‘निकाय-मंत्री’ बनने के लिए धन खर्च की चर्चा
सोशल मीडिया पर वार्ड पार्षद प्रतिनिधि के पोस्ट से चर्चा शुरू
मामला सशक्त स्थाई समिति सदस्य चुनाव का
एक ने बताया मजाक तो दूसरे ने कहा दुर्भाग्यपूर्ण उपेंद्र कश्यप / नबिटा संवाददाता
दाउदनगर (औरंगाबाद) । अब तक चली आ रही व्यवस्था के अनुसार मुख्य पार्षद ही सशक्त स्थाई समिति के सदस्यों को नामित करते थे। आगे ऐसा नहीं होगा। बिहार नगरपालिका (संशोधन) अधिनियम, 2026 के अनुसार अब जनता द्वारा निर्वाचित वार्ड पार्षद सशक्त स्थाई समिति सदस्य का निर्वाचन गुप्त मतदान के जरिए करेंगे। सुविधा के लिए इन्हें ‘निकाय-मंत्री’ कह सकते हैं। दाउदनगर में 27 वार्ड पार्षद हैं, और सभी को तीन-तीन वोट देकर तीन निकाय-मंत्री का निर्वाचन करना है। एक वार्ड पार्षद प्रतिनिधि ने सोशल मीडिया पर निर्वाचन की तिथि तय होते ही लिखा कि 25000 से बयाना शुरू। इस पोस्ट के बाद ही शहर में सशक्त स्थाई समिति सदस्यों के निर्वाचन में राशि खर्च होने की चर्चा शुरू हो गई। इस संबंध में जब मुख्य पार्षद रहे परमानंद प्रसाद से इस संवाददाता ने बात की तो उन्होंने कहा कि वार्ड पार्षद तो चाहेंगे ही कि पैसे का खेल हो, ताकि उन्हें लाभ मिले। सफलता प्राप्त करने के लिए में सशक्त स्थाई समिति सदस्य के लिए चुनाव लड़ रहे वार्ड पार्षद भी धन खर्च कर सकते हैं। लेकिन अगर ऐसा होता है तो यह लोकतंत्र के लिए कतई उचित नहीं है। दूसरी तरफ सशक्त स्थाई समिति सदस्य रहे और संभावित प्रत्याशी डॉक्टर केदारनाथ सिंह कहते हैं कि वार्ड पार्षद प्रतिनिधि द्वारा किया गया पोस्ट मात्र एक मजाक था। हालांकि ऐसा नहीं करना चाहिए था। वहीं दूसरे संभावित प्रत्याशी बसंत कुमार कहते हैं कि ऐसा पोस्ट करना दुर्भाग्यपूर्ण है। यह सोशल मीडिया का गलत इस्तेमाल है। इससे लोकतंत्र, वार्ड पार्षदों और नगर परिषद दाउदनगर की प्रतिष्ठा को चोट पहुंची है। ऐसा कतई नहीं करना चाहिए था। दावे के साथ तो यह कतई नहीं कहा जा सकता कि वोट के लिए लेनदेन हो ही रहा है, लेकिन इतिहास के अनुभव इस तरह की चर्चाओं को पूरी तरह झूठ भी मानने के लिए बाध्य नहीं करते। अगर लेनदेन हो भी रहा होगा या होगा भी तो इसकी पुष्टि नहीं हो सकती और नहीं ऐसे मामलों में पहले कभी पुष्टि हुई है। यह चर्चा सत्य न हो तो ही लोकतंत्र के लिए उचित है।
25000 का मतलब कई लाख का खेल
वार्ड पार्षद प्रतिनिधि के एक पोस्ट के आधार पर अगर वोट की खरीद फरोख्त को लेकर गणित बैठाएं तो प्रत्येक संभावित प्रत्याशी के द्वारा तीन से चार लाख रुपए तक खर्च किए जाने का अनुमान लगाया जा सकता है। प्रत्येक वार्ड पार्षद को तीन वोट देना है यानी अगर 25-25000 का खेल चला तो कम से कम 75000 और अगर अधिक दावेदारों ने क्रॉस वोटिंग के डर से खर्च की तो उनके जेब में जाने वाली राशि बढ़ भी सकती है। इस हिसाब से अगर देखें तो कुल 11 अभ्यर्थी की संभावना व्यक्त की जा रही है। जीत पक्की करने के लिए अधिकतम 14 वोट चाहिए। यानी लगभग तीन से चार लाख रुपए का खेल एक अभ्यर्थी कर सकता है। हालांकि यह मानना संभव नहीं है कि सभी सभी वोट की खरीद बिक्री हो सकती है।
पोस्ट से सन्देश, प्रतिष्ठा को क्षति
जिस तरह के पोस्ट किए गए इसमें कोई शक नहीं कि उसने नगर परिषद की प्रतिष्ठा को दांव पर तो लगा ही दिया है। वार्ड पार्षदों और सशक्त स्थाई समिति सदस्य के लिए संभावित अभ्यर्थियों को भी लेकर संदेह की स्थिति बना दी है।

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