियम के रूप में विकसित किया जाए तो युवाओं को बेहतर माहौल और खेल परिसर मिल सकता है।




हो राजकीय समारोह, बने पुस्तकालय 

श्री सुभाष चंद्र बोस संघर्ष समिति चौरम के अध्यक्ष मनु कुमार ने कहा कि वे जयंती कार्यक्रम करते हैं। लेकिन यहां चारदीवारी व स्टेडियम बनाया जाना चाहिए। बड़े पुस्तकालय की आवश्यकता है। यह ऐतिहासिक महत्व का स्थल है। जिस तरह से ऐतिहासिक धरोहरों को सरकार संरक्षित करती है, उसके विकास का काम करती है वैसा यहां नहीं हो रहा। यहां राजकीय समारोह किए जाने की जरूरत है।

23 जनवरी 2025 को दैनिक जागरण में प्रकाशित 



Sunday, 31 March 2024

एनडीए के उपेंद्र कुशवाहा के खिलाफ लड़ेंगे इंडी के राजा राम सिंह



एक बार सांसद बन चुके हैं राजग प्रत्याशी 

भाकपा माले प्रत्याशी को राजद व कांग्रेस का समर्थन

सभी तीन चुनाव लड़कर हार चुके हैं राजाराम सिंह

उपेंद्र कश्यप

शनिवार को भाकपा माले ने ओबरा से दो बार विधायक रहे राजाराम सिंह को काराकाट से अपना प्रत्याशी घोषित किया है। इनसे पहले उपेंद्र कुशवाहा राष्ट्रीय लोक मोर्चा के घोषित प्रत्याशी हैं। अब यह लगभग तय हो गया है कि मुख्य भिड़ंत इन्हीं दोनों के बीच होगी। कोई अन्य दल से कोई बड़ा नाम बतौर प्रत्याशी आ जाये तो खेल बदल सकता है। एनडीए और इंडिया दोनों ही गठबंधन के प्रत्याशी एक ही जाति से हैं। दोनों ही गठबंधनों के बीच सीधी टक्कर की संभावना है क्योंकि इतिहास यही बता रहा है। भाजपा नीत राजग के गठबंधन ने राष्ट्रीय लोक मोर्चा के अध्यक्ष उपेंद्र कुशवाहा को काराकाट से प्रत्याशी बनाया है। जबकि इंडिया गठबंधन ने भाकपा माले के नेता राजा राम सिंह को प्रत्याशी बनाया है। वे ओबरा विधान सभा क्षेत्र से दो बार बतौर भाकपा माले प्रत्याशी 1995 व 2000 में विधायक रहे हैं। पहले काराकाट से तीन बार प्रत्याशी रहे लेकिन तीनों बार हार गए। इस बार उनको राजद व कांग्रेस का भी समर्थन प्राप्त है। इसलिए पूर्व की अपेक्षा काफी मजबूत प्रत्याशी माने जा रहे हैं।



चार वर्ष पूर्व तय था माले के लिए काराकाट

वर्ष 2020 में बिहार विधानसभा का जब चुनाव हुआ तो राजद ने वामपंथी दलों के साथ गठबंधन किया। तब ओबरा सीट राजद के खाते में चली गयी थी। जबकि माले नेता राजराम सिंह यहां से दो बार विधायक रह चुके हैं। तभी यह चर्चा हो गई थी कि ओबरा विधानसभा क्षेत्र से राजाराम सिंह के चुनाव नहीं लड़ने का कारण एक मात्र है कि डा. कांति सिंह ने अपने पुत्र ऋषि कुमार के लिए ओबरा सीट को लेकर विशेष आग्रह किया था। राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद ने इस आग्रह को स्वीकार कर लिया था। ऋषि कुमार चुनाव लड़कर विधायक बन गए। उसी समय चर्चा थी कि यह समझौता सिर्फ इसलिए हुआ है कि लोकसभा के चुनाव में काराकाट सीट राजाराम सिंह को दी जाएगी। यानी जो चर्चा चार साल पहले हुई थी, वह अब जाकर सत्य साबित हुई।



आम चुनाव 2019 में प्रदर्शन

प्रत्याशी- पार्टी- प्राप्त मत- वोट प्रतिशत 

महाबली सिंह - जदयू- 398408- 45.86

उपेंद्र कुशवाहा-रालोसपा-313866- 36.13

राजाराम सिंह-भाकपा माले-24932 2.87


वर्ष 2014 में प्रदर्शन


उपेंद्र कुशवाहा -रालोसपा -338892- 39.01

महाबली सिंह-जदयू-76709- 8.83

संजय केवट-बसपा-45503 -5.24

राजा राम सिंह-भाकपा माले- 32686- 3.76


वर्ष 2009 में प्रदर्शन

महाबली सिंह-जदयू- 196946 - 22.67


राजा राम सिंह-भाकपा माले- 37493- 4.32