नोनार के प्रभावित किसान अपने बर्बाद खेत में |
बाल लगाने से पहले ही गल गयी फसल
200 किसानो को 500 बिगहा की क्षति
अनुमंडल मुख्यालय से
करीब 12 किलोमीटर दूर नोनार के किसान लूट गए| पानी के जमाव ने उनकी फासला को
बर्बाद कर दिया है| करीब 500 बिगहा में लगी धाना की फसल बर्बाद हो गयी है| इससे
200 किसान के सपने बिखर गए| कई कर्ज में आ गए| इसा इलाके में 18 से 20 क्विंटल धान
प्रति बिगहा की उपज होती है| सा हिसाब से करीब 50 लाख की फसल बर्बाद होने का अनुमान
है| खेत में खादी फसल के डंठल से बाल गायब है| वे गल कर गिर गए है| गोरडीहां
पंचायत के इस गाँव में मौके पर परेशान किसानो ने अपना अहाल इस संवाददाता से इस
उम्मीद में सुनाया कि उन्हें कुछ मुआवजा सरकार दे देगी| राष्ट्रीय किसान संगठन के
बैनर टेल नागेन्द्र सिंह के नेतृत्व में अनुमंडल कार्यालय पर धरना भी दिया गया था
किन्तु कोइ लाभ किसानो को नही हुआ| किसान कुमार जयनंदन सिंह, राम तवक्या यादव, दिनेश्वर
यादव, सुधीर कुमार यादव, द्वारिक यादव, बलबीर यादव, अभय कुमार पाठक, मुनारिक यादव,
कमलेश यादव, जयनंदन, राजेन्द्र चंद्रवंशी, रणधीर यादव, रामदेव, नीरज, वीर भगत ने
बताया कि नुकसान हर साल होता है. किन्तु इस बार काफी अधिक हुआ है| खेत में धान की
फसल खडी हुई किन्तु बाल गल कर गिर गये| दाने ख़त्म हो गए तो सपने भी मर गए| समस्या
यह है की पूंजी तो डूबी ही, अब कर्ज का भी बोझ हो गया| धान का बोझा जिन माथो पर
ढोए जाने थे उन पर अब कर्ज की चिंता ढोए जा रहे है|
डीएम से किसान संघ की गुहार
राष्ट्रीय किसान संगठन के नेता
नागेन्द्र सिंह ने डीएम से अपील की है कि वे यहाँ आये और किसानो की इस समस्या को
देखे| देखने के बाद वे स्वयं पहल कर इसके स्थायी समाधान का प्रयास करेंगे ऐसी
उम्मीद किसानो को है| इन्होने कहा कि आखिर किसान कब तक लाचार बने रेंगे और
राजनीतिक दल व कार्यपालिका उनके नाम पर मजे मारती रहेगी| कहा कि किसान बेचैन है|
उनके धरना प्रदर्शन में पूर्व विधायक सोम प्रकाश भी शामिल हुए| अन्य राजनीतिक दल
भी किसानो के साथ खुद को बताते है किन्तु उनका दर्द हराने के लिए कोइ प्रयास नहीं
कर रहा|
बटाईदार व पट्टेदार की बड़ी मुश्किल
नोनार के कई पट्टेदार या बटाईदार फसल
बर्बादी के साथ जमीन मालिक को कर्ज के बोझ से भी दब गए है| उन्हें इसे चुकाने की
चिंता सताने लगी है| अरुण पासवान, हितन चंद्रवंशी, जीतन चंद्रवंशी, भगवान पासवान
ने बताया की उन्होंने जमीन ली और खेती की| अब जब फासला बर्बाद हो गयी तो जमीन मालिक
को तय राशि या उपज देना ही है| बताया की मालिक को प्रति बिगहा 20 मन चावल देना
होता है| क्या मालिक इस हालात में अपना दावा छोड़ेगा नहीं? इस पर कुमार जयनंदन सिंह
ने कहा कि- जब लाभ होता है तो अधिक नहीं देते| इस तर्क के साथ मालिक घाटा या
बर्बाद होने पर नहीं छोड़ता है| ऐसे में ऐसे बटाईदारो या पट्टेदारो के सामने चुनौती
दोहरी है|
समस्या की वजह क्या है?
नोनार के किसानो की समस्या स्थायी है|
इसकी वजह है गाँव में पानी की आवक बहुत है जबकि निकास न के बराबर है| ग्रामीणों ने
बताया कि महावर जमुआंव समेत दक्षिणी हिस्से से पानी आता है| गाँव के चारो तरफ पानी
जमा रहता है| किसान हर साल उम्मीद में धान रोपते है| कभी थोड़ा नुकसान होता है
किन्तु इसा बार काफी नुकसान हुआ| डराअसल में गाँव से पाने निकलने की सुविधा नहीं
है| आहार, पीन उड़ाही के नाम पर पैसो की बंदरबांट होती रही है| काम
गुनावात्तापूर्र्ण नहीं हुआ| नतीजा अब पानी नहीं निकलता है| इसा समस्या को दूर
करने के लिए मनारेगा से काफी काम करने की जरुरत बतायी जाती है|
No comments:
Post a Comment