Saturday, 7 February 2026

काम हो रहा इसलिए हो रहे विरोध और लग रहे आरोप : अंजली कुमारी

08.02.2026 को दैनिक जागरण में प्रकाशित रिपोर्ट


शैक्षणिक व सामाजिक विकास पर ध्यान केंद्रित

संदेह से देखा तो सम्मान व सहयोग भी मिला

विकास की कई योजनाओं को पूर्णता देना लक्ष्य

उपेंद्र कश्यप, जागरण ● दाउदनगर (औरंगाबाद) : नगर परिषद दाउदनगर अपनी स्थापना का 141 वर्ष जब पूरे कर रहा है तो युवाओं को निखारने के लिए खेलकूद प्रतियोगिता का आयोजन किया जा रहा। यह मुख्य पार्षद अंजली कुमारी के निर्णय का फलाफल है। पहली बार स्थापना दिवस मनाया जा रहा है। अंजली कुमारी ने 27 जून 2023 को पद एवं गोपनीयता का शपथ लिया था। आम जनता से सीधे निर्वाचित वह प्रथम मुख्य पार्षद हैं। आम तौर पर महिला जन प्रतिनिधि से सीधे संवाद मुश्किल होता है। यह बेबाक बोलती हैं। चाहे मंच हो या सदन या बात करने वाला पत्रकार ही क्यों न हो। उनसे विभिन्न मुद्दों पर दैनिक जागरण संवाददाता उपेंद्र कश्यप ने बातचीत की।



■ बतौर मुख्य पार्षद सबसे बड़ी 05 चुनौतियां क्या हैं-

● नगर परिषद के पास संसाधन सीमित हैं, लेकिन जनता की अपेक्षाएं स्वाभाविक रूप से बहुत अधिक रहती हैं। इस संतुलन को साधना सबसे बड़ी चुनौती रही। कई समस्याएं वर्षों से लंबित थीं। यथा-नाला, सड़क, जलनिकासी, भूमि विवाद, जिनका समाधान तत्काल संभव नहीं था। प्रशासनिक प्रक्रियाओं की जटिलता, योजनाओं की स्वीकृति, टेंडर प्रक्रिया, विभागीय समन्वय में समय लगता है, जिससे कार्यों में विलंब होता है। विकास कार्यों के बावजूद राजनीतिक कारणों से आरोप-प्रत्यारोप झेलने पड़े। एक महिला के रूप में नेतृत्व व निर्णय क्षमता के साथ प्रशासनिक दृढ़ता को बार-बार साबित करना पड़ा।


■ नगर परिषद कार्यालय और शहर में दिखी सबसे बड़ी पांच समस्या-


● अव्यवस्थित ड्रेनेज और जलजमाव। जर्जर सड़कें और ट्रैफिक व्यवस्था। सार्वजनिक भवनों और सामुदायिक स्थलों की कमी।युवाओं और बच्चों के लिए खेल व अध्ययन के सीमित संसाधन। कार्यालय में पुराने ढर्रे की कार्यप्रणाली।


■ सबसे बड़े ड्रीम प्रोजेक्ट और उनके लिए किए गए प्रयास-

● नौका विहार,शापिंग कंपलेक्स, का आधुनिक ड्रेनेज, पुस्तकालय और नाला तंत्र। प्राथमिकता सूची बनाकर चरणबद्ध कार्य योजना तैयार की। राज्य सरकार से लगातार पत्राचार व फालो-अप की। सामुदायिक भवन और ई-लाइब्रेरी। वार्ड 14 और 16 में प्रस्ताव तैयार। शैक्षणिक और सामाजिक विकास को केंद्र में रखा। शहर के लिए मोक्षधाम की व्यवस्था। भूमि चिन्हित कर एक वर्ष से लगातार प्रयास। प्रधान सचिव, नगर विकास एवं आवास विभाग से व्यक्तिगत रूप से मिलकर प्रस्ताव को आगे बढ़ाया। खेल अधोसंरचना का विकास। अशोक स्कूल फील्ड में खेल प्रतियोगिताओं का आयोजन।बच्चों के सर्वांगीण विकास का लक्ष्य। बुनियादी शहरी ढांचे का सुदृढ़ीकरण।


■ पांच बड़े लक्ष्य और उन्हें पूरा करने की रणनीति-

● पूरे शहर में स्थायी जलनिकासी समाधान। मास्टर ड्रेनेज प्लान के तहत कार्य। हर वार्ड में मूलभूत सुविधाओं की समान उपलब्धता।वार्ड-वार आवश्यकता आधारित योजना। डिजिटल और पारदर्शी नगर परिषद। कार्यालयी प्रक्रिया को आधुनिक बनाना। महिलाओं और युवाओं के लिए विशेष योजना। कौशल, खेल और शिक्षा पर फोकस।स्वच्छ, सुंदर और सुरक्षित शहर। स्वच्छता अभियान को जन-आंदोलन बनाना।


■ महिला मुख्य पार्षद के रूप में अनुभव-

● नगर परिषद कार्यालय से लेकर पटना स्थित बिहार सरकार के कार्यालयों तक की यात्रा सीख, संघर्ष और आत्मविश्वास से भरी रही।कई बार संदेह की दृष्टि से देखा गया, लेकिन जब योजनाओं की तैयारी और तथ्यों के साथ बात रखी, तो सम्मान और सहयोग दोनों मिला। यह यात्रा मुझे और अधिक दृढ़, जिम्मेदार और संवेदनशील बनाती गई।

■ आपके पूर्ववर्तियों को क्या करना चाहिए था जो वे कर न सके-

● पूर्ववर्तियों ने भी अपने स्तर पर प्रयास किए, लेकिन दीर्घकालिक सोच का अभाव, कुछ बुनियादी मुद्दों को लगातार टालना, और युवाओं-बच्चों पर कम ध्यान देना  शहर के विकास में बाधा बना। मेरा प्रयास रहा कि उन्हीं अधूरे कार्यों को प्राथमिकता दी जाए।


■ विकास कार्यों पर भ्रष्टाचार के आरोप क्यों लगे-

● जब भी जमीनी स्तर पर वास्तविक और बड़े पैमाने पर काम होता है, तो विरोध और आरोप स्वाभाविक होते हैं। सभी कार्य नियम, प्रक्रिया और विभागीय स्वीकृति के तहत हुए। विरोधी भी यह स्वीकार करते हैं कि आधारभूत संरचना पर अभूतपूर्व काम हुआ। आरोप दरअसल काम की गति और प्रभाव से असहजता का परिणाम है, न कि सच्चाई।



18 प्रतिशत आबादी के साथ बढ़ेगा 70 प्रतिशत राजस्व

07 फरवरी 2026 को दैनिक जागरण में प्रकाशित रिपोर्ट

141 वर्ष का : दाउदनगर नगर परिषद :-02


होगा नया परिसीमन तो बनेगा अधिकतम 35 वार्ड 

मानव संसाधन के साथ बढ़ेगा निकाय का राजस्व

गृह कर के रूप में राजस्व प्राप्ति में होगी उत्तरोत्तर वृद्धि

उपेंद्र कश्यप, जागरण ● दाउदनगर (औरंगाबाद) : नगर परिषद का क्षेत्रफल बड़ा होगा, तो वार्डों की संख्या भी बढ़ेगी और इससे नगर निकाय का राजस्व भी बढ़ेगा। 10 फरवरी 1885 को नगर पालिका के रूप में अधिसूचित दाउदनगर में पहली बार वर्ष 1910 में वार्डों का गठन किया गया था। तब चार वार्ड बनाए गए थे। अभी वर्तमान नगर परिषद में 27 वार्ड हैं। क्षेत्र विस्तार के साथ जब परिसीमन होगा तो कार्यपालक पदाधिकारी ऋषिकेश अवस्थी के मुताबिक अधिकतम 35 वार्ड शहर में हो जाएंगे। भखरुआं का जो हिस्सा नगर निकाय में जुड़ेगा उससे लगभग 18 आबादी बढ़ेगी, लेकिन निकाय का राजस्व लगभग 70 तक बढ़ जाएगा। श्री अवस्थी बताते हैं कि गृह कर से वर्तमान नगर परिषद को लगभग 32 लाख रुपया वार्षिक प्राप्त होता है। सर्वे का काम चल रहा है और उम्मीद है कि नगर परिषद के वर्तमान क्षेत्र से लगभग एक से डेढ़ करोड़ रुपये राजस्व की प्राप्ति हो सकेगी। लेकिन जब भखरुआं का हिस्सा इसमें जुड़ जाएगा तो गृह कर के रूप में एक करोड रुपये लगभग और वृद्धि होने का अनुमान है। इस तरह क्षेत्र विस्तार और नए मूल्यांकन के बाद प्राप्त होने वाले गृह कर से लगभग ढाई करोड रुपये वार्षिक राजस्व प्राप्त होने का अनुमान नगर परिषद को है। तब भखरुआं में स्थित दुकान माल, शोरूम, बैंक समेत अन्य सरकारी गैर सरकारी कार्यालयों एवं आवासों से गृह कर के रूप में नगर निकाय को राजस्व की प्रति होनी शुरू होगी। जिससे राजस्व में उत्तरोत्तर वृद्धि की उम्मीद नगर परिषद को है।



चट्टी से नगर निकाय की यात्रा


जब वर्ष 1885 में नगर पालिका का गठन हुआ था उसके पहले भी दाउदनगर मगध और शाहाबाद क्षेत्र में चट्टी के रूप में मशहूर था। कहावत मशहूर है- शहर में सासाराम और चट्टी में दाउदनगर। तब और अब में काफी कुछ महत्वपूर्ण बदलाव हुआ है। वर्ष 2002 में जब दूसरी बार बिहार में नगर निकाय चुनाव प्रारंभ हुआ तो दाउदनगर नगर पंचायत बना। फिर वर्ष 2018 में नगर परिषद। अब कद नहीं क्षेत्र का विस्तार हुआ है।


12 से 22 सौ पर एक वार्ड


नगर निकाय में 1200 से 2200 की आबादी पर एक वार्ड का गठन होता है। वर्ष 2011 की जनगणना के अनुसार 52000 की आबादी वाले नगर परिषद में 27 वार्ड है। भखरुआं शामिल किए जाने के बाद 9000 की आबादी बढ़ेगी तो नया लगभग पांच वार्ड बनेंगे। कार्यपालक पदाधिकारी ऋषिकेश अवस्थी के अनुसार पूरे शहर का नया परिसीमन होगा। इससे अधिकतम 35 वार्ड शहर में बन सकेंगे।


Thursday, 5 February 2026

141 वर्ष के नगर निकाय से जुड़ी 18 प्रतिशत नई आबादी

 

06.02.2026 को दैनिक जागरण में प्रकाशित रिपोर्ट 

नगर परिषद दाउदनगर में भखरुआं का शामिल होना तय

मंत्रिमंडल की स्वीकृति के बाद डीएम का सरकार को रिपोर्ट 

क्षेत्र विस्तार पर एक भी नहीं मिला दावा आपत्ति 

उपेंद्र कश्यप ● दाउदनगर (औरंगाबाद) : 10 फरवरी 1885 को दाउदनगर कस्बा से शहर बना था। उसे नगर पालिका का दर्जा प्राप्त हुआ था। तब से अब तक 141 वर्ष हो गए। अब शहरी क्षेत्र का विस्तार अवश्यंभावी है। नगर परिषद के वर्तमान स्वरूप में भखरुआं क्षेत्र के हिस्से को जोड़ा जाना तय है। इससे दाउदनगर का इलाका विस्तार होगा। जनसंख्या के लिहाज से वर्तमान जनसंख्या में लगभग 18 प्रतिशत की वृद्धि होनी तय है। नगर विकास एवं आवास विभाग पटना द्वारा चार अक्टूबर 2025 को क्षेत्र विस्तार से संबंधित अधिसूचना जारी की गई थी। इसके बाद दावा आपत्ति के लिए समय का निर्धारण किया गया। तय समय अवधि में एक भी दावा आपत्ति इस संबंध में प्राप्त नहीं हुआ। नतीजा नगर परिषद द्वारा इस संबंध में एक पत्र जिला पदाधिकारी को चार जनवरी 2026 को लिखा गया। इसी पत्र के आलोक में 21 जनवरी 2026 को जिला पदाधिकारी ने परियोजना पदाधिकारी सह अपर निदेशक नगर विकास एवं आवास विभाग पटना को पत्र भेजा है। पत्र में कहा गया है कि नगर परिषद दाउदनगर द्वारा सार्वजनिक स्थलों, सरकारी कार्यालयों में अधिसूचना को चिपकाय गया एवं नगर परिषद का क्षेत्र विस्तार की उद्घोषणा डुगडुगी बजाकर एवं अन्य प्रचार-प्रसार के माध्यम से भी कराया गया है। इससे संबंधित दावा आपत्ति अप्राप्त है। कार्यपालक पदाधिकारी ऋषिकेश अवस्थी ने बताया कि कोई दावा आपत्ति प्राप्त नहीं हुआ है। यह अब तय हो गया है कि क्षेत्र विस्तार संबन्धी कोई अवरोध अब नहीं रहा। 


भखरुआं की नौ हजार आबादी होगी शहरी

भखरुआं तरारी पंचायत का हिस्सा है। थाना नंबर 75, तिवारी मोहल्ला, कुर्बान बिगहा और बाबा जी का बागीचा। पूरे इलाके को मिलाकर वर्ष 2011 की जनगणना के अनुसार 16460 की आबादी है। कार्यपालक पदाधिकारी ऋषिकेश अवस्थी बताते हैं कि भखरुआं के इस हिस्से की लगभग नौ हजार आबादी नगर परिषद क्षेत्र में शामिल होगी।


75000 होगी शहर की जनसंख्या 

बिहार जाति आधारित गणना 2022 के प्रथम चरण के आंकड़े के अनुसार शहर की आबादी 65543 बताई गई है। 2011 में शहर की आबादी 52364 थी। अब इसमें लगभग नौ हजार भखरुआं की जनसंख्या जुड़ जाएगी। अर्थात नगर परिषद की आबादी लगभग 75 हजार हो जाएगी।


पहले हुई थी विस्तार की कोशिश असफल

पहली बार शहरी क्षेत्र के विस्तार की कोशिश सफल हुई है। इसके पहले

जब वर्ष 1972 से 77 तक यमुना प्रसाद स्वर्णकार नगरपालिका के अध्यक्ष थे तो उन्होंने भखरुआं को शामिल करने की कोशिश की थी। लेकिन कुछ लोग पटना उच्च न्यायालय चले गए और एक रणनीति के तहत राष्ट्रीय इंटर स्कूल में बने नए मतदान केंद्र पर किसी ने मतदान नहीं किया। नतीजा तब भखरुआं नगर पालिका का हिस्सा नहीं बना। 


बैक्रहम मूर ऐसे बन गया भखरुआं मोड़

 

दैनिक जागरण में 5 फरवरी 2026 को प्रकाशित


दाउदनगर की हृदयस्थली का नाम है भखरुआं

नील की खेती और नील कोठियों से है रिश्ता

उपेंद्र कश्यप● दाउदनगर (औरंगाबाद) : आधी रात को स्थित गोलंबर के ध्वस्त होने के बाद भखरुआं की चर्चा खूब हो रही है। आमा आवाम से लेकर इंटरनेट मीडिया तक में। ऐसे में यह जानना बड़ा प्रासंगिक होगा कि इस स्थल का नाम भखरुआं क्यों पड़ा। दाउदनगर में कोई भी व्यक्ति भखरुआं मोड़ सुनकर चौंकता जरूर है। उसके मन में यह जिज्ञासा जरूर उठती है कि इस स्थान का नाम इस तरह का क्यों है। यह अटपटा शब्द लगता है। वर्ष 2007 में प्रकाशित स्मारिका उत्कर्ष में इस विषय में पर चर्चा की गई है। दाउदनगर में दो नील कोठियां है। एक बाजार में पटना मुख्य नहर के पास के समीप देवी मंदिर के नजदीक और दूसरा बुधन बिगहा के पास। बुधन बिगहा में जो नील कोठी है, उसी के मैनेजर हुआ करते थे बैक्रहम मूर। जब भारत गुलाम हुआ करता था तब नील की खेती करने और उपज से नील निकालने के लिए बने नील कोठियों का मैनेजर हुआ करते थे मूर। उन्हीं के नाम पर यह स्थल भखरुआं मोड़ कहा जाने लगा। यह शहर का हृदय स्थल है। 

शिक्षक प्रशिक्षण महाविद्यालय तरार के परिसर में स्थित मंदिर के समीप एक पीपल का पेड़ है। जिसके नीचे दब गया है उनका कब्र। कब्र की कुछ निशानियां बची हुई है। उनके निधन के बाद जब कब्र बनाए गए तो उसके बगल में ही पीपल का पौधा लगाया गया होगा। पीपल का पेड़ विशाल होता गया और कब्र विस्तारित होते पेड़ के दबाव में आकर ध्वस्त हो गया।



बुधन बिगहा से है अंग्रेज अधिकारी मूर का संबंध

बैक्रहम मूर के निवास पर एक नौकर था-बुधन यादव। बुधन बेलाढ़ी के निवासी थे। वह बड़े ही मालिक-सेवी थे। उनके सेवा भाव से प्रभावित हो वैक्रहम मूर जब इंगलैण्ड चले गये तो बुधन को भी साथ लेते गये और घुमाकर ले आये। जब उनकी मृत्यु हुई तो  नील कोठी के पास ही बुधन की पहल पर उनको दफनाया गया। यहां आज भी उस कब्र के अवशेष बचे हुए हैं।