Sunday, 4 February 2024

लालकृष्ण आडवाणी से जुड़ी है दाउदनगर की यादें

अयोध्या आंदोलन के दौरान आए थे भखरुआं 

दिया था ओज पूर्ण भाषण, जुटी थी काफी भीड़ 


जब राम मंदिर आंदोलन देश में विस्तार पा रहा था तब लालकृष्ण आडवाणी दाउदनगर भी आ चुके हैं। आज जब उनको भारत रत्न से सम्मानित करने की घोषणा स्वयं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने सोशल मीडिया हैंडल से की तो उन लोगों को काफी खुशी हुई जिन्होंने तब यहां लालकृष्ण आडवाणी को देखा और सुना था। उनके साथ तब गोविंदाचार्य थे। भखरुआं मोड पर पटना की तरफ से औरंगाबाद की ओर जाने के क्रम में संसा पथ के समीप लोगों को संबोधित किया और उन्हें अयोध्या के लिए आमंत्रित किया था। डाक्टर विश्वकांत पांडेय ने अपनी डायरी में उस घटना को अंकित किया हुआ है। बताया कि वे सितंबर 1991 को यहां आए थे। 


हिंदुत्व को था आडवाणी ने ललकारा 

लाल कृष्ण आडवाणी का दाउदनगर आगमन श्री राम मंदिर निर्माण को आहूत करने के लिए हुआ था। उसके पहले वे बिहार सरकार द्वारा गिरफ्तार किये जा चूके थे। राम धुन और मंदिर वहीं बनाएंगे का संगीत बजते गाड़ी के छत पर श्री आडवाणी ने सम्बोधन किया था। हिंदुत्व को ललकारते हुए अपनी बात रखी थी। तब दाउदनगर बाजार से हिन्दू समाज के बहुतायत लोग एकत्रित हुए थे।



सख्त सुरक्षा व्यवस्था और काफी भीड़



राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ से जुड़े सिद्धेश्वर प्रसाद बताते हैं कि तब भखरुआं में काफी भीड़ जुटी थी। कई वाहनों में बड़ी संख्या में पुलिस बल मौजूद थे। बहुत कम समय तक संबोधित किया लोगों को और फिर औरंगाबाद के लिए चले गए। ओबरा में भी संबोधित किया था लेकिन औरंगाबाद में बहुत भव्य कार्यक्रम तब हुआ था। पूरा वातावरण भक्तिमय व राममय बन गया था।



काफी देर तक प्रतीक्षा करते रहे लोग



आरएसएस से संबद्ध सुनील केशरी बताते हैं कि श्री आडवाणी के आने का समय 11 बजे तय था। किंतु लगभग तीन बजे आये थे। भारी संख्या में भीड़ थी। उनको सुनने के लिए प्रतीक्षा करती रही भीड़। लोग अटल आडवाणी जिंदाबाद, भारत मां के तीन धरोहर अटल आडवाणी मुरली मनोहर, वंदे मातरम, भारत माता की जय का नारा लगाया रहे थे।  

Tuesday, 30 January 2024

बिहार में सत्ता संघर्ष से राजनीतिक कार्यकर्ताओं को मिली सबक

मन आहत, विश्वसनीयता का बढ़ा संकट

जनता, कार्यकर्ता को मिली नीतीश, लालू, नमो से सीख 

नैतिकता, सिद्धान्त, आदर्श पर क्या सोचते हैं कार्यकर्ता


बिहार में सत्ता का संघर्ष कई प्रश्न खड़े कर गया है। तमाम प्रश्नों के बीच सबसे बड़ा प्रश्न यह है कि जो कुछ बिहार की राजनीति में घटित हुआ उससे आम जनता और जमीनी स्तर के राजनीतिक कार्यकर्ताओं को सीखने के लिए क्या मिला। हर घटना कुछ ना कुछ सिखाती है, तो स्वाभाविक है कि जब राजनीति की बड़ी घटना हो रही हो तो राजनीति में रुचि लेने वाले कार्यकर्ताओं को भी सीखने के लिए कुछ ना कुछ मिला। सबसे बड़ा संकट विश्वसनीयता का दिख रहा है। भरोसे की समस्या खड़ी हो गई है। राजनीति में नैतिकता, सिद्धांत, आदर्श को लेकर कार्यकर्ता क्या सोचते हैं। नरेंद्र मोदी हों या नीतीश कुमार और लालू यादव इन तीनों से सीखने को क्या मिला। यही जानने का प्रयास दैनिक जागरण ने किया।



पलटना, समेटना व अवसरवादिता सीखा 



पूर्व विधायक वीरेंद्र कुमार सिंहा के पुत्र पूर्व मुखिया कुणाल प्रताप ने कहा कि नीतीश कुमार ने पलटना, लालू ने समेटना और नरेंद्र मोदी ने अवसरवादिता सीखाया। सिखाया कि पलटो ऐसा कि जलो नहीं। जो कुछ मिल रहा है उसको समेटो और अवसर मिले तो सिद्धांत हटाओ कुर्सी हथियाओ। जब शीर्ष नेताओं के पास ही सिद्धांत नहीं है तो गांव में रहने वाले कार्यकर्ता सैद्धांतिक कैसे हो सकते हैं। आज चुनाव पैरवी, पावर और पैसा का बनकर रह गया है। इसीलिए आम लोग इस तीनों को पाने में लगे हुए हैं।



कोई भरोसा न कर सकेगा अब 



कांग्रेस प्रखंड अध्यक्ष राजेश्वर सिंह कहते हैं कि विश्वास खत्म हो रहा है। राजनीतिक दलों और कार्यकर्ताओं पर कोई अब भरोसा नहीं करेगा। विश्वास का संकट है। बार-बार झूठ बोलने से ऐसी स्थिति बन गई है कि अगर नेता सत्य भी बोले तो उस पर कोई भरोसा नहीं करेगा।



नेताओं से उम्मीद खुद पर कुल्हाड़ी चलाना 



नगर पंचायत के मुख्य पार्षद रहे भाजपा के नेता परमानंद पासवान ने कहा कि नेताओं के दिल, दिमाग और आत्मा में आदर्श, नैतिकता, सुचिता की कोई जगह नहीं बची है। जनता को ही नैतिकता का पाठ पढ़ाना होगा इन नेताओं को। नेताओं से उम्मीद रखना अपने पैर पर खुद ही कुल्हाड़ी मारने के बराबर है। जरूरत इस बात की है कि जनता बुद्धिजीवी बने और सही का चयन करे।


कार्यकर्ताओं के मान सम्मान से खिलवाड़ 



राजद प्रखंड अध्यक्ष देवेंद्र सिंह कहते हैं कि राजनीतिक दलों में कार्यकर्ताओं का मान सम्मान का ख्याल नहीं रखा जाता। एक तपके से सामंजस्य बैठा नहीं कि उसे छोड़कर दूसरे से बनाने की स्थिति आ जाती है। कार्यकर्ताओं की राय नहीं ली जाती है। राजनीतिक कार्यकर्ता पेंडुलम की तरह बना कर छोड़ दिए गए हैं। कभी इस पहलू कभी उसे पहलू डोलते रहिए। राजनीतिक दलों और नेताओं को लेकर विश्वास का भारी संकट है। सत्ता के लिए किसी से गठबंधन करने की प्रवृत्ति खत्म होनी चाहिए।





Tuesday, 23 January 2024

राजनीति की भट्ठी में युवाओं को झोंकने की साजिश

इस तरह की हरकतों से सांप्रदायिक तनाव की बन सकती है स्थिति

पुलिस प्रशासन के पूछने के बावजूद क्यों नहीं बताई गई की निकलेगा जुलूस 


 उपेंद्र कश्यप, दाउदनगर (औरंगाबाद) : क्या चुनावी राजनीति के लिए युवाओं को राजनीति की भट्टी में धकेला जा रहा है। क्या राजनीतिक लाभ के लिए सांप्रदायिक तनाव पैदा करने की कोशिश की जा रही है। क्या पुलिस प्रशासन से झूठ बोलकर नव युवकों को राजनीतिक लाभ के लिए मोहरा बनाया जा रहा है। जब पुलिस प्रशासन ने पूछा था कि अगर जुलूस निकालना चाहते हैं तो जानकारी दें तो फिर शांति समिति की बैठक में किसी ने यह क्यों नहीं कहा कि जुलूस निकाला जाएगा। सोमवार की रात अचानक लगभग 15 फीट ऊंचा डीजे के साथ जुलूस कैसे निकाला गया। क्या यह बिना योजना संभव हो सकता है। प्रश्न यह भी है कि हनुमान मंदिर प्रबंधन समिति को यह पता क्यों नहीं था कि शहर में जुलूस निकाला जाएगा। कई प्रश्न सोमवार की रात की घटना से उठे हैं। अचानक से लगभग 1000 युवा सड़क पर डीजे बांधकर कैसे उतर जाएंगे। यह और बात है कि उसके निकाले जाने की सूचना छुपाने की कोशिश की गई। यह भी एक योजना दिखती है। डीजे कसेरा टोली की तरफ से मुख्य पथ पर आता है और हनुमान मंदिर के पास बने गेट की ऊंचाई कम होने के कारण मामला फंस जाता है। प्राप्त जानकारी के अनुसार यहां प्रशिक्षु डीएसपी चंदन कुमार बार-बार अनुरोध करते हैं कि बना अनुमति के आप लोगों ने जुलूस निकाला है, पीछे हटिये। पुलिस प्रशासन ने शांति समिति की बैठक में पूछा था कि क्या जुलूस निकाला जाएगा जब प्रशासन अनुमति देने के लिए तैयार था तो फिर जुलूस निकालने की अनुमति क्यों नहीं ली गई। आखिर इस घटना के पीछे वह कौन सा व्यक्ति या समूह है जो युवाओं को सांप्रदायिक और राजनीतिक भट्टी में धकेल रहा है। लोगों को भी समझने की जरूरत है कि उनका राजनीतिक और धार्मिक इस्तेमाल उनके करियर को तबाह कर सकता है। इस तरह की घटनाओं से युवाओं को सबक लेनी चाहिए कि कहीं ना कहीं उनका राजनीतिक इस्तेमाल इसलिए किया जा रहा है कि किसी को लाभ हो। ऐसी कोशिश पर अगर विराम नहीं लगता है, पुलिस प्रशासन चिन्हित करके ऐसे लोगों के खिलाफ कार्रवाई नहीं करती है, तो फिर हसपुरा थाना क्षेत्र जैसी स्थिति हो जाएगी और यह दाउदनगर के लिए सबसे बड़ा दुर्भाग्य का दिन होगा। किसी भी परिस्थिति में सांप्रदायिक तनाव बढ़ाने और धार्मिक उन्माद फैलाने की इजाजत नहीं दी जानी चाहिए। क्या पुलिस आरोपितों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई करेगी।


बिना अनुमति निकाला जुलूस, किया पुलिस पर पथराव


10 नामजद समेत 12 के खिलाफ प्राथमिकी 

पुलिस ने जप्त किया डीजे का सारा सामान  

शहर में बिना अनुमति जुलूस निकालने, हंगामा करने और पुलिस पर पथराव करने के मामले में अंचल अधिकारी नरेंद्र कुमार सिंह द्वारा प्राथमिकी कराई गई है। डीजे और उसके सभी उपकरण, वाहन व जेनरेटर जब्त कर लिया गया है। इस मामले में 10 नामजद समेत 12 आरोपित बनाये गए हैं। प्राथमिकी आवेदन में कहा गया है कि अंचल अधिकारी प्रशिक्षु डीएसपी चंदन कुमार ठाकुर, थाना अध्यक्ष अंजनी कुमार, अपर थाना अध्यक्ष सुनील कुमार पुलिस बल के साथ निकले तो छत्तर दरवाजा के पास कुछ लोग लाठी डंडा से लैस होकर डीजे के साथ दिखे। बहुत तेज आवाज में डीजे बजा रहे थे। डीजे बजाने की उन्होंने अनुमति प्राप्त नहीं की थी। इन बीच बिजली कट गई। अंधेरे का लाभ उठाकर जुलूस में शामिल लोग पुलिस पर पत्थरबाजी करने लगे। कुछ पुलिस कर्मियों को हल्की चोट आई है। अंधेरा का लाभ उठाकर सभी भाग गए। डीजे, वाहन और जनरेटर वाले सभी भाग गए। बाद में पूछताछ पर पता चला कि अमृत बिगहा स्थित काली मंदिर रोड देवी स्थान के पास डीजे छुपा कर रखा गया है। इस सूचना पर पुलिस वहां पहुंचे तो डीजे और उसके सभी उपकरण को पुलिस ने जप्त कर लिया। इस मामले में डीजे के संचालक विजय कुमार, वाहन मालिक व उसके चालक के अलावा शहर के नौ व्यक्तियों को नामजद आरोपित बनाया गया है। पुलिस ने नामजद आरोपितों के नाम बताने से परहेज किया।



Thursday, 14 December 2023

अब आचमन लायक भी नहीं बचा सोन



बिहार में कोइरी डीह से इंद्रपुरी बांध तक सोन में पानी 

इंद्रपुरी बांध के बाद सोन की पहचान बस पतली धार

कार्तिक स्नान माना जाता है पवित्र व फलदायक

पुराना अरवल सोन की पेट में है समा गया

उपेंद्र कश्यप, दाउदनगर (औरंगाबाद) : सोन की धारा अब इतनी भी नहीं बची कि लोग उसके पानी से आचमन कर सकें। जबकि सोन पौराणिक नद माना जाता है और पूरा कार्तिक मास में उसमें स्नान को पवित्र और पुण्य फलदायक माना जाता है। इसके बावजूद आज सोन की स्थिति ऐसी है कि इसमें श्रद्धालु आचमन भी नहीं कर सकते। जब कार्तिक की छठ का आयोजन दाउदनगर के किनारे सोन तट पर किया गया, तब यह विचार किया गया कि आने वाले समय में अब दाउदनगर के लोग सोन में छठ करने कहां जाएंगे। अंतिम धारा काफी दूर चली गई है। हर्षवर्धन कालीन वाणभट्ट के जमाने से अब तक के लगभग 1400 साल में कहीं 10 तो कहीं 25 किलोमीटर तक पश्चिम खिसक गया है सोन। नतीजा यह है कि कार्तिक की छठ में काली स्थान घाट का तो वजूद खत्म हो ही गया उसके आगे नाला सा बन गया है सोन। सोन में जेसीबी मशीन से घाट बनाना पड़ा और श्रद्धालुओं को सूर्य को अर्घ्य देना पड़ा। तब सोन में ही मुख्य पार्षद अंजली कुमारी के प्रतिनिधि गणेश राम ने दैनिक जागरण से बातचीत में कहा था कि स्थिति ऐसी हो गई है कि अब अगले वर्ष से नगर परिषद द्वारा गड्ढा खोदकर सोन के पेट में पानी निकालना पड़ेगा ताकि लोग सूर्य को अर्ध दे सकें। बिहार में सोन नबीनगर के कोईरीडीह के पास प्रवेश करता है। यह उत्तर दिशा में है और दक्षिण में है पलामू का दंगवार गांव। यहां कररवार नदी बिहार और झारखंड का विभाजन करती है और खुद को सोन में समर्पित कर समाप्त हो जाती है। यहां एक गांव है गोगो जहां के इंजीनियर सुंदर साहू बताते हैं कि कोईरीडीह से लेकर इंद्रपुरी बांध तब सोन में पानी प्रयाप्त मात्रा में रहता है। इसके बाद की स्थिति देखें तो इंद्रपुरी बांध के बाद सोन की स्थिति खराब होती चली जाती है। क्योंकि सोन में नियमित पानी नहीं रहता। बालू कम और मिट्टी अधिक होते जा रही है। सोन के पेट में बड़े हिस्से में बालू खत्म हो रहा है और मिट्टी का विस्तार हो रहा है। जिसमें लोग खेती करते हैं। दाउदनगर की सीमा तक यह करीब 40 किलोमीटर की लंबाई में है। सोन दाउदनगर के बाद अरवल पहुंचता है। सोन के पानी का रंग पुस्तक में उसके लेखक देव कुमार मिश्रा लिखते हैं कि पुराना अरवल सोन के पेट में चला गया और जो नई बस्ती पड़ोस के गांव की भूमि पर बसी उसे ही अरवल नाम से प्रसिद्धि प्राप्त हो गई।




कभी हहास बांधता आता था हुल्लड़


यही सोन कभी बाढ़ के लिए कुख्यात हुआ करता था और सोन के बाढ़ को बाढ़ नहीं बल्कि उसे हुल्लड़ कहा जाता था। वह हहास बांधता हुआ दौड़ता था और उसके रास्ते में आने वाले तमाम धराशाई हो जाते थे। अभी स्थिति यह है कि सोन में बाढ़ नहीं आता और बालू के अंधाधुंध खनन ने सोने में कई गड्ढे बना दिए हैं। जिसमें हाल के वर्षों में डूबने से लगभग आधा दर्जन मौतें हो चुकी हैं। दाउदनगर, ओबरा, बारुण और नबीनगर चार प्रखंड औरंगाबाद जिले के सोन के किनारे हैं। 



टीला, शिकार खेलना, पंक्षी सब खत्म


पांडेय टोली निवासी विश्वकांत पांडेय, अवधेश पांडेय, पुरानी शहर निवासी विवेकानंद मिश्रा, अरुण यादव, किसान पंकज यादव जैसे लोग बताते हैं कि अब सोन में ना तो टीला बचा है, न काली स्थान घाट का कोई वजूद बचा है। कभी बुजुर्ग बताते थे कि अंग्रेज सोन में शिकार खेलने जाते थे। अब सोन की स्थिति यह है कि कोई पंछी नहीं मिलता है। एक जमाने में टीला पर चढ़ने में युवा हाफ जाते थे। इन सब का वजूद खत्म हो गया है।



Thursday, 30 November 2023

सांस्कृतिक संसार का धूमकेतु : श्रीश चंद्र मिश्र सोम

 


उपेंद्र कश्यप


(यह आलेख मैंने अपनी स्मारिका उत्कर्ष-3 में प्रकाशित किया था। यह उनसे बातचीत पर आधारित है। जैसा उन्होंने बताया था। आप तस्वीर में देख सकते हैं कि हम दोनों स्टूडियो यादें में बैठकर बात कर रहे हैं।)


खगड़िया जिला के राका निवासी श्री चंद्र मिश्र सोम का दाउदनगर में आगमन किसी धूमकेतु से कम नहीं था। उन्होंने अपने दम पर यहां साहित्य, संस्कृति का संसार रचा, उसे गढ़ा और कई अनगढ़ कलाकारों को सांस्कृतिक संस्कार दिया। उन्हें नाटक खेलने (मंचन) की तहजीब सिखाया। वह भी अपने पैशेगत कर्म की विचारधारा से विपरीत जाकर। अशोक उच्च विद्यालय में बतौर जीव विज्ञान के शिक्षक के रूप में पदस्थापित होकर 1965 में आए। जीवों का विज्ञान जाने वाले यह शख्स भीतर से बड़ा दयालु, सहृदय, मृदु भाषी और मिलनसार थे। वह समाज के पिछड़ापन, उसका दर्द देख भाव विह्वल होते हैं और उसे शब्द दे देते हैं। उनकी छंद बद्ध और मुक्त छंद की कविताएं, गीत आकाशवाणी एवं विभिन्न पत्र पत्रिकाओं में प्रसारित प्रकाशित होने लगा। लोहियावादी सोम फणीश्वर नाथ रेणु की खासियत से प्रभावित थे। सोन भ्रमण और पिकनिक में शामिल होने से उनका सामाजिक संबंध का दायरा विस्तारित होता गया। उनके छात्र उनकी साहित्यिक रुचियों के कारण उनसे आत्मीय रूप से जुड़ते गए। कारवां बढ़ता गया और किसी साल की 13 सितंबर को ज्ञान गंगा नाटक संस्था का गठन किया गया (तब उन्हें वर्ष स्मरण नहीं था)। उन्होंने नाटक लिखने से लेकर उसके निर्देशन तक की जिम्मेदारी अपने कंधे पर लिया। उनकी दृष्टि बड़ी बारीक थी। दूर तक जाती थी। स्थानीय से लेकर अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रम इन्हें प्रभावित करते थे। हिरोशिमा नागासाकी की परमाणु घटनाओं से चिंतित विश्व समुदाय ने निशस्त्रीकरण पर चर्चा कर रहा था और यहां वह आगाज-ए-रोशनी का मंचन। 1970 के आसपास सभी शस्त्र अस्त्र को जमींदोज करने की अपील एक अधेड़ शख्स कर रहे थे। संदेश दे रहे थे कि बिना ऐसा किये मानव का भला नहीं हो सकता। धर्म के बिना विज्ञान का विकास संभव नहीं है। दोनों साथ रहकर विकास कर सकते हैं। नाटकों के मंचन के लिए लोग स्वतः स्फूर्त सहयोग के लिए आगे आते थे। 1970, 1980 और 1990 के दशक में नाटक मनोरंजन का प्रमुख माध्यम हुआ करता था। बिना प्रचार के ही भीड़ जुड़ जाती थी। तब भी हालांकि शहर में सिनेमाघर चलता था लेकिन घरों में टेलीविजन कैद आबादी नहीं थी। 

उन्हें दिखावा पसंद नहीं था। चापलूसी से दूर रहते और बड़े अच्छे श्रोता थे। उन्होंने आगाज-ए-रोशनी, बर्फ पिघलता है, अग्नि शिखा जैसे नाटक लिखे और इसका मंचन भी किया। कई प्रतिष्ठित नाटक कारों का नाटक मंचन किया गया। उनके जाने के साथ नाटक मंचन का दौर यहां खत्म हो गया। अब वह देहातों में बचा हुआ है। उन्होंने तीन पीढ़ियों को नाटक रचने, खेलने का गुण सिखाया। उनके सहकर्मी थे एमबीबीएस स्व. डॉक्टर मनोज, स्वर्गीय प्रोफेसर सच्चिदानंद प्रसाद, स्वर्गीय डॉक्टर विश्वनाथ, महेंद्र गुप्ता एवं अन्य। दूसरी पीढ़ी विद्यार्थियों एवं उनके हमउम्रों की थी। जिसमें द्वारिका प्रसाद उर्फ गुरुजी, ओमप्रकाश, बृजनंदन, सुजीत चौधरी उर्फ नेपू, बबलू जैसे लोग थे। और फिर बाद की एक पीढ़ी ने उनसे बहुत कुछ सीखा। जिसमें स्वयं यह लेखक उपेंद्र कश्यप, संजय शांडिल्य, कपिलेश्वर विद्यार्थी, कृष्ण किसलय (अब स्वर्गीय) जैसे लोग शामिल थे। कृष्ण किसलय सोनमाटी साप्ताहिक के लिए राय मशवरा करते थे। उनकी दो शख्सियत साथ रही। लोगों को याद है जीव विज्ञान का शिक्षक होने के बावजूद उन्होंने विज्ञान के शब्दों को अंग्रेजी के बदले हिंदी में लिखा पढ़ाया यथा कैलिक्स का कूट चक्र, कोटेला का दल चक्र, इनफ्लोरेन्स का पुष्प चक्र, मुंडक जैसे शब्द इस्तेमाल करते रहे। दूसरी उनकी एक अदा हमेशा याद आती है। घर में प्लेट में रखी हरी-हरी, छोटी-छोटी भांग की गोलियां। जिसे खाने वाले पहुंचते और स्वयं उठाकर खाते। चाय के साथ कविता पाठ या गप्पें। और बीच-बीच में पान की बटिया से एक पान निकाल कर चबाना।



और अंत में…

(30.12.23को लिखा)


मेरे मित्र अवधेश पांडे के स्मरण में है कि कैसे उन्होंने सीट का सिटीए उच्चारित किया और बुझ को बुझड। और खुली चुनौती कि दोनों सही है। जीव विज्ञान के शिक्षक रहते पटना आकाशवाणी से उन्होंने इस पर आधे घंटे का पाठ पढ़ा था। जिसे लोगों ने कौतूहलवश सुना था। और तब दाउदनगर के वे ऐसे पहले गुरु माने गए थे जिनका पाठ आकाशवाणी पर पढ़ा गया।

Sunday, 5 November 2023

अमझर शरीफ में सांप्रदायिक तनाव रोकने को बनेगा आउटपोस्ट

 



यहां के 31 घरों में चलता है अवैध बूचड़खाना 

शीघ्र होगा आउटपोस्ट का उद्घाटन, तैयारी पूरी

फिलहाल 10 पुलिस बल और एक पदाधिकारी प्रतिनियुक्ति 

यहां हमेशा होते रहता है पशु तस्करी को लेकर विवाद 

संवाद सहयोगी, दाउदनगर (औरंगाबाद) : अनुमंडल के हसपुरा प्रखंड के अमझर शरीफ में हमेशा सांप्रदायिक तनाव की स्थिति बनते रहती है। इसकी वजह अवैध पशु तस्करी का होना है। प्रशासन का स्पष्ट मानना है कि यहां के 31 घर ऐसे हैं जहां अवैध बूच़डखानों का संचालन होता है। अभी दो नवंबर को सुखाडी बिगहा के मंदिर में मांस का टुकड़ा पाए जाने के बाद लोगों में काफी आक्रोश व्याप्त हुआ है। महत्वपूर्ण है कि अभी तक तीन बार पशु मांस का टुकड़ा फेंके जाने को लेकर इस इलाके में सांप्रदायिक तनाव की स्थिति बनी है और एक बार पुलिस पर हमला भी हो चुका है। पुलिस सूत्रों के अनुसार ताजा विवाद से पहले 21 जुलाई और दो जुलाई 2023 को पशु मांस का टुकड़ा फेंके जाने को लेकर विवाद हो चुका है। इन तीनों ही मामलों की प्राथमिक की गई है। इससे पहले 13 जून 2023 को अवैध पशु तस्करी के मामले को लेकर पुलिस जब गांव में छापामारी करने गई थी तो उन पर हमला हुआ था। इस मामले में दो प्राथमिकी की गई थी दो दर्जन से अधिक नामजद आरोपित बनाए गए थे। पुलिस के हाथ कोई सफलता नहीं लगी हद यह कि तब पुलिस से कार्बाइन और हथियार छीन लिए गए थे। इस सब के मद्देनजर यहां आउटपोस्ट खोलने का निर्णय लिया गया है। एसडीओ मनोज कुमार और डीएसपी कुमार ऋषिराज ने इस बात की पुष्टि की है कि आउटपोस्ट खोला जाएगा। इसी के लिए शनिवार की देर शाम एसपी श्वेता जी मेश्राम और इन पदाधिकारियों ने स्थल निरीक्षण किया था। सारी तैयारी लगभग पूरी की जा चुकी है और कभी भी यहां आउटपोस्ट खोला जाना है। डीएसपी ने बताया कि फिलहाल आउटपोस्ट में 10 पुलिस बल और एक पदाधिकारी की प्रतिनियुक्ति की गयी है।



घरों को चिन्हित कर बना है नजरी नक्शा


अंचल अधिकारी द्वारा गांव का सर्वे कर 31 घरों को चिन्हित किया गया है। इस संबंध में नजरी नक्शा बनाया गया है। खास बात यह है कि सारे घरों का प्रवेश एवं निकास अमझर शरीफ कब्रिस्तान वाली गली के बगल के सड़क से होता है। सूत्रों के अनुसार इस गली और सड़क से अवैध पशुओं के लाने और ले जाने पर नियंत्रण के लिए पुलिस पदाधिकारी और नोडल अधिकारी सह दंडाधिकारी प्रतिनियुक्ति करने का अनुरोध एसडीओ ने किया था। इसके बाद हसपुरा प्रखंड के मौजा अमझर शरीफ एवं मुस्लिमाबाद में अवैध पशुओं के लाने और ले जाने पर नियंत्रण के लिए भ्रमणशील नोडल पदाधिकारी सह दंडाधिकारी एवं पुलिस पदाधिकारी की प्रति नियुक्ति तीन नवंबर से अगले आदेश तक के लिए की गई है। जिसमें पशु चिकित्सा पदाधिकारी हसपुरा डाक्टर कुश कुमार और भ्रमणशील पशु चिकित्सा अधिकारी डाक्टर आशुतोष कुमार को नोडल पदाधिकारी सह दंडाधिकारी बनाया गया है। जबकि पुलिस अवर निरीक्षक विजय कुमार सिंह सलैया थाना को नोडल पुलिस पदाधिकारी बनाया गया है। कुल 10 पुलिस बल यहां तैनात किए गए हैं।




नजरी नक्शा के अनुसार करना है काम 

डीएम और एसपी के संयुक्त आदेश में निर्देश दिया गया है कि अंचल अधिकारी हसपुरा से नजरी नक्शा प्राप्त कर उसके अनुसार भ्रमणशील रहकर अवैध पशुओं के लाने और ले जाने पर नियंत्रण रखने का कार्य प्रतिनियुक्त अधिकारियों को करना है। स्थल का आकलन करते हुए प्राप्त पुलिस बल को आवश्यकता अनुसार प्रतिनियुक्त करना सुनिश्चित किया जाना है। हसपुरा थाना अध्यक्ष को निर्देश दिया गया है कि उपरोक्त प्रतिनियुक्ति पुलिस बलों के आवासन की व्यवस्था थाना परिषर में ही करेंगे। दाउदनगर के एसडीओ व डीएसपी को संयुक्त आदेश के तहत निर्देश दिया गया है कि दोनों मुख्यालय में उपस्थित रहेंगे। भ्रमणशील रहकर विवादित स्थल पर विशेष चौकसी बरतेंगे और विधि व्यवस्था, शांति व्यवस्था बनाए रखना सुनिश्चित करेंगे।

लिखा-5.11.23



Wednesday, 1 November 2023

अस्पताल, दवा दुकान और पैथोलाजी को नप ने भेजा नोटिस

 


शहर के अस्पतालों, दवा दुकानदारों और पैथोलाजियों में मचा हड़कंप 

उठाया गया नहर किनारे फेंका गया मेडिकल कचरा 

संवाद सहयोगी, दाउदनगर (औरंगाबाद) : चंद रुपयों के लिए खतरे में डाल रहे जान- शीर्षक से सोमवार को दैनिक जागरण में प्रकाशित खबर का काफी असर हुआ है। नगर परिषद ने यहां चल रहे निजी असप्तालों, जांच घरों, दवा दुकानदारों को नोटिस भेजा है। इससे इनमें हड़कंप मच गया है। इस खबर में बताया गया था कि नहर के किनारे आबादी के बीच मेडिकल कचरा को लोग चंद रूपये बचाने के लिए फेंक दे रहे हैं। जबकि उनके निस्तारण के लिए गया की एजेंसी यहां लगातार आती है और नियम के मुताबिक मेडिकल कचरा का निस्तारण विधि सम्मत न किया जाना अपराध है। इससे पहले भी दैनिक जागरण ने- मेडिकल कचरा ना बने खतरा- अभियान चलाया था। इसके बावजूद अस्पताल, दवा दुकान और जांच घर चलाने वाले लोग कचरा को सड़क किनारे फेंक रहे हैं। जिससे आम लोगों का जनजीवन प्रभावित हो सकता है। लोगों की जिंदगी खतरे में पड़ सकती है। दैनिक जागरण में प्रकाशित खबर के अनुसार अनुमंडल अस्पताल के उपाधीक्षक डा.राजेश कुमार सिंह ने बताया था कि ये दवाईयां होमियोपैथी की हैं और इनकी आपूर्ति सरकारी अस्पतालों में नहीं होती। डा. मनोज कुमार ने बताया था कि इन दवाओं के अंश से पशु, मनुष्य, वनस्पति तीनों को खतरा हो सकता है। नगर परिषद के कार्यपालक पदाधिकारी संजय उपाध्याय ने करवाई और जुर्माना का प्रविधान की बात कही थी। खबर प्रकाशित होने के बाद सोमवार को कार्यपालक पदाधिकारी संजय उपाध्याय के निर्देश पर कचरा उठाने का काम किया गया। इसके लिए दो सफाई कर्मी सुरक्षित पोशाक, दास्ताना और मास्क लगाकर मेडिकल कचरों को निस्तारण के लिए उठा कर ले गए। यहां के निवासी एथलीट दयानंद शर्मा ने बताया कि मेडिकल कचरा इस तरह फेंके जाने से यहां के लोगों के लिए खतरनाक स्थिति बन गयी थी। जिसने भी यह फेंका हो उसे इस बात का ख्याल रखना चाहिए कि आगे इस तरह का कचरा खुले स्थान पर ना फेंके। इधर नगर परिषद के सिटी मैनेजर विनय प्रकाश ने बताया कि शहर में जितने भी निजी अस्पताल, दवा दुकान और पैथोलैब हैं सभी को नोटिस भेजा जा रहा है कि वह मेडिकल कचरा के निस्तारण का विधिसम्मत उपाय करें अन्यथा उनके विरुद्ध सख्त से सख्त कार्रवाई की जाएगी।



भेजे गए नोटिस के प्रसंग में लिखा- दैनिक जागरण में प्रकाशित खबर 



नगर परिषद के कार्यपालक पदाधिकारी द्वारा इस क्षेत्र के सभी अस्पताल, जांच घर और दवाई दुकानों के प्रबंधकों या व्यवस्थापकों के लिए नोटिस जारी किया गया है। जिसमें विषय में बायो मेडिकल वेस्ट के निस्तारण के संबंध में लिखा गया है जबकि प्रसंग दैनिक जागरण में प्रकाशित खबर को दिया गया है। सोमवार को जारी इस पत्र में साफ-साफ कहा गया है कि दैनिक जागरण में बताया गया है कि बायो मेडिकल वेस्ट जैव विविधता अवशेषों का निस्तारण सही ढंग से नहीं करके उसे खुले स्थान पर फेंका जा रहा है। जो बायो मेडिकल वेस्ट अधिनियम 2016 का उल्लंघन है। बायो मेडिकल वेस्ट को खुले में फेंके जाने से जनसाधारण के स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता है। बायोमेडिकल वेस्ट अधिनियम का उल्लंघन किए जाने की स्थिति में विधिक कार्रवाई करते हुए आपके विरुद्ध दंडात्मक कार्रवाई एवं जुर्माने की राशि की वसूली की जा सकती है। नोटिस में कहा गया है कि अपने संस्थान या प्रतिष्ठान से निकलने वाले बायोमेट्रिक वेस्ट के निस्तारण की प्रक्रिया एवं बायोमेडिकल वेस्ट अधिनियम 16 के अधीन निस्तारण हेतु चिन्हित संस्थान से किए गए निबंधन से संबंधित सूचना नगर परिषद को उपलब्ध कराएं।